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‘पैसे होते तो सारी आवारा गायों को पकड़कर योगी जी के दरवाजे पर छोड़ आती’

योगी आदित्यनाथ सरकार ने जब से यूपी में सख्ती के साथ गोवंश हत्या कानून कड़ाई से लागू किया है तब से नीलगायों, जंगली सूअरों के साथ ही "आवारा बछड़े" किसानों के लिए "विकट समस्या" बनते जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ (फोटो सोर्स- PTI)

पूर्वी उत्तर प्रदेश के मगहर स्थित मध्यकालीन संत कबीर की आधी समाधि आधी मजार से करीब 500 मीटर दूर मोहम्मद असद कहते हैं, “पिछली रात एक ट्रक आया। वो (हिंदू किसान) दुधारू गायों को रखते हैं और बाकियों को अंधेरे में यहाँ छुट्टा छोड़ देते हैं।” सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पूर्व संसदीय क्षेत्र गोरखपुर से सटे नूरुद्दीन चाक गांव के किसान भी आवारा गायों से परेशान हैं। इन किसानों के पास आवारा गायों को लेकर दूसरी ही कहानी है। इसी गाँव की स्मृति देवी कहती हैं, “हमारी फसल बर्बाद हो रही है। 20 सेर (क्विंटल) घट कर पाँच सेर रह गया है।”  पप्पू यादव कहते हैं, “इन गायों को नगर महापालिका शहरों को लाकर गाँवों में छोड़ रही है।”

योगी आदित्यनाथ सरकार ने जब से यूपी में सख्ती के साथ गोवंश हत्या कानून कड़ाई से लागू किया है तब से नीलगायों, जंगली सूअरों के साथ ही “आवारा बछड़े” किसानों के लिए “विकट समस्या” बनते जा रहे हैं। मुसलमानों के लिए गाय, बछड़े और भैंस असुरक्षा की नई वजह बनते जा रहे हैं। असद कहते हैं, “एक गाय ने एक बच्ची को मार दिया लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा। अगर हम अपने घर से पास से इन आवारा पशुओं को खदेड़े तो लोग कहने लगेंगे कि ये लोग तस्करी करते हैं। हमारी पिटाई भी हो सकती है।” असद के अनुसार मिली-जुली आबादी वाली जगहों पर मुसलमान इस मुद्दे पर खुलकर बात भी करने से बचने लगे हैं।

बसपा के जिला महासचिव कुतबुद्दीन अंसारी कहते हैं, “गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर दीजिए और उसे नुकसान पहुंचाने वाले को फांसी पर लटका दीजिए। हम ये मंजूर कर लेंगे। लेकिन इसी के साथ ये सुनिश्चित कीजिए जो लोग गाय पालते हैं वो उसकी सेवा भी करें।” गोरखपुर के एक गांव के रहने वाले रामगुलाम निषाद दूध का कारोबार करते हैं। निषाद कहते हैं, “बाबा (योगी आदित्यनाथ) कहते हैं कि तुम दूध का इस्तेमाल करते हो तो सेवा भी तुम्हीं करो।” वहीं खड़े ध्रुवचंद उनकी बात का विरोध करते हुए कहते हैं, "...लेकिन जब हम खुद ही अपना पेट नहीं पाल पा रहे तो गाय-बछड़ों का कैसे पालें।”

आजमगढ़ के मंगूरगढ़ गांव की कलावती भी आवारा पशुओं की समस्या से परेशान हैं। कलावती कहती हैं, “अगर मेरे पास पैसे होते तो मैं सारी गायों को इकट्ठा करती और योगीजी के दरवाजे पर छोड़ आती।” पड़ोस के गांव सुखीपुर के राम प्रताप सिंह कहते हैं कि वो इन पशुओं से छुटकारा पा सकते हैं लेकिन पुलिस से डरते हैं। राम प्रताप सिंह कहते हैं, “हम अपने खर्चे पर इन गायों-बछड़ों को योगीजी के मंदिर में पहुंचा सकते हैं। लेकिन उन्हें ये सुनिश्चित करना होगा कि पुलिस हमें तंग न करे। हम हिंदू हैं, हम गायों के खिलाफ नहीं हैं।” एक अन्य किसान राजू सिंह कहते हैं, “अपनी फसल बचाने के लिए हमे इन पशुओं पर हमला करना पड़ता है। ये हत्या से बड़ा पाप है।”

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य के अवैध बूचड़खानों और मीट की दुकानों पर कड़ी पाबंदी लग गयी है। एक अनुमान के मुताबिक राज्य में लाइसेंसधारी मीट की दुकानें करीब 10 प्रतिशत ही हैं। कई मीट व्यापारी मानते हैं कि योगी सरकार के आने से पहले गलत तरीके से भी मांस बिक रहा था। कई दुकानदार सफाई का ध्यान नहीं रखते थे। कई पर्यावरण और चिकित्सा मानकों का पालन नहीं करते थे। तथ्यात्मक रूप से योगी सरकार ने उन्हीं मांस/चमड़ा कारोबारियों पर कार्रवाी की है जो गैर-कानूनी थे लेकिन इसके जमीनी असर को नजरअंदाज करना संभव नहीं। मुजफ्फरनगर के खालापुर के गुलजार अहमद बेरोजगार हो चुके हैं। वो पहले एक चमड़ा कारखाने में मुंशी थे। गुलजार कहते हैं, “यहां 90 प्रतिशत लोग बेरोजगार हो चुके हैं। मीट कारोबार के बंद होने से न केवल मीट बल्कि फल, दूध, चाय सभी चीजों की बिक्री पर पड़ा है। ”

योगी आदित्यनाथ के सहयोगी और गोरखपुर मठ के अंदर द्वारिका तिवारी पिछले 46 सालों से मठ से जुड़े हुए हैं। तिवारी कहते हैं, “जैसा अन्न वैसा मन। यहाँ अच्छे मुसलमान भी हैं जो मीट नहीं खाते।” तिवारी गोरक्षकों द्वारा किए जा रहे हमलों का बचाव करते हुए कहते हैं, “अगर आप मीट लेकर जा रहे हैं तो किसे पता कि वो किस चीज का मीट है। अगर आपने बुरका पहन रखा है तो किसी पता उसके अंदर कौन है।” हिन्दू युवा वाहिनी के जनरल सेक्रेटरी पीके मल्ल योगी सरकार की गोरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को समझाते हुए कहते हैं, “‘गोरखनाथ पीठ’  की उपाधी ही गौरक्ष पीठ से आयी है। ये गोरक्षा से संबंधित है। योगी जी गोरक्ष पीठाधीश्वेर हैं। मठ का प्रमुख उनके वर्तमान पद “मुख्यमंत्री से बड़ा” है।”

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