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मुसलमानों के लिए ये आत्मनिरीक्षण का वक्त

मुसलमानों को इतना तुनक मिज़ाज नहीं होना चाहिए और इतनी सी बात पर अपना आपा नहीं खो देना चाहिए। कार्टून ईसा मसीह के भी बनाए गए हैं जो उन्हें समलैंगिक दर्शाते हैं,

Markandey Katju, India-Pakistan, Ido-Pak

मुंबई, भोपाल, अलीगढ़, हैदराबाद, श्रीनगर और अन्य भारतीय शहरों में मुसलामानों द्वारा फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रोन के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे इन मूर्खों को एहसास नहीं है कि वे उन लोगों के झांसे में आ रहे हैं जो सभी मुसलमानों को कट्टरपंथी और आतंकवादी के रूप में चित्रित करना चाहते हैं, जो हिंदू कट्टरपंथियों द्वारा निर्दोष मुसलमानों पर हमले को और बढ़ाएंगे। इनमें से किसी भी प्रदर्शन में उन कट्टर लोगों की कोई निंदा नहीं हुई, जिन्होंने पेरिस में सैमुअल पैटी और नीस में एक चर्च में तीन व्यक्तियों का बेरहमी से सिर कलम कर दिया । सारा आक्षेप और निंदा पैगंबर के ‘शान’ (सम्मान) के अपमान के खिलाफ था।

मुसलमानों को इतना तुनक मिज़ाज नहीं होना चाहिए और इतनी सी बात पर अपना आपा नहीं खो देना चाहिए। कार्टून ईसा मसीह के भी बनाए गए हैं जो उन्हें समलैंगिक दर्शाते हैं, अधिकांश हिंदुओं द्वारा पूजित भगवान राम का अक्सर कुछ तमिल नेताओं द्वारा उपहास किया जाता है और सीता और शंभूक के साथ हुए बर्ताव की आलोचना की जाती है, लेकिन इसके लिए किसी का सर कलम नहीं किया गया। मुसलमानों को कई बातों को नज़र अंदाज करना सीखना चाहिए, जो वे अपमान जनक मानते हैं, बजाय इसके कि उस बात का बतंगड़ बनाएं और हंगामा करें।

यदि वे पैगंबर मोहम्मद के कार्टून पसंद नहीं करते हैं, तो उन्हें बनाने या उन्हें देखने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन वे ऐसा करने वाले दूसरों पर आपत्ति कैसे कर सकते हैं, विशेष रूप से फ्रांस जैसे उदार देश में जहां फ्रांसीसी कानून के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है?

पाकिस्तान में मैक्रॉन के खिलाफ कई प्रदर्शन हुए हैं, लेकिन आम जनता को भयानक स्थिति में डालने वाली चीज़ों के खिलाफ जैसे कि खाद्य पदार्थों और दवाओं की आसमान छूती कीमतों या बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ, एक भी प्रदर्शन नहीं हुआ। तुर्की और पाकिस्तान दोनों ही आर्थिक मंदी की चपेट में हैं, उनके नेताओं के पास इस समस्या का कोई हल नहीं है कि ऐसे संकट से कैसे उभरा जाए। तभी एर्दोगन और इमरान खान, लोगों के सामने आने वाली इन वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए, हागिया सोफिया को मस्जिद में परिवर्तित करने, या ओआईसी (Organisation of Islamic Countries) को पत्र लिखने जैसे हथकंडों का सहारा ले रहे हैं।

मुझे आश्चर्य नहीं होगा कि मुस्लिम मौलवी, जो भ्रामक मुस्लिम जनता को इस तरह के प्रदर्शनों को आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, गुप्त रूप से कुछ पैसे, या कुछ नापाक निहित स्वार्थों द्वारा अन्य लाभ, पा रहे हैं। दुनिया में भड़काऊ एजेंट का उपयोग कोई नई बात नहीं है। जिस तरह भोले भाले बच्चे हैम्लिन की पाइप ( Pied Piper of Hamelin ) की ध्वनि सुनकर उसके पीछे चल दिया करते थे, मुसलमान अक्सर धोखा खा जाता है और उन्हें एक रसातल में ले जाया जाता है जिससे उन्हें बहुत नुकसान होता है। यही समय है जब मुसलमान इस छल कपट और फरेब के पार देखें।

(जस्टिस मार्कंडेय काटजू, पूर्व न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट)

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