ताज़ा खबर
 

18 फरवरी 1869 में पहली बार पेश हुआ था बजट, जानिए बजट के इतिहास से जुड़ी कई इंट्रस्टिंग बातें

ब्रिटिश भारत का पहला बजट 18 फरवरी 1869 में पेश किया गया था, सी. डी. देशमुख पहले आरबीआई गवर्नर थे जिन्होंने बजट पेश किया था। बजट के इतिहास से जुड़ी ऐसी ही कई इंट्रस्टिंग बातें जानने के लिए पढ़ें।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतिकात्मक तौर पर। (Source: dreamtimes)

भारत के आम बजट का एक लंबा इतिहास है। बजट पहली बार कब लाया गया ? किसने उसे बनाया और कैसे बनाया ?, ऐसी ही बहुत सारी इंट्रस्टिंग बातें हैं जिनके बारे में जानकर आपको हैरानी होगी। आइए जानते हैं उनके बारे में।

ब्रिटिश-भारत का पहला बजट और जेम्स विल्सन
आजादी से पहले भारत में पहली बार बजट 18 फरवरी 1869 को पेश किया गया था। इसे जेम्स विल्सन ने पेश किया था। जेम्स, भारतीय काउंसिल (आजादी से पहले) के वित्त सदस्य थे जिनका काम वायसराय को आर्थिक मामलों पर सलाह देना था। जेम्स अर्थशास्त्र की पढ़ाई से पहले अपने परिवार का कारोबार में हाथ बटाते थे। जेम्स का परिवार हैट (टोपी) बनाने और बेचने के कारोबार में था।

आजाद भारत का पहला बजट
देश को स्वतंत्रता मिलने के बाद जॉन मथाई भारत के दूसरे वित्तमंत्री बने। उन्होंने वित्त वर्ष 1949-1950 का बजट पेश किया था। आज जहां वित्त मंत्री संसद में बजट पेश करते हुए पूरा भाषण पढ़ते हैं, जो लगभग 2 घंटे का हो जाता है, वहीं मथाई ने पूरा बजट नहीं पढ़ा था। उन्होंने बजट के कुछ खास बिंदुओं को सदन में पढ़ा था। साथ ही इस बजट की खूबी यह थी कि इसमें पहली बार योजना आयोग और पंचवर्षीय योजना का भी जिक्र किया गया था।

सी. डी. देशमुख- एकमात्र आरबीआई गवर्नर जिन्होंने बजट पेश किया
सीडी देशमुख अकेले ऐसे शख्स थे जिन्होंने रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर के पद पर रहते हुए वित्त वर्ष 1951-1952 का अंतरिम बजट पेश किया था। उस समय सरकार को पैसों की जरूरत थी जिसके लिए टैक्स में बढ़ोतरी करने की भी जरूरत थी। इस काम के लिए देशमुख ने जनता से एक अलग ही अंदाज में अपील की थी। इसके लिए देशमुख ने एक पत्र का जिक्र किया, जिसका उन्होंने किसी देहात इलाके से मिलने का दावा किया। पत्र में उन्होंने किसी शख्स का जिक्र किया जिसके गांव में कोई टैक्स नहीं देता था, लेकिन उसने टैक्स के रूप में सालाना 5 रुपये का भुगतान कर, देश के विकास में योगदान करने का वादा किया था। यह उदाहरण देशमुख ने लोगों को टैक्स भरने के लिए उत्साहित करने के लिए दिया था।

पहली बार विदेशी संबंधों का जिक्र
आम तौर पर किसी भी बजट में विदेशी संबंधों पर चर्चा या जिक्र नहीं किया जाता लेकिन कुछ शुरुआती बजट, विदेशी संबंधों पर भी प्रकाश डालते थे। दरअसल जब भारत को आजादी मिली तो यूके, यूएस, यूएसएसआर (अब रूस) जैसे दोशों से भारत के विकास के लिए आर्थिक सहायता भी मिली थी। इसी के चलते 1950 के बजट में देश के रूस के साथ संबंधों पर भी जानकारी शामिल की गई थी। इसमें विदेशी फंड्स का जिक्र था जो उस समय राजस्व का मुख्य स्त्रोत था। ये सिलसिला लगभग 1959 तक जारी रहा।

देखें वीडियो

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App