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यूनियन बजट 2017: मीडिल क्लास की नहीं हुई बजट से उम्मीदें पूरी, दूरगामी प्राभव की उम्मीद

आयकर पर बजटीय रियायत से यह वर्ग थोड़ा खुश तो है, लेकिन इसे नाकाफी मान रहा है।

नोटबंदी के मुद्दे पर केंद्र की मोदी सरकार को व्यापक समर्थन देने वाले मध्यवर्ग को इस साल के बजट से खासी अपेक्षाएं थीं। यह वर्ग नोटबंदी के कारण अपने ‘बलिदान’ के एवज में काफी कुछ उम्मीदें लगाए बैठा था। सरकार का बजट मध्यमार्ग वाला ही है। हालांकि, आयकर पर बजटीय रियायत से यह वर्ग थोड़ा खुश तो है, लेकिन इसे नाकाफी मान रहा है। ज्यादातर लोगों का मानना है कि 5 लाख तक के आय पर किसी तरह का कर होना ही नहीं चाहिए, जबकि एक वर्ग अभी बजट की भाषा को समझने की कोशिश में है और अपेक्षा कर रहा है कि सरकार के प्रस्तावों का ‘कुछ दूरगामी’ प्रभाव होगा।

गुड़गांव की एक निजी कंपनी में काम करने वाले एमजी दास ने कहा, ‘करों में किसी भी तरह की रियायत मेरे लिए तो लाभकारी है, लेकिन यह तो न्यूनतम है। मेरा मानना है कि 5 लाख तक की आमदनी पर किसी तरह का कर होना ही नहीं चाहिए’। हालांकि, दास नोटबंदी के प्रभावों को लेकर अभी भी आशान्वित दिखे और कहा कि भविष्य में इसका जबरदस्त प्रभाव दिखेगा। वहीं कमानी आडीटोरियम के सहायक प्रबंधक वी. बोलानी का मानना है कि आयकर में कम से कम 10 लाख तक की आमदनी पर सरकार को अच्छी राहत देनी चाहिए थी, क्योंकि महंगाई के परिप्रेक्ष्य में मध्यवर्ग की परिभाषा बदल गई है। उन्होंने कहा कि जो भी रियायत दी गई है, उसका लाभ तभी है जब रोजमर्रा की चीजों के दाम नहीं बढ़े, महंगाई पर लोक लगी रहे। बोलानी का इशारा भविष्य में लगने वाले जीएसटी की तरफ था।

पिस्टन इंडिया प्रा. लि. में कार्यरत भरत कुमार ने बजट को संतुलित बताया और कहा,‘2.5 से 5 लाख तक के आय पर लगने वाले कर को 10 फीसद से घटा कर 5 फीसद किया जाना प्रसंशनीय है, लेकिन जो करदाता हैं सरकार उनके लिए क्या इंसेंटिव देगी। कर के दायरे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाने की सरकार की मंशा के सफल होने पर प्रश्नचिह्न है’। सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी मुकेश ने कहा, ‘उनकी पेंशन तो कर के दायरे में है ही नहीं, इसलिए उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन उनके उम्र में स्वास्थ रहना एक अहम सवाल है और इसके लिए सरकार क्या कुछ करती है देखना होगा’। हालांकि, उन्होंने कहा कि नौकरीपेशा लोगों की अपेक्षा थी कि आयकर में बड़ी छूट मिलती। एक निजी कंपनी में नौकरी कर रही शिप्रा मिश्रा ने कहा कि महिलाओं के लिए आयकर में छूट की अलग सीमा होनी चाहिए, छूट की वर्तमान सीमा नाकाफी है।

केंद्रीय विद्यालय से प्रिंसपिल के पद से सेवानिवृत्त रजनी उत्पल ने बजट को पारदर्शी, भविष्यउन्मुखी और गरीबों के हित में बताया। उन्होंने कहा कि यह कालेधन की सफाई करने वाला एक सकारात्मक बजट है। हालांकि, करों में रियायत से कुछ हद तक खुश मध्यवर्ग जीएसटी को लेकर सहमा हुआ है कि इधर जो मामूली बचत होगी वह कहीं वस्तु और सेवा करों के जरिए कहीं वापस ने लिया जाए।

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