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बाखबरः हाहाकार में शांति पाठ

दो मुसलिम औरतें कुछ ‘स्व-नियुक्त गोरक्षक’ औरतों द्वारा पीटी जा रही हैं। पुलिस देखे जा रही है। एक चैनल में पुलिस अफसर बताता है:

Author July 31, 2016 1:35 AM
सुधीश पचौरी

दृश्य में पिटाई
दो मुसलिम औरतें कुछ ‘स्व-नियुक्त गोरक्षक’ औरतों द्वारा पीटी जा रही हैं। पुलिस देखे जा रही है। एक चैनल में पुलिस अफसर बताता है: ‘बीफ’ ले जाने के आरोप में दोनों औरतों को गिरफ्तार कर लिया गया है! कोई चैनल नहीं पूछता कि जो पीट रही थीं उनको क्यों नहीं पकड़ा? अफसर के अनुसार उनके खिलाफ कोई शिकायत दर्ज करे तो कार्रवाई हो। बाद में कार्रवाई की खबर आई, लेकिन यह भी कि आहतों पर रपट वापस लेने का दबाव डाला जा रहा है! व्याख्या: जो गिरफ्तार की गर्इं वे पहले शिकायत करें तब न करें कार्रवाई। और गिरफ्तार कैसे लिखाएं रपट? वे तो खुद आरोपी हैं! पूछने पर हिंदुत्व का प्रवक्ता कहता है: ऐसी घटनाओं के लिए संघ को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। निष्कर्ष: मीट ले जाना सख्त मना है। पीटना बीफ पहरेदादरों का हक है!
राष्ट्रवादी बरक्स छद्म शांतिवादी
एक राष्ट्रवादी एंकर ने अपने पूर्ववक्तव्य में दूसरे चैनल के ‘शांतिवादी’ एंकर का नाम लिए बिना सवाल उछाला कि जो लोग भारत-विरोधी और पाकिस्तान के पक्ष में आवाज उठाते हैं उनके साथ कैसा बर्ताव किया जाय? एंकर द्वारा ‘छद्म शांतिवादी’ कहे जाने के प्रत्यारोप में एक चर्चाकार ने एंकर को ‘छद्म राष्ट्रवादी’ कहा। जवाब में एक पूर्व जनरल गरजे कि इनकी ये हिम्मत? यह ‘मीडिया युद्ध’ है। जनरलजी को इतना गुस्सा आया कि कसमसा कर रह गए। गनीमत कि बंदूक से ‘फैर’ नहीं किया!
ऐसे पत्रकारों के प्रति सूचना प्रसारण मंत्रीजी क्रोध में कहते दिखे कि अफसोस कि ऐसे पत्रकार भी हैं, जो कश्मीर में हमारी फौज के खिलाफ बोल कर उनका ‘मोरेल’ डाउन करते हैं। यह ठीक नहीं! एक अन्य मंत्री ने राष्ट्रवादी चैनल के राष्ट्रवादी हौसले की तारीफ की। चैनल ने उसे भी दिखाया! टाइम्स नाउ ने सूचना प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू की मार्फत एक के बाद एक तीन लाइनें चिपकार्इं: ‘फौजों को अवमानित नहीं किया जा सकता!’ ‘मीडिया के एक हिस्से की भूमिका पर सवाल उठाया!’ ‘आतंकवाद से हमदर्दी रखते हैं!’ इसके बाद सर्वत्र ‘ओम शांति: शांति: शांति:’ जैसा सुनाई दिया!
मायावती फार्म में
मायावती फार्म में हैं। गुजरात के उना में ‘स्वनियुक्त गोरक्षकों’ द्वारा सरेआम दलितों के उत्पीड़न की कथा को मध्यप्रदेश के मंदसौर की ‘बीफ पिटाई’ से जोड़ कर उन्होंने पीएम से पूछा कि क्या यही है सरकार का ‘महिला उत्थान’? सरकार के मंत्री ने कहा कि ऐसी घटना का भाजपा से कोई संबंध नहीं है। दर्शक सोचते रह गए कि इतने स्वयंभू गोरक्षक कहां से पैदा हो गए?
पहलवान बरक्स पहलवान
