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राम मंदिर निर्माण का संदेश समझिए

महात्मा गांधी अपनी आत्मकथा ‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’ में लिखते हैं तुलसीदास की रामायण मेरे लिए धार्मिक साहित्य में सबसे महानतम पुस्तक है।

ram mandir, ram mandir news, ram mandir bhumi pujanअयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद कुछ ऐसा नजर आएगा। (फोटोः श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र)

निखिल यादव 

अयोध्या अब मात्र उत्तर प्रदेश का एक जिला नहीं रह जायेगा वह तो अब सभी राम भक्तों के लिए प्रेरणा, ऊर्जा और जीवन को दिशा देने वाला पावन धाम बनने वाला है! प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 05 अगस्त 2020 को अयोध्या जाकर भव्य-दिव्य् राम मंदिर की आधारशिला रख दी है। मंदिर का एक लम्बा इतिहास है जो हर राम भक्त के संघर्ष की गाथा है।

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में श्री राम का प्रभाव: गुरु गोविन्द सिंह जी द्वारा गुरुमुखी लिपि में लिखी रामायण उस समय के कार्यकर्ताओं के लिए मार्गदर्शक साबित हुई थी! दक्षिण भारत में स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व करने वाले वि. वि. एस अय्यर जेल में ‘अ स्टडी ऑफ़ कंब रामायण’ लिखते हैं और अपने साथ-साथ बाकि क्रांतिकारियों को भी इस ग्रन्थ से प्रेरित करते हैं।

महात्मा गाँधी राम और राम राज्य की बात अपने अनेकों भाषण में करते थे। गाँधी जी ने 12 मार्च, 1930 में अहमदाबाद के पास स्थित साबरमती आश्रम से दांडी गांव तक 24 दिनों का पैदल मार्च निकाला था, जिसे नमक मार्च, दांडी सत्याग्रह के नाम से भी जानते हैं। इस पैदल यात्रा के दौरान भी गाँधी जी ने ‘रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम’ भजन अनेकों बार गाया था।

महात्मा गांधी अपनी आत्मकथा ‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’ में लिखते हैं तुलसीदास की रामायण मेरे लिए धार्मिक साहित्य में सबसे महानतम पुस्तक है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तथा सामाजिक कार्यकर्ता आचार्य विनोबा भावे रामायण को राष्ट्रीय महाकाव्य की संज्ञा देते हैं। वो रामायण को भारत के संगठित होने का केंद्र बिंदु मानते थे। इसी तरह, स्वामी विवेकानंद अपने वक्तव्यों में रामायण से अनेकों बार उद्धरण देते थे। वह स्वयं श्रीराम के चरित्र से प्रभावित थे। लोकमान्य तिलक, भगिनी निवेदिता , मदनलाल ढींगरा जैसे अनेको स्वतंत्रता सेनानियों के लिए राम और रामायण एक प्रेरणा स्त्रोत था।

भारत की अनेकता में एकता का एक उद्धरण राम कथा भी है: भारत का कोई भाग ऐसा नहीं है जहां श्री राम का नाम और विचार न पंहुचा हो। ऋषि वाल्मीकि द्वारा संस्कृत में रामायण मूल रूप से लिखी गई है और संस्कृत में ही उसके अनेको संस्करण भी हैं जैसे- वशिष्ठ रामायण,अगस्त्य रामायण, आध्यात्म रामायण आदि। अगर भारतीय भाषाओं की बात करें तो तमिलनाडु में 12वीं शताब्दी के कवि कम्बन तमिल कंब रामायण लिखते हैं।

असम में 14वीं शताब्दी में सप्तकाण्ड रामायण माधवा कंडाली, 15वीं शताब्दी में कृत्तिबास ओझा बंगाली कृत्तिवासी रामायण, उत्तर प्रदेश के अवध में 16वीं शताब्दी में गोस्वामी तुलसीदास जी रामचरितमानस, संत एकनाथ 16वीं शताब्दी में मराठी भावार्थ रामायण, कवि प्रेमानंद स्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस से प्रभावित होकर गुजराती में तुलसी करता रामायण लिखते है 17वीं शताब्दी में।

अगर हम कर्नाटक की बात करें तो कन्नड़ में हमें कुमुदेन्दु रामायण ( जो की जैन संस्करण) 13वीं शताब्दी में लिखी जाती है और कुमारा- वाल्मीकि तोरवे रामायण 16वीं शताब्दी में मिलती है। ओडिशा में भी रामायण की परंपरा बहुत पुरानी है। ओड़िया दाण्डि रामायण या जगमोहन रामायण बळराम दास 14वीं शताब्दी में लिखते हैं। ! इनके अतरिक्त आंध्र प्रदेश, बिहार, गोवा, केरल, मणिपुर और अन्य प्रांतो में रामायण सालों से सुनाई और पढ़ी जा रही है।

अनेकों भारतीय भाषाओं में लिखित रूप में आने से पहले भी रामायण घर-घर में कहानियों के माध्यम से अनेकों वर्षो से प्रचलित है। इसके अतिरिक्त बुद्ध और जैन पंथो में भी रामायण के अपने-अपने संस्करण हैं। भगवान राम भारत वासियों के लिए ही नहीं, मध्य तथा दक्षिण एशिया वासियों के लिए भी प्रेरणा स्त्रोत हैं। विदेशो में भी श्री राम का बोल बाला हज़ारो वर्षो से रहा है। चीन, जापान, इण्डोनेशिया, थाईलैंड, म्यांमार, श्रीलंका, नेपाल और भी अनेकों देशो में रामायण लिखित रूप में और कला में विद्यमान है।

सभी के लिए आदर्श हैं श्री राम: एक पुत्र के रूप में जब राजा दशरथ ने श्री राम को माता कैकेयी के कहने पर 14 वर्ष का वनवास दिया तो श्री राम ने एक बार भी नहीं सोचा और आदेश का पालन किया। एक भ्राता के रूप में श्री राम अपने सभी भाइयों लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न से अत्यंत स्नेह करते थे। जब उनको वनवास और भरत को शासन देने की बात हुई तो भी श्री राम को हर्ष ही हुआ कि भरत राजा बनकर शासन करेंगे। लक्ष्मण तो जैसे श्री राम की परछाईं ही थे। दोनों ने कभी भी एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। आज भी अनेकों घरो में भाइयों का नाम राम-लक्ष्मण रखा जाता है।

एक पति के रूप में श्री राम ने अपने सभी धर्म निभाए। वो उनका स्नेह और धर्म का पालन ही था माता सीता के प्रति जो उनको हज़ारों किलोमीटर दूर लंका तक लेकर गया उनकी खोज में, माता सीता और श्री राम भारतीय दंपतियों के लिए आदर्श है। श्री राम का नैतिक आचरण, सत्य, त्याग, धैर्य, करुणा, पराक्रम हर भारतीय को प्रेरित करती है।

लंका पर विजय पाने के बाद भी उन्होंने उसपर कब्ज़ा नहीं किया, बल्कि रावण के भाई वि‍भीषण को ही वहां का राजा बनाया। किसी का दमन करना, अतिक्रमण करना, यह हमेशा से भारत की परंपरा के विरुद्ध रहा है। इसीलिए राम मंदिर का निर्माण विश्व भर के लिए एक जीवंत सन्देश है। प्रभु श्री राम की तरह धर्म आधारित जीवन जीने की प्रेरणा देने वाला एक मंदिर।

(लेखक निखिल यादव -विवेकानंद केंद्र के उत्तर प्रान्त के युवा प्रमुख हैं। यह उनके निजी विचार हैं)

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