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आगरा में नरेंद्र मोदी को समर्पित अमित जायसवाल की कोविड से मौत के मायने

प्रधानमंत्री खुद ट्विटर पर फॉलो करते थे इस 42 साल के कारोबारी को, बीमार हुआ तो बहन ने पीएमओ, नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ को टैग कर मांगी थी मदद, बाद में मा की भी मौत

पीएम नरेंद्र मोदी (फोटो सोर्स- @narendramodi)

कार के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पोस्टर कई साल से लगा था। बीते दिनों सोनू ने उसे नोच कर फेंक दिया। सोनू आगरा के अमित जायसवाल की बहन है। अमित की कुछ दिन पहले कोविड से मौत हो गई थी। वह भाजपा, संघ और खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति असाधारण रूप से समर्पित था। उसने अपने ट्विटर हैंडिल पर लिख रखा था कि उसको प्रधानमंत्री जी फॉलो करते हैं। न्यूज़ पोर्टल द प्रिंट ने कथित ट्विटर हैंडिल का स्क्रीनशॉट प्रकाशित किया है। ट्विटर हैंडिल अब अस्तित्व में नहीं है। उसे डिलीट किया जा चुका है।

अमित की बहन का गुस्सा शायद वही गुस्सा है, जिसे फिल्म अभिनेता अनुपम खेर एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में उचित ठहरा रहे थे। खुद खेर भी इंटरव्यू खत्म होते होते कोविड मैनेजमेंट में सरकार की चूक को स्वीकार करते हुए यहां तक बोल गए थे कि जीवन मे छवि बनाने से ज्यादा और भी बहुत कुछ है। यह वही खेर हैं जिनकी एक हालिया ट्वीट बड़ी मशहूर हुई थी। इसमें उन्होंने कहा था कि कुछ भी कर लो, “आएगा तो मोदी ही।”

मोदी ही नहीं, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को भी हाल में अपने मंत्रियों (और एक केंद्रीय मंत्री) की चिट्ठियों का सामना करना पड़ा। भले ही चिट्ठियों को तूल न देकर उन्हें आम आदमी की नजर से गायब कर दिया गया हो, लेकिन यह तो सब जानते हैं कि साथी जब सवाल उठाते हैं तो उसका मतलब क्या होता है।

उधर, सोशल मीडिया में भी इन दिनों मोदी और योगी के खिलाफ कटुतम बयानों की भरमार चल रही है। यह कोई नई बात नहीं, लेकिन नई बात यह है कि मोदी-योगी के समर्थन वाली पोस्ट और ट्वीट अब पहले जितने नहीं रह गए। समर्थक पहले की तरह पुरज़ोर तरीके से अपनी बात रख भी नहीं रहे।

इस परिप्रेक्ष्य में आगरा के अमित जायसवाल की मौत और उस पर परिवार की प्रतिक्रिया बहुत मानीख़ेज़ हो जाती है। बयालीस साल का अमित कट्टर हिन्दुत्ववादी था। अपने ट्विटर हैंडिल पर उसने जो तस्वीर लगाई है वह उसकी उग्रता को खुल कर बताती है। यह तस्वीर धनुर्धारी राम की है। उन्होंने युद्ध की मुद्रा में धनुष पर बाण चढ़ा रखा रखा है। और बगल में कैप्शन लिखा हैः वी कांकर, वी किल। यानी हम विजय प्राप्त करते हैं, हम वध करते हैं। सबसे नीचे अमित ने एक लाइन की गर्वोक्ति डाल रखी हैः PM Shri@narendramodi ji follow me on Twitter. अमित का यह कथित ट्विटर हैंडिल अब डिलीट किया जा चुका है।

हिन्दुत्व के लिए समर्पित अमित पिछले साल दिसंबर में अयोध्या भी गया था जब मंदिर का काम शुरू हो रहा था। उसने पूरे शहर में अपनी ओर से एलईडी बैनर लगवाए थे, जिन पर जिन पर ‘राम जन्मभूमि’ की इबारत चमक रही थी। आगरा में आरएसएस से जुड़े लोग उसे बहुत मेहनती स्वयंसेवक बताते हैं। पिछले लॉकडाउन में उसने ई-शाखा का आयोजन करके संगठन की बहुत वाहवाही बटोरी थी। अमित झंडे और पोस्टरों का कारोबार करता था।

अमित और उसकी मा राजकमल 19 अप्रैल को कोरोना पॉज़िटिव पाए गए थे। उन्हें आगरा में भर्ती कराने का प्रयास किया गया। नाकाम रहने पर उन्हें मथुरा ले जाकर वहां के नयति अस्पताल में भर्ती कराया गया। 25 अप्रैल इन लोगों की हालत बिगड़ी तो अस्पताल ने रेमडिसिविर का इंतज़ाम करने को कहा गया। तब अमित की बहन सोनू ने भाई के ट्विटर एकाउंट से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के लिए गुहार लगाईः

माइसेल्फ सोनू अलग

मिस्टर अमित जायसवाल्स सिस्टर

दिस इज़ टु इनफॉर्म यू दैट वी आर फेसिंग इश्यूज़ रिगार्डिंग अरेंजमेंट ऑफ रेमडिसिवर एण्ड ट्रीटमेंट। ही इज़ एडमिटेड इन नयति हॉस्पिटल, मथुरा। वी नीड योर हेल्प। ही इज़ नॉट वेल।

इस ट्वीट के साथ @PMOIndia, @narednramodi और @myogiadityanath को टैग किया गया है।

सोनू कहती है कि गुहार लगाने के बाद भी उसे कहीं से मदद न मिली। रेमडिसिविर तो इन लोगों ने किसी तरह हासिल कर ली मगर भाई की जान न बच सकी। एक हफ्ते बाद अमित की मा की भी मौत हो गई।

फ्री प्रेस जरनल ने अमित के बहनोई राजेंद्र से बात की तो उनका भी आक्रोश फूट पड़ा। बोले, अमित सारा जीवन मोदी के लिए लड़ता रहा। लेकिन बदले में पीएम साहब ने क्या किया। ऐसे पीएम की हमें क्या ज़रूरत? हमने पोस्टर फाड़कर निकाल दिया।

एनडीटीवी के इंटरव्यू में अनुपम खेर शायद ऐसे ही अपनों को खोने वालों के गुस्से को सही ठहरा रहे थे। …मैं समझता हूं कि कई मामलों में (सरकार की) आलोचना जायज है। …शव उतरा रहे हैं..इन चीजों से बेअसर रहना अमानवीय है।…नागरिक होने के नाते गुस्सा होना हमारा हक है। जो हुआ है उसके लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराना आवश्यक है।

बरसों से नरेंद्र मोदी के मुरीद रहे अनुपम खेर क्या बदल रहे हैं?

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