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यूनियन बजट 2017: दिल्ली सरकार ने जताई बजट से निराशा, सिसोदिया ने कहा- हमें एक रुपया भी नहीं मिला

दिल्ली सरकार ने नगर निगमों के लिए भी केंद्रीय बजट में किसी तरह के आबंटन नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया है।

Author January 3, 2018 4:18 PM
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया। (फाइल फोटो)

मोदी सरकार के आम बजट पर दिल्ली सरकार ने घोर नाराजगी जताई है। दिल्ली सरकार ने आरोप लगाया है कि 2017-18 के केंद्रीय बजट में दिल्ली के लिए एक रुपए का भी इजाफा नहीं किया गया है। राज्य सरकार का कहना है कि पिछले 17 सालों से केंद्रीय करों में दिल्ली की साझेदारी 325 करोड़ रुपए पर ही ठहरी हुई है, जबकि राजधानी के अपने बजट का आकार पांच गुना हो गया है। दिल्ली सरकार ने स्थानीय निकायों के लिए केंद्र द्वारा धन आबंटन नहीं किए जाने की भी आलोचना की है।  संसद में वित्त मंत्री अरुण जेटली के बजट पेश करने के तुरंत बाद उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा कि दिल्ली को केंद्रीय करों में साझेदारी में इजाफे से इस साल भी वंचित रखा गया। दिल्ली सरकार की तरफ से विस्तृत प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया, ‘दिल्ली सरकार के विभिन्न विकास कार्यों को वित्त प्रदान करने के लिए केंद्रीय करों में वैधानिक योग्यता बनती है। इसके लिए हमने केंद्र से कई बार आग्रह किया है कि केंद्रीय करों में हमारी साझेदारी बढ़ाकर 5000 करोड़ रुपए किया जाए। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली का अपना बजट वर्ष 2001-02 में 8739 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2016-17 में 46,600 करोड़ रुपए हो गया है, जबकि इस अवधि में केंद्रीय करों में साझेदारी 325 करोड़ रुपए पर अटकी हुई है।

दिल्ली सरकार ने नगर निगमों के लिए भी केंद्रीय बजट में किसी तरह के आबंटन नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया है। सरकार का कहना है कि उसके स्थानीय निकायों के लिए 4087 करोड़ रुपए की राशि का आग्रह किया था, जो कि 14वें केंद्रीय वित्त आयोग की अनुशंसाओं के अनुरूप था, लेकिन केंद्र की तरफ से कोई सहायता नहीं दी जा रही है, जबकि दिल्ली सरकार ने अपने वार्षिक कर संग्रह से 10.5 फीसद राशि स्थानीय निकायों को दे रही है। दिल्ली सरकार ने मोदी सरकार के बजट में राजधानी के लिए केंद्रीय सहायता में किसी तरह का इजाफा नहीं किए जाने पर निराशा जताई है। राज्य सरकार ने कहा है कि 2017-18 के लिए प्रस्तावित केंद्रीय सहायता 412.99 करोड़ रुपए है जो कि वर्ष 2016-17 के स्तर पर ही है। दिल्ली सरकार ने केंद्रीय सहायता को बढ़ाकर 1500 करोड़ रुपए करने का आग्रह किया था। राज्य सरकार ने 1984 सिक्ख दंगों के मुआवजे पुनर्भुगतान और आपदा प्रबंधन फंड के लिए आबंटित राशि पर भी निराशा जताई है। सरकार ने कहा है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को 758 करोड़ रुपए आबंटित किया है जो वर्तमान बजट के बराबर ही है।

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने 4 जनवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ बजट परामर्श बैठक में मांग रखी थी कि नोटबंदी के कारण राज्यों को होने वाले राजस्व नुकसान की केंद्र भरपाई करे। इसके साथ केंद्रीय करों में साझेदारी की पुरानी मांग भी जेटली के समक्ष रखी गई थी। सिसोदिया ने एसी बस सेवाओं पर लगने वाले 15 फीसद सेवा कर को वापस लेने का सुझाव भी रखा था ताकि दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने में मदद मिले। दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्विट किया, ‘जैसे कोई फूल बेचता हो भूखी गरीब बस्ती में’। कपिल मिश्रा ने एक और ट्विट कर मोदी सरकार के बजट को देश कीजरूरतों से कटा हुआ बताया।

चुप रहे केजरीवाल

पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार में व्यस्त मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया के लिए समय नहीं निकाल पाए, क्योंकि माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर सक्रिय रहने के बावजूद बजट पर उनकी तरफ से कोई टिपण्णी नहीं आई। हालांकि, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्रीय बजट पर ट्वीट कर प्रतिक्रिया दी और इसके बाद दिल्ली सरकार की तरफ से औपचारिक प्रतिक्रिया जारी की गई। उन्होंने केवल मनीष सिसोदिया की टिप्पणियों को रीट्वीट किया। हालांकि, वे ट्वीट के जरिए चुनाव आयोग से सुखबीर बादल की गिरफ्तारी की गुहार लगाते जरूर नजर आए।

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