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आर्थिक समीक्षा में भूमि, रीयल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाने पर जोर

समीक्षा में जीएसटी को अमली जामा पहनाने वाले संविधान संशोधन विधेयक को ‘परिवर्तनकारी’ बताया गया।

Author नई दिल्ली | January 31, 2017 7:08 PM
Arun jaitley news, Arun jaitley latest news, Arun jaitley Note ban, Note ban latest Newsवित्तमंत्री अरुण जेटली। (पीटीआई, फाइल फोटो)

वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) को एक साहसिक नया प्रयोग बताते हुए बजट पूर्व आर्थिक समीक्षा में भूमि एवं अन्य अचल संपत्ति को इस अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के अंतर्गत लाने पर जोर दिया गया है जिससे जीडीपी वृद्धि दर को बढ़ाकर 8-10 प्रतिशत पर ले जाने में मदद मिल सके। भूमि और अन्य अचल संपत्ति कालाधन सृजन के प्रमुख स्रोतों में से एक है। समीक्षा में कहा गया है, ‘जीएसटी एक साझा भारतीय बाजार तैयार करेगा, कर अनुपालन एवं संचालन में सुधार लाएगा और निवेश एवं वृद्धि में तेजी लाएगा। यह भारत के सहकारी संघीय व्यवस्था के संचालन में भी एक साहसिक नया प्रयोग है।’

समीक्षा में जीएसटी को अमली जामा पहनाने वाले संविधान संशोधन विधेयक को ‘परिवर्तनकारी’ बताया गया, लेकिन साथ ही यह भी कहा गया कि जीएसटी की दरें कम और आसान रखने को लेकर राज्यों की ओर से पर्याप्त दबाव नहीं है। ‘ऐसा लगता है कि जीएसटी संभवत: इस वित्त वर्ष के उत्तरार्ध में लागू किया जाएगा। जीएसटी की ओर रुख करना, प्रशासनिक और प्रौद्योगिकीय दृष्टिकोण से इतना जटिल है कि राजस्व संग्रह की संभावना के पूर्ण दोहन में कुछ समय लगेगा।’ राज्यों के अपने जीएसटी संग्रह में किसी तरह की कमी की भरपाई को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता को देखते हुए राजस्व संग्रह के संबंध में परिदृश्य का अनुमान सावधानीपूर्वक लगाना आवश्यक है।

इससे पहले आर्थिक सुधारों को और गति देने पर जोर देते हुये वर्ष 2016-17 की आर्थिक समीक्षा में चालू वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक वृद्धि दर के कमजोर पड़कर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, अगले वित्त वर्ष के दौरान इसके सुधर कर 6.75 से 7.5 प्रतिशत के दायरे में पहुंच जाने की उम्मीद व्यक्त की गई है। वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा संसद में पेश वर्ष 2016-17 की आर्थिक समीक्षा में और सुधारों पर जोर दिया गया है।

पिछले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रही थी जबकि केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने चालू वित्त वर्ष के दौरान जीडीपी वृद्धि के 7.1 प्रतिशत रहने का अग्रिम अनुमान लगाया है। आर्थिक समीक्षा में देश की आर्थिक प्रगति के रास्ते में आड़े आने वाली चुनौतियों के बारे में बताया गया है। इनमें संपत्ति के अधिकार तथा निजी क्षेत्र के बारे में दुविधा की स्थिति और खास कर आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति तथा आय के पुनर्वितरण में के मालों में सरकार की कमियां शामिल हैं।

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