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नरेंद्र मोदी सरकार ने नीति आयोग की सुनी तो इस बजट में घट जाएगा आपका इन्‍कम टैक्‍स का बोझ

12वीं पंचवर्षीय योजना पूरे होने से ढाई महीने पहले नीति आयोग ने सरकार को सुझाव दिया है कि कर नियमों में जटिलता को खत्म किया जाना चाहिए और उसे सरल बनाया जाना चाहिए।

पिछले साल वित्त मंत्री अरुण जेटली बजट पेश करने के लिए संसद में जाते हुए। (Express Photo: Neeraj Priyadarshi)

नीति आयोग ने केन्द्र सरकार को इन्कम टैक्स के स्लैब में कुछ बदलाव करने का सुझाव दिया है। अगर आयोग का सुझाव केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली मानते हैं और आगामी बजट में उसे शामिल करते हैं तो लोगों पर पड़ने वाला आय कर बोझ कुछ कम हो सकता है। आयोग ने अपने सुझाव में 2.5 लाख इन्कम स्लैब को बढ़ाने की जगह 10 फीसदी कर के दायरे में आने वाले स्लैब में 2 लाख की बढ़ोत्तरी का सुझाव दिया है। यानी 2.5 लाख तक के स्लैब में कोई फेरबदल न करते हुए उसके बाद के 5 लाख तक के स्लैब को 7 लाख करने का सुझाव आयोग ने दिया है।
अगर ऐसा होता है तो 7 लाख आय वाले लोगों को मौजूदा 20 फीसदी आय कर की जगह सिर्फ 10 फीसदी चुकाने होंगे और उन्हें 10 फीसदी कर का फायदा हो सकता है। मौजूदा समय में 5 से 7 लाख तक की आय पर 20 फीसदी टैक्स लिया जा रहा है। टैक्स सुधारों के लिए जेटली पहले भी काम करते रहे हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने पहले बजट (2014-15) में ही आय कर की सीमा को 2 लाख से बढ़ाकर 2.50 लाख कर दिया था।

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वर्तमान में तीन टैक्स स्लैब है। इसके तहत जिनकी सालाना आय 2.5 लाख से कम है उन्हें टैक्स अदा करने से छूट मिली हुई है। इसके बाद 10, 20 और 30 प्रतिशत की दर से आय कर लगाया जाता है। सालाना 2.5 लाख से 5 लाख तक कमाने वाले से 10 पर्सेंट टैक्स वसूला जाता है। जबकि 5 लाख से 10 लाख तक सालाना इन्कम वालों से 20 प्रतिशत और 10 लाख से ज्यादा की कमाई करने वाले को 30 पर्सेंट टैक्स देना होता है। अब सरकार नए टैक्स स्लैब और रेट्स पर विचार कर रही है।

आयोग ने बजट के मद्देनजर रोजगार सृजन पर भी सुझाव केन्द्र सरकार को दिया है। 12 वीं पंचवर्षीय योजना (2012-17) के अंतिम समय में नीति आयोग चाहता है कि टैक्स टेररिज्म से लोगों को निजात मिले और ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे कि लोगों में स्वत: आय कर अदायगी का प्रचलन बढ़ सके। 12वीं पंचवर्षीय योजना पूरे होने से ढाई महीने पहले नीति आयोग ने सरकार को सुझाव दिया है कि कर नियमों को सरल बनाया जाना चाहिए। ताकि भविष्य में निवेशकों को कठिनाई न हो और वो निर्भीक होकर यहां निवेश कर सकें।

आयोग ने विदेशी निवेश बढ़ाने के मद्देनजर लिखा है कि चीन में फॉक्सकॉन की तरह ऐसी भी कंपनियां हैं जो 13 लाख कर्मचारियों को रोजगार देती है और उन्हें प्रति घंटे की दर से 3 डॉलर का भुगतान करती है लेकिन भारत ऐसी किसी भी तरह की कंपनी, जो इतना रोजगार और इतने पारिश्रमिक देती है, को नजरअंदाज नहीं कर सकती।

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