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बजट 2017: इन बातों का ध्‍यान रख कम टैक्‍स से पब्लिक को खुश कर अरुण जेटली जुटा सकते हैं पैसा

एक्सपर्ट्स का मानना है कि केंद्र सरकार बिना टैक्स बढ़ाए भी रेवेन्यू जेनरेट कर सकती है। जानिए कैसे।

भारत में सिर्फ 3 फीसद लोग ही टैक्स भरते हैं जिससे सरकार के राजकोष को काफी नुकसान पहुंचता है। साथ ही आगामी बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा और अनुमान लगाए जा रहे हैं कि सरकार टैक्स स्लैब बढ़ा सकती है। वहीं एक्सपर्ट्स का मानना है कि केंद्र सरकार बिना टैक्स बढ़ाए भी रेवन्यू जेनरेट कर सकती है। आइए जानते है कैसे।

टैक्स में छूट की कमियों को दूर करें- शेयर्स, बोनस स्ट्रिपिंग, कैपिटल गेन्स, म्यूचुअल फंड्स जैसी कई अन्य जगहों/मार्केट में निवेश कर कई तरह के टैक्स छूट मिलती है। ऐसे में छूट को लिमिट में कर टैक्स के जरिए पैसा लाया जा सकता है। इसके अलावा कैश से लेनदेन पर टैक्स लगाया जाना चाहिए जिससे बैंकिंग/डिजिटल लेनदेन में इजाफा हो सके।

मजबूत कानून- एक्सपर्ट्स का मानना है कि कई लोग टैक्स इसलिए भी नहीं भरते क्योंकि टैक्स वसूलने वाले कानूनों की कमियां निकाल कर वह टैक्स बचा लेते हैं। ऐसे में टैक्स से जुड़े कानूनों को बेहतर बनाकर ही टैक्स की वसूली को बढ़ाया जा सकता है। कड़े कानून बनाकर और उनका पालन नहीं करने की स्थिति में टैक्स जेनरेट किया जा सकता है।

टैक्स अनुपालन- 2013 के आंकड़ों के मुताबिक लगभग 39 लाख लोगों ने गाड़ियां खरीदी थी और सिर्फ 4 लोगों ने जिनकी आय 5 लाख रुपये से ज्यादा की थी उन्होंने ही टैक्स दिया। वहीं टैक्स का बोझ नौकरी पेशा लोगों पर ज्यादा पड़ता है और कई कारोबारी टैक्स भरने से बच निकलने के लिए कई तरह के तरीके अपनाते हैं। ऐसी स्थिति में एक्सपर्ट्स का मानना है कि टैक्स चुराने वालों की पकड़ करने के लिए सही तरीके अपनाए जाने चाहिए और एचएनआई पर इस्टेट ड्यूटी और वेल्थ टैक्स लगाया जाना चाहिए। AOPs, LLPs, ट्रस्ट और HUFs को युक्तिकरण कर बेहतर टैक्स अनुपालन किया जा सकता है। इसके अलावा टैक्स रिटर्न फाइलिंग को भी आसान बनाया जाना चाहिए।

अघोषित आय/संपत्ति/कालाधन- सरकार ने हाल ही में बेनामी ऐक्ट,1988 में जरूरी बदलाव किए हैं जिनका सही से क्रियान्वयन किया जाए तो अच्छी मात्रा में टैक्स जेनरेट किया जा सकता है। कालेधन का इस्तेमाल रियल एस्टेट सेक्टर में बड़े पैमाने पर होता है ऐसे में उस आयकर विभाग द्वारा बड़ी चोट की जानी चाहिए।

पारदर्शिता- सरकार द्वारा सैलरी, पेंशन, ब्याज, रियायत, डायरेक्ट ट्रांस्फर सब्सिडी, सब्सिडी जैसी कई चीजें देती है। वहीं कई लोग फर्जी बिल्स देकर भी इन्हें हासिल करने में कामयाब हो जाता हैं। ऐसे में पैसे को गलत हाथों में जाने से रोकने के लिए भुगतान का प्रॉसेस ऑनलाइन किए जाने से पारदर्शिता लाई जा सकती है जिससे रोजकोषीय नुकसान को कम किया जा सकता है।

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