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बाखबरः तीन दिन जला इतिहास

एक दंगा पूर्वी दिल्ली में, तो दस दंगे चैनलों में! एक चैनल कहता है कि हमारे एक रिपोर्टर के तीन दांत टूटे हैं, दो और घायल हुए हंै। दूसरा बताता है कि हमारे वाले ने तो भीड़ से जैसे तैसे जान बचाई है... पत्रकार निशाना बनाए जा रहे हैं...

दिल्ली के हिंसाग्रस्त इलाकों में अभी भी तनाव बना हुआ है। (PTI Photo/Manvender Vashist)

तीन दिन महामहिम! तीन दिन दंगे! कैसा विरोधाभास!
तीन दिन महायात्रा! तीन दिन महास्वागत! तीन दिन महाजश्न! तीन दिन महा समझौते! और उसके बाद चिड़िया फुर्र!
तीन दिन जली दिल्ली! तीन दिन जला देश! तीन दिन तीन दिन! कहीं आग लगती रही, कहीं गोली चलती रही! तीन दिन!
तीन दिन जगे भाग्य कि बाईस किलोमीटर के ‘रोड शो’ को इन्हीं आंखों से प्रत्यक्ष देखा। सड़क के दोनों ओर की गरीबी छिपाने की खातिर दीवार उठा दी गई, ताकि महाहिम का जायका न हो खराब! यह थी गुजरात कृत ‘चीफ की दावत’!
एक शाम मोटेरा! एक लाख लोगों की जय जयकार! उनकी ‘नमस्ते’ और हमारी तालियां! अपना देश धन्य धन्य! फिर एक सुबह दिल्ली में ‘गार्ड आॅफ आनर’! ये ‘गार्ड आॅफ आनर’ क्या होता है? इसके एक-एक ब्योरे को बताते और कयास लगाते हमारे पूर्व कूटनीतिज्ञ कि विश्व में भारत की चुटिया डूबी कि उछली!
वह ‘फर्स्ट वर्ल्ड’ तो हम ‘थर्ड वर्ल्ड’! ‘फर्स्ट वर्ल्ड’ की खुशबू भी काफी!
फिर मुहब्बत के प्रतीक ताजमहल देखने जाना और इस उबाऊ दौरे पर भी चैनलों का बर्बाद होते रहना! फिर कुछ महा समझौते और फिर फुर्र!
और इन्हीं तीन दिन पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर, खजूरी खास, चांदबाग, मुस्तफाबाद का वह वहशत भरा ‘सबाल्टर्न’ चेहरा प्रकट हुआ, जो अपनी घृणा में लहूलुहान रहा!
इन्हीं तीन दिन कीर्तनिए चैनल करते रहे महामहिम जी की महायात्रा का कीर्तन और इन्हीं तीन दिन जलती रही दिल्ली और जलता रहा देश! ज्यादातर समय भूलते रहे घृणा से बजबजाती पूर्वी दिल्ली को और गाते रहे महामहिम की महिमा के गान!
हर समय सत्य के लिए मरने की दुहाई देने वाले खबर चैनल दिल्ली के लिए कतई न मरे!
महामहिम की दिव्य यात्रा के समांतर भाजपा के मिश्रा जी ने सीएए विरोधी धरने वालों को जाफराबाद जाकर कुछ इस आशय की चेतावनी दे डाली कि या तो रास्ता खाली कर दो नहीं तो हम खाली करवा देंगे। हम इसे शाहीनबाग नहीं बनने देंगे!
ऐसे पुण्य प्रलाप ने बहुत जल्द अपना रंग दिखाया! कुछ देर बाद ही इन इलाकों में पागल उन्मादी भीड़ें नजर आने लगीं। चलती लाठियां, चलते डंडे और पत्थर! कपड़ों से ढके चेहरे कि कहीं कोई पहचान न ले! कहीं आग लगी दिखती, कहीं से धुआं उठता दिखता।
बदहवास रिपोर्टर अपने को बचाते हुए हमें कांपती आवाजों से बताते कि हिंसा का तांडव हो रहा है…
और दिल्ली की पुलिस इस कदर लाचार कि कथित मोहम्मद शाहरुख नाम का एक गुंडा कुछ दूर से पिस्तौल से गोली दागता आता है और सामने खड़े सिपाही की कनपटी पर पिस्तौल सटा कर निकल जाता है और पुलिस उसे गिरफ्तार तक नहीं करती!
