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‘₹2000 का नोट जारी करना सरकार की बड़ी चूक’

नोटबंदी के बाद 2000 रुपए का नोट जारी करना सरकार की बहुत बड़ी चूक है क्योंकि इसी के सहारे बड़े पैमाने पर कालेधन को सफेद किया गया है।

Author मथुरा | December 28, 2016 21:28 pm
2000 के नए नोट। (Photo:PTI)

भारतीय आर्थिक संगठन के अध्यक्ष व भारतीय लोक प्रशासन संस्थान नई दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर पीके चौबे ने कहा है कि नोटबंदी के बाद 2000 रुपए का नोट जारी करना सरकार की बहुत बड़ी चूक है क्योंकि इसी के सहारे बड़े पैमाने पर कालेधन को सफेद किया गया है। वे दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय में इण्डियन इकोनोमिक एसोसिएशन की तीन दिवसीय कार्यशाला में भाग लेने आए हैं। कार्यशाला मंगलवार (27 दिसंबर) को शुरू हुई और गुरुवार तक चलेगी।

प्रो. चौबे ने नोटबंदी की सराहना करते हुए कहा कि इससे कालाधन उजागर हुआ है लेकिन ‘सरकार ने 2000 का रुपए का नोट जारी कर बड़ी भूल की क्योंकि इससे कालाधन सफेद करने वालों को ही सहूलियत हुई है।’ उन्होंने कहा- कालेधन वालों ने बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से बड़ी मात्रा में अपनी काली कमाई को 2000 रुपए के नोटों के माध्यम से वैध नोटों में तब्दील कराया है। जगह-जगह पकड़ी जा रहीं 2000 रुपए की गड्डियां इसका प्रमाण है। उन्होंने इस प्रक्रिया में चार्टर्ड एकाउण्टेण्टों की भूमिका पर भी सवालिया निशान लगाया है।

वहीं इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलेपमेंट रिसर्च, मुंबई के संस्थापक निदेशक एवं योजना आयोग के सदस्य रहे प्रो. किरीट पारिख ने कहा कि नोटबंदी से इस समय भले ही जनता को परेशानी हो रही है किंतु इससे दीर्घकालिक तौर पर अवश्य फायदा होगा। करीब छह साल बाद इसका फायदा नजर आएगा। उन्होंने कहा कि नोटबंदी में अभी केवल 6 प्रतिशत कालाधन ही बाहर आया है। काले धन पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए सोने की खरीद, रियल एस्टेट क्षेत्र पर भी शिकंजा कसना होगा। क्योंकि अधिकतर (40 फीसद) काले धन का निवेश इन क्षेत्रों में ही होता है।

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