इस साल जिन चार राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनमें से तीन राज्यों को पिछले साल की तुलना में यूनियन टैक्स और ड्यूटी में ज़्यादा हिस्सा मिलने वाला है। इन राज्यों को कुल 9,234 करोड़ रुपये मिलने जा रहे हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में 16वीं वित्त आयोग (Finance Commission) की रिपोर्ट पेश की थी। उस दौरान उन्होंने बताया था कि असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के लिए शेयर बढ़ाया जाएगा।
इस समय असम में बीजेपी की सरकार है, जबकि बाकी राज्यों में विपक्ष की सरकारें हैं, जो केंद्र की बीजेपी सरकार को राजनीतिक चुनौती दे रही हैं। बड़ी बात यह है कि 16वीं वित्त आयोग की रिपोर्ट में सुझाए गए सभी सुधारों को केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया है और इन्हीं सिफारिशों के आधार पर अगले साल के लिए फंड्स भी आवंटित कर दिए गए हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ पता चलता है कि 16वीं वित्त आयोग ने राज्यों को मिलने वाले यूनियन टैक्स के शेयर में बड़ा बदलाव किया है। सबसे ज़्यादा फायदा इस बार केरल को होने वाला है। केरल का यूनियन टैक्स शेयर 2.382 प्रतिशत बढ़ जाएगा, जो 15वें वित्त आयोग में घटकर 1.925 प्रतिशत रह गया था। नए प्रावधानों के तहत केरल को अब अतिरिक्त 6,975 करोड़ रुपये मिलेंगे।
वहीं, असम को 1,994 करोड़ रुपये, तमिलनाडु को 275 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलने जा रहे हैं। अगर पश्चिम बंगाल की बात करें, तो उसे 15वें वित्त आयोग की तुलना में इस बार कुछ कम हिस्सा दिया गया है। हालांकि, वित्त वर्ष 2026–27 में पश्चिम बंगाल को 4,700 करोड़ रुपये मिलेंगे।
लोकल बॉडीज़ को लेकर भी 16वीं वित्त आयोग की रिपोर्ट में बड़ा ऐलान किया गया है। अगले पांच वर्षों के लिए 7.91 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें से 4.35 लाख करोड़ रुपये स्थानीय निकायों के लिए रखे गए हैं, जिनमें ग्राम पंचायत, ब्लॉक पंचायत और जिला पंचायत शामिल हैं।
इसके अलावा, 16वीं वित्त आयोग की रिपोर्ट में स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (SDRF) और स्टेट डिजास्टर मिटिगेशन फंड (SDMF) के लिए कुल 2,04,401 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इसमें असम को 5,825 करोड़ रुपये, केरल को 2,580 करोड़ रुपये, तमिलनाडु को 11,314 करोड़ रुपये और पश्चिम बंगाल को 9,158 करोड़ रुपये मिलने वाले हैं।
बड़ी बात यह है कि इस रिपोर्ट में सिर्फ राज्यों को मिलने वाले फंड का ही ज़िक्र नहीं है, बल्कि कुछ फिस्कल फ्लैग्स (Fiscal Flags) पर भी चिंता जताई गई है। पश्चिम बंगाल की लक्ष्मी भंडार योजना को लेकर सवाल उठाए गए हैं। यह एक कैश ट्रांसफर स्कीम है। रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि इस तरह की सब्सिडी योजनाएं लंबे समय में राज्य के वित्तीय ढांचे पर भारी दबाव डाल सकती हैं।
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