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ये होती है बजट बनाने वाली पूरी टीम, जानिए

केंद्रीय बजट अकेले वित्त मंत्री नहीं तैयार करते, उसे बनाने में कई सचिवों और अधिकारियों की भी अहम भूमिका होती है। जानिए उनके बारे में।

2016-2017 बजट: अपनी टीम के साथ वित्त मंत्री अरूण जेटली। (फाइल फोटो)

संसद का बजट सत्र आगामी फरवरी महीने में शुरु हो जाएगा। बजट बनाने का काम आसान नहीं होता। वित्त मत्रालय से संबंधित तमाम अधिकारियों के अलावा और भी कई लोगों की बजट तैयार करने में अहम भूमिका होती है। आइए जानते हैं बजट तैयार करने वाली टीम के बारे में।

वित्त राज्य मंत्री- वित्त मंत्री के बाद बजट तैयार करने वाले दल में सबसे अहम भूमिका वित्त राज्य मंत्री की होती है। इन पर यह जिम्मेदारी होती है कि यह वित्त मंत्रालय से जुड़े तमाम यूनिट्स से महत्वपूर्ण जानकारियां, जिनकी बजट तैयार करने के लिए जरूरत होती है, उन्हें इक्ट्ठा कर वित्त मंत्री से साझा करें। इसके अलावा इनका एक और अहम काम वित्त मंत्री की बजट स्पीच तैयार कराने का भी होता है।

वित्त सचिव- वित्त मंत्रालय से जुड़े केंद्रीय मंत्रियों के बाद सचिवों पर बजट तैयार करने की जिम्मेदारी होती है। इनका काम एक तरह से बजट बनने की पूरी प्रक्रिया को मॉनिटर करने का होता है के इंचार्ज होते हैं। इनका काम बजट तैयार करने में उन सभी पहलुओं को भी ध्यान में रखने का होता है जिससे फंड का सही तरीके से इस्तेमाल किया जा सके। वित्त सचिव को फिसिकल डेफिसिट, फंड्स का ट्रांस्फर या आवंटन, सरकारी खर्चे के ब्यारे को काबू में रखना और सरकारी योजनाओं के लिए फंड्स तैयार करवाना जैसी अहम जिम्मेदारियां होती हैं।

आर्थिक मामलों के सचिव- इनका काम अलग-अलग सेक्टर्स से जुड़े लोगों से कॉर्डिनेट करने का होता है जिससे की बजट में सभी सेक्टर्स की जरूरतों को समझकर सही तरीके से फंड्स का आवंटित किया जा सकें। साथ ही आर्थिक विकास को ध्यान में रखते हुए इनकी जिम्मेदारी बजट तैयार करने के साथ-साथ आरबीआई गवर्नर से तालमेल रखने की भी होती है।

राजस्व सचिव- राजस्व विभाग का काम न सिर्फ बजट तैयार करने का होता है बल्कि ये सभी मंत्रालयों की गतिविधियों के संचालन को भी देखता है। क्योंकि इस विभाग का काम राजस्व यानी रेवेन्यू बनाने का होता है, ऐसे में राजस्व सचिव की जिम्मेदारी बहुत अहम होने के साथ-साथ काफी मुश्किल भी हो जाती है। बजट में सरकारी योजनाओं के लिए किया जाने वाला हर आवंटन राजकीय कोष से उपलब्ध कराया जाता है जो इनके विभाग की निगरानी में होता है। इसके अलावा सेंट्रल बोर्ड ऑफ टैक्सिस (सीबीडीटी) और सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज़ एंड कस्टम्स (सीबीईसी) भी राजस्व विभाग के अंतरगत आता है। इसीलिए तमाम तरह के टैक्स को मैनेज करने का काम भी देखते हैं। बजट में टैक्स कैसे बढ़ाया जाएगा, कितनी छूट दी जाएगी जैसी महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखने की जिम्मेदारी राजस्व सचिव की होती है और यही टैक्स स्ट्रक्चर तैयार करने के लिए सभी जरूरी पहलूओं पर जानकारी देते हैं।

वित्त सेवा सचिव- बजट बनने की प्रक्रिया में इनका काम बैंकिंग और बीमा सेक्टर के नीति निर्धारण, योजना बनाने और क्रियान्वयन पर ध्यान देने का होता है। केंद्रीय बजट हर एक सेक्टर को कवर करता है जिसमें से बैंकिग और बीमा सेक्टर भी अहम है। ऐसे में कैसे सरकार इन दो सेक्टरों के विकास के लिए फंड्स आवंटित करे, इसकी जानकारी जुटाने का काम वित्त सेवा सचिव का होता है। साथ ही यह बैंकिंग से सेक्टर से जुड़े अहम फिल्ड्स जैसे की लोन रिकव्री पर भी यह ध्यान रखते हैं।

विनिवेश सचिव- सरकार कई बार अपने राजकोषीय घाटे को कम करने या फिर राजस्व बढ़ाने के लिए कई बार विनिवेश यानी डिसइंवेस्टमेंट का सहारा लेती है। इसका मतलब होता है सरकारी संपत्ति या सरकारी इक्विटी को बेचकर राजस्व बढ़ाना। यह काम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों को ध्यान में रखकर ही किया जाता है और इसे करने की जिम्मेदारी विनिवेश सचिव की होती है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार- देश के आर्थिक विकास को सही से संचालित करने के लिए आर्थिक सलाहकार की भी अहम जिम्मेदारी होती है। यह सभीआर्थिक पहलुओं को ध्यान में रखकर, देश के आर्थिक विकास, इंडस्ट्री से लेकर कृषि तक, सभी अहम सेक्टरों के विकास का स्ट्रक्चर या मॉडल तैयार करते हैं।

संयुक्त सचिव, बजट- इनका काम आर्थिक मामलों पर नजर रखने का होते है। जब बजट लगभग पूरी तरह से तैयार हो जाता है तो उसकी पठकथा लिखे जाने का काम यही पूरा करते हैं। साथ ही यह वित्त मंत्रालय से लेकर, वित्त विभाग के सभी सचिवों से कॉर्डिनेट करते हैं और कई बार वित्त मंत्री की बजट स्पीच तैयार करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

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