डा. दीप्ति तनेजा, दिल्ली विश्वविद्यालय
जब कोई राज्य राष्ट्र की सीमाओं से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय निवेश, तकनीक और नवाचार को केंद्र में रखते हुए अपनी वैश्विक पहचान की स्थापना के प्रति गंभीर होता है तो इसके लक्ष्य दूरगामी होते हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सिंगापुर और जापान का दौरा केवल औपचारिक विदेश यात्रा ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के बढ़ते आत्मविश्वास का प्रतीक है।
इन दौरों में उत्तर प्रदेश को आर्थिक आत्मनिर्भरता, सामाजिक समृद्धि और वैश्विक प्रतिष्ठा की दिशा में आगे ले जाने का संकल्प परिलक्षित होता है। योगी का संदेश स्पष्ट है कि यूपी अब अवसरों की प्रतीक्षा नहीं करेगा, बल्कि खुद के लिए अवसरों का निर्माण करेगा। सिंगापुर और जापान में ऐसे ही अवसर सृजित किए गए हैं।
सिंगापुर और जापान में उत्तर प्रदेश को मिले लाखों करोड़ रुपये निवेश प्रस्ताव इसकी संभावना को पुष्ट करते हैं। सिंगापुर और जापान जैसे विकसित, तकनीक-संपन्न और निवेश-उन्मुख देशों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में हुए एमओयू वह धरातल लाते हैं, जिनमें अवसरों का बहुआयामी निर्माण है। इसके मूल में शासन की वह कार्यसंस्कृति है, जिसमें निवेशकों को सुरक्षा का भरोसा मिला है, स्थिरता की दीर्घकालिक योजना को आधार दिया गया है और समयबद्ध परिणाम सुनिश्चित किए गए हैं।
उत्तर प्रदेश ने अपने लिए ‘वन ट्रिलियन डालर इकॉनमी’ का बड़ा लक्ष्य निर्धारित कर रखा है। जाहिर है कि इस लक्ष्य को पाने के लिए दायरों का विस्तार करना होगा। इतना बड़ा लक्ष्य सिर्फ आंतरिक संसाधनों से नहीं हासिल किया जा सकता, इसके लिए वैश्विक साझेदारियों की ओर बढ़ना होगा। इस लक्ष्य को हासिल करना सिर्फ आर्थिक उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि यह पूरे प्रदेश के उस मानसिक परिवर्तन की भी जीत होगी, जिसने भारत के विकास में उत्तर प्रदेश को निर्णायक केंद्र बना दिया है। इसे संभावनाओं के प्रदेश से आगे जाते हुए प्रदर्शन की भूमि के रूप में देखा जाने लगा है।
सिंगापुर की एयरपोर्ट ग्राउंड हैंडलिंग क्षेत्र की अग्रणी कंपनी सैट्स के सीईओ (एशिया-पैसिफिक) बॉब ची ने भी कहा कि यूपी की प्रगति का आधार उसका तेजी से विस्तार करता कृषि, औद्योगिक और सेवा क्षेत्र है। हमने देखा है कि उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली अत्यंत प्रगतिशील है। यह समाधान-उन्मुख है और प्रो-एक्टिव दृष्टिकोण अपनाती है। यह सिर्फ एक कथन नहीं है, उत्तर प्रदेश के प्रति विश्व में बदल रही धारणा का प्रतिनिधि वाक्य है।
योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश से गए प्रतिनिधि मंडल को सिंगापुर की कई कंपनियों से एक लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। जापान में भी कई बड़ी कंपनियां उत्तर प्रदेश में काम करने के लिए उत्साहित नजर आईं और एमओयू किए। एमओयू को सिर्फ औपचारिक दस्तावेज नहीं कहा जा सकता, वे भविष्य की संभावनाओं के अनुबंध होते हैं और जिनका प्रत्यक्ष आर्थिक प्रभाव दिखाई देता है।
सिंगापुर की पहचान विश्व में उच्च स्तरीय वित्तीय सेवाओं, शहरी नियोजन, डाटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स और ग्रीन टेक्नालाजी में है। उत्तर प्रदेश पहले से ही डाटा सेंटर नीति से निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। सिंगापुर की कंपनियों के साथ हुए एमओयू यूपी को एशिया के डिजिटल हब की ओर ले जा सकते हैं। आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को गति मिलने से रोजगार भी सृजित होंगे। ग्रीन एनर्जी, सोलर और क्लीन टेक्नोलॉजी में सहयोग उत्तर प्रदेश को पर्यावरणीय रूप से उत्तरदायी औद्योगिक मॉडल की ओर ले जाएगा। सिंगापुर का शहरी विकास विश्व में आदर्श माना जाता है।
यूपी ने जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक डेडिकेटेड ‘सिंगापुर सिटी’ विकसित करने की योजना प्रस्तुत करके सिंगापुर के लिए आकर्षण बढ़ाया है। किसी भी अर्थव्यवस्था को छलांग लगाने के लिए जरूरी है कि उसे पूंजी, तकनीक और वैश्विक प्रबंधन तीनों का लाभ मिले। सिंगापुर दौरे ने ऐसी संभावनाओं को आधार दिया है।
जापान पहले से ही भारत का विश्वसनीय साझीदार रहा है। मुख्यमंत्री योगी के दौरे ने संबंधों की इस कड़ी को यूपी के लिए विकास मूलक बनाया है। जापान में जो समझौते हुए हैं, वे कृषि यंत्र निर्माण, औद्योगिक मशीनरी निर्माण, जल-पर्यावरण अवसंरचना समाधान, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि क्षेत्रों से जुड़े हैं। जापान की कुबोता कारपोरेशन कृषि और औद्योगिक मशीनरी निर्माण में वैश्विक पहचान रखती है।
इसके साथ हुए एमओयू का लाभ यूपी के कृषि क्षेत्र को हासिल होगा। इसी तरह ऑटोमोटिव कंपोनेंट निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर क्षेत्र को भी जापान से हुए नए एमओयू का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश ने अपने लिए भी बड़े बाजार की भूमिका रख दी है। योगी की महत्वाकांक्षी योजना ओडीओपी राज्य की आर्थिकी में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने दोनों देशों में ओडीओपी की भेंट देकर ‘लोकल टू ग्लोबल’ अवधारणा को भी आगे बढ़ाया है।
योगी की यात्राओं का प्रभाव बहुआयामी है, जिससे युवाओं को उच्च कौशल के रोजगार हासिल होंगे। वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी से प्रदेश की प्रशासनिक कार्य संस्कृति में अंतरराष्ट्रीय मानकों का समावेश होता है।
मुख्यमंत्री जिस आत्मविश्वास से ‘ट्रिपल एस’-सेफ्टी, स्टेबिलिटी और स्पीड-को निवेश की गारंटी बताते हैं, यह दौरे इसकी तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। निवेश के लिए पहली शर्त है विश्वास, और यह विश्वास उत्तर प्रदेश सरकार हासिल कर चुकी है। सिंगापुर और जापान से आ रही निवेश की किरणें यूपी के औद्योगिक, तकनीकी और सामाजिक विकास की नई दिशा हैं। इस दौरे का वास्तविक लाभ यही है कि यूपी ने आत्मनिर्भर, सशक्त और वैश्विक उत्तर प्रदेश बनने के लिए निर्णायक कदम उठाया है।
(यह लेखक के निजी विचार हैं।)