अंत में न्यूज एक्स के एंकर ने निराश होकर कहा कि कलह के कारण एक स्वर्ण पदक हाथ से गया! पहलवान नरसिंह यादव के डोप टेस्ट में पॉजीटिव होने की खबर राष्टÑीय खबर बनी रही। हर चैनल को लगता रहा कि यादव के जाने में उसके स्पर्धियों ने विघ्न डाला है। टाइम्स नाउ का एंकर सुशील पहलवान के पक्षधर सतपाल से बार-बार पूछता रहा कि क्या आपने पता किया कि यादव के खाने में किसने वर्जित पदार्थ की मिलावट की। सतपाल कहता रहा कि ये ट्रेनिंग कैंप वालों से पूछो। हमें क्या मालूम, हम तो कैंप में नहीं थे न! एंकर फिर भी पूछता रहा कि आपने पता क्यों नहीं लगाया! हम पूछते हैं कि इस एंकर ने दूसरे चैनल की तरह की ‘खोजी पत्रकारिता’ क्यों नहीं की, जिसने स्टिंग कर रसोइए को कहते दिखाया कि किसी बाहरी ने छिप कर खाने में कुछ मिलाया है!
मदारी की डुगडुगी
फिल्म रिलीज के पहले विवाद पैदा कर बेचने के कितने तरीके हो सकते हैं? इमरान का कुर्बानी संबंधी बयान उनकी फिल्म मदारी के लिए डुगडगी बजाता दिखा। ईद के आसपास दिए गए इस बयान की खबर आई गई हो गई थी, लेकिन पश्चात-विचार के मारे दो चैनलों को लगा कि कुर्बानी की इमासनी अवधारणा पर एक चर्चा तो बनती ही है और सेलीब्रिटी की जय कि सात दिन बाद भी दर्शकों को झेलाई जा सकती है! इस प्रकार पहले टाइम्स नाउ ने और बाद में इंडिया टुडे ने चर्चाएं करा डालीं। चर्चाओं में इरफान अपने ‘अनुभूत’ इस्लाम की बात कहते रहे, मौलवी उनको इस्लाम की ‘मूल व्यवस्थाएं’ समझाते रहे। ऐसे विषयों में एंकरों की तो कोई गति नहीं थी कि वे कायदे से बहस चलवा पाते। बस बातचीत कराते रहे। चर्चा में एक ने इकबाल का शेर याद किया, लेकिन किसी को कबीर का वह दोहा याद न आया, जिसमें कबीर ने ‘बकरी पाती खात है’ के जरिए ‘कुर्बानी’ की कैसी आलोचना की है? लेकिन एंकर कबीर को क्यों जानें? जब पलक झपकते उग्र राष्ट्रवादी तेवर अपना कर टीआरपी बढ़ाई जा सकती है, तो जरूरत से ज्यादा क्यों जाना जाए?
‘सुल्तान’ का संकट
जब राजस्थान उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में सलमान को निचली अदालत की दी सजा से बरी कर दिया, तो हर चैनल सलमान की वल्ले वल्ले कर रहा था और अब जब सलमान के ड्राइवर ने प्रकट होकर कह दिया कि ‘उसने सलमान को चिंकारा मारने के बाद उसकी गर्दन चाकू से काटते देखा था’ कि चैनल कहने लगे कि अब सलमान की प्राबलम बढ़ी! वल्ले वल्ले गाने वाले चैनल क्या फैसले से पहले इस ड्राइवर का पता नहीं लगा सकते थे? उसने कहा कि उसके पिता को धमकी दी गई थी। क्या केस फिर से खुलेगा?
‘आप’ की आफत
‘आप’ सांसद भगवंत मान ने ‘सेल्फ गोल’ किया। संसद के गलियारों के वीडियो सोशल मीडिया पर डाल कर ‘आ बैल मुझे मार’ कहावत चरितार्थ की। पत्रकारों ने चेताया कि इससे संसद को खतरा बढ़ता है, तो बड़ी दिलेरी से बोले कि मैं फिर सोशल मीडिया में दिखाऊंगा। जब संसद सदस्यों ने इस पर आपत्ति कर जांच की मांग की और जांच समिति बन गई तो कहने लगे कि वे निर्दाेष हैं, अनजाने में कर गए हैं। ऐसे कैशोर्य की क्या जरूरत थी भई? ‘आप’ के बुरे दिन चल रहे हैं। एक के बाद एक तीन-चार विधायकों पर एफआइआर हुई हैं। तिलमिला कर केजरीवाल ने कहा कि हमें मरवाया भी जा सकता है।

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