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यूनियन बजट 2017: योगेंद्र यादव- किसानों के लिए निराशाजनक है ये बजट

स्वराज अभियान के प्रमुख योगेंद्र यादव ने जंतर मंतर पर किसान संसद में आम बजट को किसानों को निराश करने वाला बताया।

स्वराज अभियान के प्रमुख योगेंद्र यादव ने जंतर मंतर पर किसान संसद में आम बजट को किसानों को निराश करने वाला बताया। जंतर मंतर पर दिन भर चली किसान संसद में बुधवार को उत्तरी भारत के अलग-अलग जगहों से किसान आए हुए थे जहां वे टीवी स्क्रीन पर बजट भाषण देख रहे थे। स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि नोटबंदी से पहले ही से किसान काफी परेशान था। उन्हें मौजूदा बजट से काफी उम्मीदें थीं कि इस बजट में सरकार किसानों के हितों में कई नई घोषणाएं करेगी, लेकिन आज किसान की उम्मीद टूट गई जब बजट में उसके लिए कोई भी ऐसी घोषणा की गई, जिससे उसे लगे कि वह अपना पुश्तैनी धंधा जारी रख सकेगा। उन्होंने केंद्र सरकार के बजट को कारपोरेट सेक्टर के हित में बताया है।

यादव ने कहा कि देश के ज्यादातर हिस्सों के किसान पहले ही से सूखे की मार झेल रहे थे। बजट में केंद्र सरकार ने किसान की न्यूनतम आय से जुड़ी कोई भी घोषणा नहीं की है। खेती में प्रयोग होने वाले खाद, बीज, बिजली, पानी को लेकर भी कोई घोषणा नहीं की गई है। कर्ज में डूबे किसान की कर्ज माफी की भी कोई घोषणा नहीं की गई है। सरकार लगातार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की बात करती है, लेकिन उससे फायदा किसानों को नहीं बल्कि कारपोरेट सेक्टर को हो रहा है।

जेटली ने गंवाया अवसर : अजय माकन

पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन ने आम बजट को दिशाहीन करार देते हुए कहा है कि सही बात तो यह है कि वित्त मंत्री ने एक अहम अवसर गंवा दिया। जिस तरह का बहुमत केंद्र सरकार को हासिल है उसके दम पर वह देश की जनता को राहत देने के कई मजबूत कदम उठा सकते थे। माकन ने कहा कि वित्त मंत्री जेटली अपने दो घंटे के बजट भाषण में कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए की पिछली सरकार की योजनाओं को ही दोहराते रहे। उन्होंने एक भी ऐसे कदम की घोषणा नहीं की जिससे लगे कि केंद्र की मोदी सरकार देश के किसानों, नौजवानों, महिलाओं, गरीब वर्ग के लोगों, अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य वंचित तबके के लोगों को राहत देने के लिए कुछ करना चाहती है।

माकन ने कहा कि बगैर सोचे-समझे थोपी गई नोटबंदी के जख्मों से परेशान देश के लोग इस बजट से कुछ राहत की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन बजट ने उनके जख्मों पर मरहम लगाने के बदले उल्टे नमक लगाने का काम किया है। नोटबंदी केंद्र की मोदी सरकार बगैर किसी पुख्ता तैयारी व सोच के थोपी गई । सरकार नोटबंदी को भले अपनी ओर से सफल करार देती फिरे लेकिन हकीकत यही है कि इसकी वजह से विकास की दर धीमी हुई है, मांग व आपूर्ति में कमी आई है, निजी निवेश में भारी गिरावट दर्ज की गई है, तरल मुद्रा की उपलब्धता में कमी आई है। सबसे बड़ी बात यह है कि चारों ओर अनिश्चितता का माहौल बना है।माकन ने कहा कि रेलवे का बजट वित्त मंत्री ने महज तीन मिनट में पेश कर दिया लेकिन इससे यात्रा करने वाले करोड़ों रेल यात्रियों को कोई राहत नहीं दी और न ही उनकी किसी समस्या का समाधान किया। वित्त मंत्री यह बताने में पूरी तरह नाकाम रहे कि आखिर रेलवे भारी घाटे में क्यों है और उसकी आपरेटिंग दर 108 के तक क्यों गिर गई है।

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