scorecardresearch

Zomato के 10 मिनट में फूड डिलीवरी पर भड़की तेलंगाना की वर्कर्स यूनियन, कहा – बिजनेस के लिए खतरे में न डालें हमारी जान

ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो ने हाल ही में 10 मिनट में फूड डिलीवरी का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का ऐलान किया है। जिसके बाद कंपनी को विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

Zomato के 10 मिनट में फूड डिलीवरी पर भड़की तेलंगाना की वर्कर्स यूनियन, कहा – बिजनेस के लिए खतरे में न डालें हमारी जान
जोमैटो के 10 मिनट फूड डिलीवरी की शुरुआत अप्रैल में गुरुग्राम से होने जा रही है। (फोटो : रॉयटर्स)

ऑनलाइन फूड डिलीवरी एप जोमैटो द्वारा 10 मिनट में फूड डिलीवरी के आईडिया को लेकर तेलंगाना गिग एंड प्लेटफार्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) का गुस्सा फूटा है। यूनियन ने कहा है कि जोमैटो द्वारा शुरू किया गया यह पायलट प्रोजेक्ट डिलीवरी वर्कर्स की जिंदगी खतरे में डालने वाला है। न्यूज़ वेबसाइट बिजनेस टुडे से बातचीत करते हुए यूनियन के स्टेट प्रेसिडेंट ने कहा कि इंस्टेंट फूड डिलीवरी मॉडल गिग वर्कर्स को पुलिस और कानून का पालन कराने वाली संस्थाओं के जुर्माने, सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम के प्रति उजागर करेगा। वहीं टीजीपीडब्ल्यूयू के अध्यक्ष ने कहा इस तेजी के साथ तो रोबोट भी काम नहीं करते हैं और फिर ये इंसानों के तो बस की बात नहीं है।

संसद में भी उठा चुकी है आवाज: देश के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम इसके खिलाफ आवाज उठाते हुए सरकार से डिलीवरी वर्कर्स के लिए गाइडलाइंस बनाने की मांग की। इस दौरान लोकसभा में उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी के जरिए नए अवसर पैदा होते हैं। आज हमारे पास कुछ ऐसा है जिसे गिग इकोनामी कहते हैं। जिसमें गिग वर्कर होता है। गिग वर्कर का तकनीक के कारण अपने नियोक्ता से गैर पारंपरिक संबंध होता है। वर्तमान में भारत में करीब 1.5 करोड़ वर्कर गिग इकोनामी से जुड़े हैं जिनकी संख्या आने वाले सालों में बढ़कर 5 करोड़ और 10 करोड़ तक हो सकती है।

जो कंपनियां इस गिग इकॉनमी को उनका बाजार मूल्यांकन अरबों में हैं। इसमें जोमैटो स्विग्गी, उबर और ओला जैसी कंपनियां हैं। ये कंपनियां अपने ग्राहकों से 10 मिनट में खाना और किराने का सामान डिलीवरी करवाने का वादा करती हैं। ये डिलीवरी कंपनी के कर्मचारियों द्वारा नहीं की जाती बल्कि एजेंट यह डिलीवरी करते हैं। जो दोपहिया वाहन चलाते हैं। ये डिलीवरी एजेंट अपने पीछे वाली सीट पर भारी वजन लेकर चलते हैं और ये डिलीवरियां निजी वाहन पर की जाती हैं जिसके कारण कई बार दुर्घटना होने के चलते इन लोगों को इंश्योरेंस कंपनी मुआवजा नहीं देती हैं। आगे उन्होंने कहा कि सरकार को इन डिलीवरी कंपनियों को विनियमित करना चाहिए जिससे कर्मचारियों को इन डिलीवरी कंपनियों के अवास्तविक लक्ष्य से बचाया जा सके।

जोमैटो की 10 मिनट डिलीवरी योजना: ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो ने हाल ही में 10 मिनट में फूड डिलीवरी का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का ऐलान किया है। जिसके बाद से सोशल मीडिया के साथ अन्य जगह पर कंपनी को विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

पढें व्यापार (Business News) खबरें, ताजा हिंदी समाचार (Latest Hindi News)के लिए डाउनलोड करें Hindi News App.

अपडेट