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यूनियन बजट 2017: आयकर छूट की बाजीगरी से सरकार की आय दोगुनी

आयकर छूट की बाजीगरी से सरकार ने अपनी आय बढ़ाने का इंतजाम कर लिया है।

Author February 2, 2017 3:16 AM
आम बजट 2017-18 पेश करने के लिए संसद पहुंचे केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली। (PTI Photo Vijay Verma/1 Feb, 2017)

दीपक रस्तोगी

आयकर छूट की बाजीगरी से सरकार ने अपनी आय बढ़ाने का इंतजाम कर लिया है। एक हाथ से 15,500 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है, तो दूसरी ओर बड़ी आय वालों से कर वसूली में अधिभार जोड़े जाने पर 27,700 करोड़ सरकार के खाते में आने की उम्मीद बनी है। वित्त मंत्रालय ने रुपए की तरलता प्रणाली को सॉफ्टवेयर से जोड़ा है। इससे 25 लाख नए लोगों को आयकर प्रणाली से जोड़ा जाएगा। आयकर के दायरे में स्टार्ट अप कंपनियों की संख्या बढ़ेगी। साथ ही लघु और मझोले उद्योगों और छोटे कारोबारियों के बड़े वर्ग को आयकर के दायरे में लाने की तैयारी है।  बजट तैयार करते वक्त अफसरों ने हिसाब लगाया है कि सिर्फ आयकर प्रणाली से सरकार की आमदनी एक लाख करोड़ रुपए बढ़ जाएगी। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) कंपनियों के मामले में 50 करोड़ रुपए तक का सालाना कारोबार करने वाली छोटी कंपनियों के लिए आयकर घटा कर 25 फीसद किया जाना है। 2015-16 के आंकड़ों के अनुसार 6.94 लाख कंपनियां रिटर्न दाखिल करेंगी। इस उपाय से 7,200 करोड़ रुपए सालाना का राजस्व बढ़ेगा।

नौकरी पेशा वर्ग को जो छूट दी गई है, उसमें ढाई लाख तक की आय पर छूट दी गई है। सरकार की उम्मीद है कि कर बोझ कम करने से ज्यादा संख्या में लोग कर प्रणाली के दायरे में आएंगे।। पांच लाख रुपए तक की आमदनी वालों को जो छूट दी गई है, उससे सरकार को 15,500 करोड़ रुपए का राजस्व छोड़ना होगा, लेकिन दस लाख से ज्यादा वालों से सरचार्ज वसूल कर 27,700 करोड़ रुपए खाते में आएंगे। वित्तीय सलाहकार कंपनी अर्नस्ट एंड यंग के टैक्स पार्टनर सोनू अय्यर के अनुसार, सरकार को कामकाजी वर्ग पर कर भार कम करना होगा। नए करदाताओं की पहचान करनी होगी। साथ ही, वित्त मंत्रालय ने वित्तीय खुफिया इकाई की मदद से कर न देने वाले वर्ग पर नजर रखनी शुरू की है, जिनकी संख्या एक अनुमान के अनुसार 25 लाख से ज्यादा है।

‘क्लीन मनी’ सॉफ्टवेयर के जरिए ऐसे लोगों की पहचान की है, जिन्होंने एक बार में पांच लाख रुपए से ज्यादा की रकम अपने खातों में जमा कराई है। उन्हें आयकर विभाग सूचना भेजकर दस दिनों के भीतर ब्योरा मांगेगे। ऐसा न करने वालों के मामले प्रवर्तन निदेशालय को भेजे जाएंगे। इस प्रक्रिया में आने वालों से एक लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय का अनुमान है। देश में टैक्स न जमा करने वालों की संख्या बढ़ी। अभी देश में सिर्फ 16 लाख लोगों की आय पांच लाख रुपए से ज्यादा के आंकड़े हैं। कारोबारियों में सिर्फ 20 लाख लोग पांच लाख तक की आय दिखाते हैं। 25 लाख लोग दस लाख से ज्यादा आय वाले हैं। सालाना तीन लाख रुपए तक की आय वालों के लिए कर देनदारी शून्य होगी।

करदाताओं को राहत

तीन से लेकर साढ़े लाख रुपए तक की आय वालों के लिए देनदारी सिर्फ 2500 रुपए होगी। पांच लाख रुपए तक की आय वाले करदाताओं की कर देनदारी घटा कर आधी की जा रही है। बाद के स्लैब में आने वालों को भी 12,500 रुपए का एक समान लाभ मिलेगा। इस राहत के कारण होने नुकसान की भरपाई अधिभार से की जाएगी। सालाना कर योग्य आय 50 लाख रुपए से लेकर एक करोड़ रुपए तक वाले से सरकार को 27,700 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान है। ढाई लाख तक आयकर शून्य होगी। ढाई से पांच लाख तक पांच फीसद, पांच से दस लाख तक 12500 रुपए और पांच लाख से ज्यादा की रकम पर 20 फीसद, 10 लाख से ज्यादा की आय पर 1,12,500 रुपए के साख दस लाख से ज्यादा की रकम पर 30 फीसद का कर लगेगा। 60 साल से ज्यादा उम्र वालों के लिए तीन लाख की आय पर कर शून्य, तीन से पांच लाख तक पांच फीसद, पांच से दस लाख तक दस हजार रुपए और 20 फीसद, 10 लाख से ज्यादा पर 1,10,000 रुपए और 30 फीसद कर।

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