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एचएसबीसी की सूची में शामिल भारतीयों के खातों में 4,479 करोड़ रुपए: एसआइटी

स्विस बैंकों में जमा धन के बारे में पहला बड़ा खुलासा करते हुए सरकार ने शुक्रवार को कहा कि एचएसबीसी की सूची में शामिल भारतीयों के खातों में 4,479 करोड़ रुपए जमा हैं और आयकर विभाग ने इनमें से 79 खाताधारकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। इसके अलावा कर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय सहित […]

Author December 13, 2014 8:55 AM
आयकर विभाग ने इनमें से 79 खाताधारकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।

स्विस बैंकों में जमा धन के बारे में पहला बड़ा खुलासा करते हुए सरकार ने शुक्रवार को कहा कि एचएसबीसी की सूची में शामिल भारतीयों के खातों में 4,479 करोड़ रुपए जमा हैं और आयकर विभाग ने इनमें से 79 खाताधारकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।

इसके अलावा कर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय सहित अन्य एजंसियां देश के भीतर कुल मिलाकर 14,957.95 करोड़ रुपए की अघोषित संपत्ति से जुड़े मामलों की भी जांच कर रही हैं। जहां तक विदेशों में संदिग्ध काले धन का मामला है, उक्त खुलासा उन 628 भारतीयों से जुड़ा है जिनके नाम एचएसबीसी की जिनीवा शाखा के खाताधारकों की सूची में सामने आए थे। भारत को यह सूची फ्रांस की सरकार से मिली थी। काले धन के मामलों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआइटी) ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी रपट में उक्त खुलासा किया है। इसके मुताबिक उक्त सूची में शामिल 289 खातों में कोई शेष राशि नहीं मिली।

काले धन पर एसआइटी की दूसरी रिपोर्ट का प्रासंगिक हिस्सा जारी करते हुए एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, ‘628 लोगों में से 201 या तो प्रवासी हैं या उनका अता-पता नहीं है। इसके बाद 427 लोगोें के मामले ही कार्रवाई योग्य बचते हैं। इसके मुताबिक इन मामलों से जुड़ी राशि 4,479 करोड़ रुपए है। इसमें से आयकर विभाग ने 300 से अधिक मामलों में 79 इकाइयों के खिलाफ आकलन को अंतिम रूप दे दिया है।
बयान में कहा गया है, इन लोगों से जुड़े खातों में अघोषित शेष राशि पर 2,926 करोड़ रुपए कर के रूप में लिए गए हैं। इस राशि पर तय ब्याज दर के साथ कर वसूला गया है।

इसके मुताबिक, आयकर कानून, 1961 के तहत 46 मामलों में जुर्माना प्रक्रिया शुरू की गई है। अब तक इस तरह के तीन मामलों में जुर्माना लगाया गया है। अन्य मामलों में प्रक्रिया लंबित है। बयान में हालांकि खाताधारकों के नाम का खुलासा नहीं किया गया है।

छह मामलों में जानबूझकर कर चोरी के प्रयास का अभियोजन शुरू किया गया है जबकि दस अन्य को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इसमें कहा गया है, अन्य मामलों में, कार्रवाई तेज की जा रही है और आने वाले महीनों में अच्छी खासी प्रगति अपेक्षित है।

इससे पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक कार्यक्रम में कहा कि एचएसबीसी की सूची से जुड़े मामलों में कार्रवाई 31 मार्च 2015 तक पूरी कर ली जाएगी। एसआइटी ने एक तय राशि से ज्यादा नकदी ले जाने पर लगाम लगाने, एक लाख रुपए से अधिक नकदी व चैक भुगतान पर पैन संख्या देना अनिवार्य करने सहित अनेक कदम सुझाए हैं। इसके साथ ही उसने खनन, पोंजी योजनाओं, लौह अयस्क निर्यात, निर्यात आयात प्रक्रियाओं के दुरुपयोग को काले धन के लेन देने के लिहाज से प्रमुख क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया है।

इसके मुताबिक अंगड़िया लोग अघोषित धन के लेन देन में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। अंगड़िया आमतौर पर गुजरात व महाराष्ट्र में बड़ी मात्रा में नकदी लाने ले जाने वाले व्यक्ति की भूमिका निभाते हैं। विभिन्न मामलों के बारे में ताजा जानकारी देते हुए बयान में कहा गया है कि राजस्व आसूचना निदेशालय ने लौह अयस्क से जुड़े 31 मामलो में सूचना जुटाई है जिसमें से 11 पक्षों ने कम मूल्यांकन (अंडर वेल्यूशन) स्वीकार करते हुए 116.73 करोड़ रुपए का भुगतान किया है। अन्य मामलों में कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