देर तक चैनलों पर एक ही सवाल गंूजता रहता है कि पुलिस क्या कर रही है? और जवाब वही घिसा-पिटा कि हम स्थिति पर नजर रखे हैं..!
घृणा का बाजार गरम कि पुलिस की एक टुकड़ी को बंधक बना लिया गया है और पुलिस उसे निकालने जा रही है, कि दंगाई ट्रंप के दौरे को अपने लिए एक अवसर बना रहे हैं कि भारत को बदनाम करने की साजिश हो रही है..!
शनिवार की शाम तक एंकर और चर्चक अपने-अपने मचानों पर अपनी-अपनी बंदूकें तान कर एक-दूसरे पर गोली दागे जा रहे हैं कि ये प्रदर्शनकारी हैं कि हत्यारे हैं, बहत्तर दिन तक सहा! अब हटाओ शहीन बाग को! फिर दहाड़ता है कि कहां है उदार धड़ा? कहां हैं वे ‘सेलीब्रिटीज’? कहां हैं इस दल के नेता, उस दल के नेता?
ब्रेकिंग : रात के नौ बजे हैं और अब तक तेरह मर चुके हैं।
एक दंगा पूर्वी दिल्ली में, तो दस दंगे चैनलों में! एक चैनल कहता है कि हमारे एक रिपोर्टर के तीन दांत टूटे हैं, दो और घायल हुए हंै। दूसरा बताता है कि हमारे वाले ने तो भीड़ से जैसे तैसे जान बचाई है… पत्रकार निशाना बनाए जा रहे हैं… सोनिया की गृहमंत्री से इस्तीफे की मांग! एक पूछता है कि जब दिल्ली जल रही थी, गृहमंत्री कहां थे?
दंगों के पहले दिन एक चैनल खबर ‘बे्रक’ करता है कि पुलिस अफसर अमित घायल हुए और उनको बचाने आए कांस्टेबल रतनलाल को गोली मारी गई। हाय-हाय! फिर एक खबर आती है कि आइबी अफसर अंकित शर्मा का शव नाले में मिला है। मरने वालों की संख्या तैंतालीस हुई!
अगले रोज जब देखते ही गोली मारने का आदेश होता है, तब स्थिति काबू में आती है! नए पुलिस अधिकारियों के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल खजूरी खास, जाफराबाद और चांदबाग के दंगाग्रस्त मुहल्लों में गली-गली दौरा करते हैं, वहां के डरे हुए लोगों से बातचीत कर उनको आश्वासन देते हैं कि आपकी हिफाजत का पूरी मुस्तैदी से खयाल रखा जाएगा… वे नब्बे मिनट तक दो किलोमीटर पैदल चल कर आश्वस्ति का वातावरण बनाते हैं… कांग्रेस राजघाट तक शांति मार्च करती है…!
कि फिर कपिल मिश्रा के ट्विटर से उपलब्ध हुआ एक ‘अप्रमाणित’ वीडियो सब चैनलों पर छा जाता है। यह ‘आप’ के पार्षद ताहिर हुसैन और उनके घर का है। यह हर चैनल पर बार-बार बजाया जाता है, फिर हर चैनल का रिपोर्टर, कैमरामैन ताहिर के मकान के अंदर जा-जाकर सीधा प्रसारण करने लगता है और सारी कहानी ताहिर की इस ‘दंगा फैक्ट्री’ पर आकर रुक जाती है : पांच मंजिला मकान! हर मंजिल पर पत्थरों से भरे थैले, छत पर तेजाब की थैलियां! पेट्रोल से भरी बोतलों की क्रेटें और दूर तक मार करने वाली गुलेल! वहीं अंकित शर्मा के घर वाले कह चुके हैं कि वही शर्मा का हत्यारा है! फरार ताहिर पर एफआइआर की जाती है..!
तीन दिन तीन रात च0मकी दिल्ली! तीन दिन जली दिल्ली! तीन दिन जला इतिहास!

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