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हो सकता है नीतीश कुमार और नरेन्द्र मोदी का गठबंधन, इन पांच मुद्दों पर मिलता है दोनों का मन

जेडीयू 18 वर्षों तक एनडीए गठबंधन में शामिल रही है लेकिन साल 2013 में नरेन्द्र मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद नीतीश कुमार ने एनडीए से अपना नाता तोड़ लिया था।

Author Updated: May 8, 2017 8:02 PM
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (दाएं) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (File Photo)

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव पिछले एक महीने से लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी उन पर और उनके मंत्री बेटों पर एक के बाद घोटाले का आरोप लगाते रहे हैं। आज (8 मई को) सुप्रीम कोर्ट ने भी झटका देते हुए कहा है कि चारा घोटाले के हरेक मामले में अब लालू यादव को ट्रायल का सामना करना पड़ेगा। इसके बाद बिहार की सियासत गर्म हो गई है। भाजपा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर डोरे डालने शुरू कर दिए हैं। भाजपा चाहती है कि नीतीश कुमार महागठबंधन तोड़कर भाजपा के साथ गठबंधन सरकार बनाएं। बता दें कि नीतीश कुमार पहले भी भाजपा के साथ करीब आठ साल तक (2005 से 2013 तक) बिहार में गठबंधन सरकार चला चुके हैं। इसके अलावा केंद्र की वाजपेयी सरकार में भी जेडीयू सहयोगी रह चुकी है। जेडीयू 18 वर्षों तक एनडीए गठबंधन में शामिल रही है लेकिन साल 2013 में नरेन्द्र मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद नीतीश कुमार ने एनडीए से अपना नाता तोड़ लिया था। अब जब बिहार में एक बार फिर लालू यादव और उनकी पार्टी पर सरकार सही तरीके से नहीं चलने देने के आरोप लग रहे हैं तब सुशील कुमार मोदी ने कहा कि अगर नीतीश चाहते हैं तो लालू से गठबंधन तोड़ दें। हम साथ देने को तैयार हैं। 243 सदस्यीय बिहार विधान सभा में गठबंधन में लालू की पार्टी राजद के 80, जेडीयू के 71 और कांग्रेस के 27 विधायक हैं।

वैसे रह-रहकर नीतीश कुमार के एनडीए में शामिल होने की खबरें आती रही हैं। नवंबर में जब देश में नोटबंदी लागू हुई और नीतीश कुमार ने उसका समर्थन किया तब कहा जाने लगा कि नीतीश लालू का साथ छोड़कर फिर से भाजपा के साथ जा सकते हैं। ये पांच ऐसे मुद्दे हैं जिनपर पीएम नरेंद्र मोदी (भाजपा) और नीतीश की सोच में समानता है। इसी वजह से उनके करीब आने की संभावना बन सकती है।

नोटबंदी: पीएम नरेंद्र मोदी ने जब पिछले साल 8 नवंबर को रात 8 बजे नोटबंदी लागू की तो पूरे विपक्ष ने उसकी खूब आलोचना की। लोगों को करीब चार महीने तक परेशानियों का सामना करना पड़ा। लोगों की लंबी-लंबी कतारें बैंकों के सामने लगी रहीं। औद्योगिक उत्पादन में गिरावट की आशंका भी गहराने लगी। इसी बीच नीतीश कुमार ने नोटबंदी की तारीफ की और कहा कि इससे कालेधन पर लगाम लगाया जा सकेगा। यह पहला मौका था जब नीतीश कुमार ने एनडीएस अलग होने के बाद पीएम मोदी के काम की तारीफ की थी।

शराबबंदी: नीतीश कुमार ने पिछले साल अप्रैल से राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की। इसके लिए उन्होंने कड़े कानून भी बनाए। लोगों में शराबबंदी को लेकर जागरूकता हो इसके लिए दुनिया की सबसे लंबी मानव श्रृंखला बनवाई गई। जब पीएम मोदी सिखों के दसवें गुरू गुरुगोविंद सिंह की 350वीं जयंती को मौके पर आयोजित प्रकाश पर्व में शामिल होने पटना पहुंचे तो उन्होंने नीतीश कुमार के शराबबंदी अभियान की जमकर तारीफ की। नीतीश ने भी मोदी के कार्यकाल में गुजरात में लागू शराबबंदी की सराहना की।

भ्रष्टाचार: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ हैं। उन्होंने काले धन को खत्म करने के लिए ही नोटबंदी लागू की। इसके बाद कई बड़े संदिग्ध ठिकानों पर आयकर की छापेमारी अभी भी लगातार जारी है। इसके अलावा नोटबंदी के दौरान जमा हुई अकूत संपत्ति की छानबीन भी चल रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त हैं। उन्होंने सबसे पहले भ्रष्ट अफसरों या कर्मचारियों की बेनामी संपत्ति को सरकारी कब्जे में लेने का कानून बनाया है। नीतीश करप्शन के मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करते हैं लेकिन हाल के दिनों में उन्हें एक हद तक मजबूर होना पड़ा है। राजद गठबंधन के साथ सरकार चलाने में इस मुद्दे पर कुछ परेशानी हो रही है।

गवर्नेंस: पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार दोनों ही गवर्नेंस के मामले में सख्त हैं। दोनों ही अपने-अपने शासकीय क्षेत्रों में कानून का राज स्थापित करने के प्रति बचनबद्ध हैं। दोनों की कार्यशैली एक समान है। दोनों ही व्यक्ति अधिकारियों को कामकाज में खुली छूट देते हैं। दोनों ही अपने मातहत मंत्रियों के कामकाज पर न केवल निगरानी रखते हैं बल्कि हर अहम फैसले अपने-अपने कार्यालय के जरिए ही लेते हैं। अधिकांश बड़े पदों पर होनेवाली नियुक्तियों में दोनों नेता पारदर्शी चयन प्रक्रिया का पालन करते हैं। दोनों ही गुड गवर्नेंस के पैरोकार हैं और चाहते हैं कि शासन की नीतियों का फायदा आम आदमी को मिले।

सामाजिक सुधार: सामाजिक सुधार की दृष्टि से दोनों ही नेताओं की सोच एक जैसी है। दोनों नेता सबका साथ, सबका विकास की अवधारणा पर काम करते हैं। पीएम मोदी के तीन साल के कामकाज के दौरान जो भी नीतियां बनीं या योजनाएं लॉन्च हुईं, वो गरीबों को केंद्र में रखकर बनाई गई हैं। उनका मकसद समाज के निचले पायदान पर खड़े लोगों का विकास करना और उन्हें लाभ पहुंचाना है। पीएम मोदी की कार्ययोजना में समाज के दबे-कुचले लोगों को अधिक से अधिक प्रतिनिधित्व देने की है। उज्ज्वला योजना से अधिकांश गरीब महिलाओं को फायदा पहुंचा है। नीतीश कुमार भी अपने सुशासन की योजनाओं में गरीब तबके का ख्याल रखते हैं। उन्होंने अति पिछड़ा वर्ग और महादलित वर्ग का विभाजन कर समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों को मुख्य धारा में लाने का कार्य किया है। इससे दो कदम आगे बढ़ते हुए समाज सुधार की दिशा में जहां नीतीश राज्य में दहेजबंदी और बाल विवाह बंदी लागू करने जा रहे हैं, वहीं पीएम मोदी मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से मुक्ति दिलाने की योजना पर काम कर रहे हैं।

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