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सलमान खान की बंदूकों के लाइसेंस एक्सपायर थे या नहीं अदालतों को इतना जानने में लग गए 18 साल, उधर जेल में कैद हैं 67 फीसदी आम आरोपी

1998 में सलमान खान पर राजस्थान में हिन्दी फिल्म "हम साथ साथ हैं" की शूटिंग के दौरान चिंकारा और काले हिरण को मारने के आरोप से जुड़े चार मामले दर्ज किए गए थे जिनमें से एक मामला आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज किया गया था।

Author January 18, 2017 1:57 PM
अभिनेता सलमान खान पर आरोप था कि उनकी बंदूक का लाइसेंस खत्म हो चुका था।

अगर आप गाड़ी चलाते हैं और आपकी ड्राइविंग लाइसेंस एक्सपायर हो चुका है या आपकी गाडी़ का पल्युशन सर्टिफिकेट एक्सपायर हो चुका है और सड़क पर ट्रैफिक पुलिस का सिपाही आपको रोक लेता है तो वो चंद मिनटों में जान जाता है कि आपका लाइसेंस या सर्टिफिकेट एक्सपायर हो चुका है। आपके पास ऐसी कोई दूसरा लाइसेंस हो तो भी वो एक्सपायर हो चुका है या नहीं ये बात चंद मिनटों से अधिकतम कुछ महीनों में पता चल सकती है। लेकिन भारतीय न्यायपालिका को 18 साल लग चुके हैं ये जानने में फिल्म स्टार सलमान खान ने लाइसेंस एक्सपायर हो चुकी बंदूकों का इस्तेमाल किया था या नहीं? हालांकि अदालत का विस्तृत फैसला अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। अगर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो इस बात के अंतिम फैसले में और भी समय लग सकता है।

बॉलीवुड के “बैड ब्वॉय” सलमान खान को राजस्थान के जोधपुर हाई कोर्ट ने बुधवार (18 जनवरी) को 1998 में दर्ज हुए आर्म्स एक्ट मामले में बरी कर दिया गया। आर्म्स एक्ट में अधिकतम सात साल की सजा हो सकती थी। भारतीय कानून की सुस्त रफ्तार के किस्से विख्यात हैं लेकिन इस सुस्ती में भी एक पेंच है। जहां सक्षम अभियुक्त कानून की “धीमी चाल” की वजह से सालों तक आराम से जेल से बाहर रहते हैं, वहीं भारतीय अदालतों की हाथी जैसी चाल गरीबों और हाशिये के लोगों पर बहुत भारी पड़ती है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के साल 2014 के आंकड़ों के अनुसार भारतीय जेलों में बंद कुल 4,11,992 कैदियों में से 2,78,504 कैदियों के मामले विचाराधीन हैं। यानी साल 2013 तक भारतीय जेलों में बंद कुल कैदियों में से 67.6 प्रतिशत को अदालत ने दोषी नहीं ठहराया था।

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जेल में बंद विचाराधीन कैदियों में ज्यादातर गरीब, अनपढ़ या मामूली पढ़े लिखे होते हैं। जेल में बंद कैदियों बड़ी संख्या अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कैदियों की है। ऐसे में ये सवाल उठना लाजिमी है कि क्या भारतीय अदालतों की “सुस्त रफ्तार” अमीरों के लिए मददगार और गरीबों के लिए अभिशाप साबित होती है?

1998 में सलमान खान पर राजस्थान में हिन्दी फिल्म “हम साथ साथ हैं” की शूटिंग के दौरान चिंकारा और काले हिरण को मारने के आरोप से जुड़े चार मामले दर्ज किए गए थे जिनमें से एक मामला आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज किया गया था। मामले के अनुसार सलमान के पास मौजूद 0.22 कैलिबर की राइफल और 0.32 कैलिबर की रिवाल्वर के लाइसेंस अक्टूबर 1998 तक एक्सपायर हो गये थे। सलमान इनमें से तीन मामलों में बरी हो चुके हैं। एक मामला अभी अदालत में विचाराधीन है। सलमान खान को बॉम्बे हाई कोर्ट साल 2002 के हिट एंड रन केस में भी बरी कर चुका है। याद रहे फ्रांस के महान साहित्यकार हेनरी बाल्ज़ाक ने कहा था, “कानून मकड़ी का ऐसा जाल है जिसमें बड़े पतंगे निकल जाते हैं और छोटे वाले फंस जाते हैं।”

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