प्रवर्तन निदेशालय ने 400 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्ति कुर्क की है और ओड़िशा में खनने मामले में एक व्यक्ति को गिरप्तार किया है। गोवा व झारखंड में अवैध खनन से जुड़े अनेक मामलों में शुरुआती पड़ताल व जांच जारी है। कर्नाटक में 995.97 करोड़ रुपए की संपत्ति के मामले में तीन कुर्की आदेश जारी किए गए हैं।

रपट में यह भी रेखांकित किया गया है कि कोलकाता हाई कोर्ट के एक स्थगनादेश के चलते प्रवर्तन निदेशालय को पोंजी चिटफंड मामलों में कार्रवाई करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

झारखंड में एक अन्य मामले में 452.43 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्ति की अस्थायी कुर्की के आदेश जारी किए गए है। इसके अलावा कर्नाटक में खनन के एक अन्य मामले में 884.13 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियों को कुर्क किया गया है।

इसी तरह आंध्र प्रदेश में 1093.10 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्ति कुर्क की गई है। इसके साथ ही रपट में काले धन पर काबू पाने के लिए उपाय भी सुझाए गए हैं। यूरोपीय देशों का उदाहरण देते हुए रपट में कहा गया है कि एक सीमा तक ही नकदी रखने और लाने ले जाने की इजाजत होनी चाहिए। सरकार दस लाख रुपए या 15 लाख रुपए तक जो भी उचित लगे, सीमा तय करने पर विचार कर सकती है।

इसमें कहा गया है, इससे अघोषित संपत्ति रखने पर काबू पाने में बड़ी मदद मिलेगी। इससे एक स्थान से दूसरे स्थान तक अघोषित नकदी पहुंचाने पर भी काबू पाया जा सकेगा जो कि इस समय संभवत: अंगड़िया और अन्य माध्यमों के जरिए खुलेआम होता है।

एसआइटी ने कालेधन का पता लगाने के लिए देश के निर्यात-आयात आंकड़ों को उसी अवधि के दौरान दूसरे देशों के आंकड़ों के साथ तिमाही आधार पर मिलान करने की संस्थागत प्रणाली स्थापित किए जाने का भी सुझाव दिया है।

इसके मुताबिक शिपिंग बिल में उस सामान व मशीनरी का अंतरराष्ट्रीय मूल्य भी शामिल होना चाहिए जिसका निर्यात किया जाना है। बयान के मुताबिक, इस सुझाव पर विचार हो रहा है और इसके जल्द ही कार्यान्वयन की उम्मीद है।

एसआइटी ने सुझाव दिया है कि 50 लाख रुपए या इससे अधिक की कर चोरी को ‘निर्दिष्ट अपराध’ बनाया जाना चाहिए ताकि इसमें धन शोधन निरोधक कानून (पीएमएलए) के तहत कार्रवाई की जा सके। इसी तरह जिन मामलों में कोई व्यक्ति या फर्म नियमों का उल्लंघन करते हुए विदेश में संपत्ति जुटाने का दोषी पाया जाता है उन मामलों में फेमा में यह प्रावधान किया जाना चाहिए कि समान राशि की संपत्ति देश में ही जब्त की जा सके। इसी तरह प्रवर्तन एजंसियों, वित्तीय आसूचना इकाई और अन्य भागीदारों के बीच सक्रियता के साथ संवाद होना चाहिए।

एसआइटी ने कहा है कि जिन मामलों में प्रवर्तन निदेशालय ने संपत्ति कुर्क की है और आयकर बकाया है वहां प्रवर्तन निदेशालय के पास बकाया वसूली कुर्क संपत्ति से करने का विकल्प होना चाहिए।

इसने केंद्रीय केवाइसी रजिस्ट्री स्थापित करने का सुझाव दिया है ताकि वित्तीय लेन देन में कई तरह के पहचानपत्रों के इस्तेमाल पर रोक लग सके। एसआइटी ने कहा है कि आयकर अभियोजन के 5000 लंबित मामलों से निपटने के लिए मुंबई में पांच अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालतें गठित की जानी चाहिए।

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