Success of Indian Space Research Organisation has open new space in sky for Indian youth - बड़े हैं इसरो के कारनामे, पर इससे ज्‍यादा युवाओं का नहीं जुड़ना है बड़ी चिंता की बात - Jansatta
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बड़े हैं इसरो के कारनामे, पर इससे ज्‍यादा युवाओं का नहीं जुड़ना है बड़ी चिंता की बात

इसरो की प्रतिदिन बढ़ रही अन्तरराष्ट्रीय विश्वसनीयता से युवाओं में एक विश्वास जाग्रत होना चाहिए कि वे एक ऐसे राष्ट्र के नागरिक हैं, जहां अंतरक्षीय सफलताएं भी बेहद मायने रखती हैं।

श्री हरिकोटा में 104 सैटेलाइट्स को लेकर जाते रॉकेट की लॉन्चिंग देखते लोग। (Photo Source: PTI)

डॉ. शुभ्रता मिश्रा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की लगभग प्रतिदिन छू रही ऊँचाइयों से हम भारतीयों को अंतरिक्ष कितना अपना सा लगने लगा है। इस समय पूरा विश्व अंतरिक्ष को अपने अधिकार क्षेत्र में लेने में व्यस्त व प्रतिस्पर्धी बना हुआ है। अमेरिका से लेकर रूस, जापान, जर्मनी, फ्रांस, चीन प्रायः विश्व का हर छोटा-बड़ा देश अपने तरीके और अपने स्तर से अपना अपना आसमान बनाने में लगे हैं। फिर इसरो कैसे पीछे रह सकता है। 15 फरवरी 2017 को एक साथ 104 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण और चार दिन बाद 19 फरवरी को फिर 400 टन के रॉकेट के लिए सबसे बड़े क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण इसरो की प्रवीणता की स्वयं ही अभिपुष्टि करता है। किसी के प्रमाण मांगने या उपलब्धि की अस्वीकारोक्ति से उसकी प्रामाणिकता पर कोई असर नहीं पड़ता। सही सफलताओं को किसी भी तरह की निम्नता धूमिल नहीं कर सकती। समाचारों में जहां हर रोज राजनीति का गिरता स्तर, सड़कों पर निरंतर मर रही मानवता, युवाओं का भड़काऊ आक्रोश, वैश्विक बनता जा रहा आतंकवाद, धर्मगत प्रतिबंधों के लिए मजबूर होते राष्ट्र और पड़ोसियों की उपलब्धियों से जन्मजात चिढ़ व पूर्वाग्रहों के वशीभूत जलन की अग्नि में जल रहे पड़ोसी देश, ये समस्त बातें नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करती हैं, जो निश्चित रुप से लोगों पर प्रतिकूल मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालती हैं। पिछले कुछ दशकों से समाचारों में सकारात्मक सोच का बहुत ह्रास हुआ है, क्योंकि ऐसी खबरों से सहानुभूति के साथ-साथ सामाजिक आक्रामकता कहीं न कहीं मीडिया को लोकप्रिय बनाती है और लोग भी स्वयं को तात्कालिक रूप से मनोरंजित कर लेते हैं। लेकिन ऐसी लोकप्रियता और मनोरंजन उत्तम सामाजिक व राष्ट्रीय स्वास्थ्य के परिचायक नहीं कहे जा सकते।

ऐसे माहौल में जब इसरो की वास्तविक उपलब्धियां सामने आती हैं तो निश्चित ही हर भारतीय का राष्ट्रीय मनोबल बढ़ता है। विशुद्ध आभिजात्यता किसे पसंद नहीं हो सकती। इसरो की सफलताएं हममें ऐसे ही किसी राष्ट्रीय आभिजात्य वर्ग के होने की अन्तरराष्ट्रीय गौरव की अनुभूति कराती हैं। इसरो के दोनों प्रमोचन यान पीएसएलवी (ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन यान) और जीएसएलवी (भूस्थिर उपग्रह प्रमोचन यान) जब-जब भी विदेशी उपग्रहों को सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षाओं में बिठा देते हैं, तब हर भारतीय स्वयं को अंतरिक्ष में पाता है। अन्य प्रायः सभी क्षेत्रों में घुस आई दलगत राजनीतियों और भ्रष्टाचार ने उनकी विशुद्धता को बुरी तरह प्रदूषित कर दिया है। अच्छा है अभी इसरो इस सबसे अस्पृश्य बना हुआ है।

इसरो की दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ती उपलब्धियों से भारत की वैज्ञानिक व सैन्य रक्षा संबंधी सुरक्षा को प्रतिभूति तो मिली ही है, साथ ही अपनी कुशलता व प्रवीणता के बल पर इसरो अंतरिक्ष आधारित सर्विलांस और कम्युनिकेशन के तेजी से बढ़ते भूमण्डलीय बाजार में एक अहम कारोबारी के रुप में भी प्रतिष्ठित होता जा रहा है। इससे देश के लिए राजस्व इकठ्ठा करने में भी इसरो की भूमिका बढ़ रही है। चीन के यह कह देने से कि अभी भारत बहुत पीछे है, हम पिछड़े नहीं कहे जा सकते। जो पीछे है, आगे भी तो वही जाएगा। यह अपने आप में बड़ी संतोषजनक बात है कि इसरो अपने विभिन्न प्रक्षेपण यानों जैसे एसएलवी, एएसएलवी, पीएसएलवी और जीएसएलवी के माध्यम से कुल 226 उपग्रह प्रक्षेपित कर चुका है, जिनमें 21 देशों के 180 विदेशी उपग्रहों में गूगल और एयरबस जैसी बड़ी कम्पनियों के उपग्रह भी शामिल हैं।

इसरो की प्रतिदिन बढ़ रही अन्तरराष्ट्रीय विश्वसनीयता से युवाओं में एक विश्वास जाग्रत होना चाहिए कि वे एक ऐसे राष्ट्र के नागरिक हैं, जहां अंतरक्षीय सफलताएं भी बेहद मायने रखती हैं। यह अलग बात है कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली और रोजगार व्यवस्था से एक बिल्कुल नगण्य सँख्या में ही भारतीय युवा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से इसरो से जुड़ पाते हैं। निःसंदेह आवश्यकता इस बात की है कि अंतरिक्ष में बढ़ रही भारतीय प्रवीणता को दृष्टिगत रखते हुए इस क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा भारतीय युवा प्रतिभाओं को अवसर मिलने चाहिए। क्योंकि भारत का हर बच्चा बचपन में गलियों में कागज का रॉकेट जरुर ही उड़ाता है, जो उसके अंदर छिपी अंतरिक्षी प्रतिभा ही है। छिपी प्रतिभाएं उकेरी जाएंगी, तो इसरो भी स्पेसएक्स, यूएलए, सीएनईएस, डीएलआर, सीएसजी जैसे अंतरिक्षी महारथियों की समकक्ष कतार में खड़ा होकर भारत का मनोबल ही नहीं बढ़ाएगा, बल्कि हम एक बार फिर आर्यभट्ट की आनुवांशिक संतानें होने का प्रमाण दे पाएंगे।

 

वीडियो देखिए- ISRO सैटेलाइट लॉन्च: भारत के लिए गर्व का क्षण, एक बार में 104 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे

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