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नरेंद्र मोदी के दावं से चित हुए विपक्ष को एकजुट करने में लगे सारे नेता, नीतीश कुमार को मनाने पटना पहुंचे गुलाम नबी आजाद

मौजूदा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है। अगले राष्ट्रपति के चयन के लिए चुनाव 17 जुलाई को है। नतीजे 20 जुलाई को आएंगे।
पटना के गांधी मैदान में राज्यपाल रामनाथ कोविंद और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (दाएं)। (फाइल फोटो)

कांग्रेस समेत कई प्रमुख विपक्षी दल कई हफ्तों से राष्ट्रपति चुनाव के लिए कमर कसे हुए थे। सोनिया गांधी के आवास पर विपक्षी दलों के नेताओं की एक महाबैठक भी हुई। उस बैठक के आगे पीछे भी ममता बनर्जी और नीतीश कुमार जैसे नेता “देश का अगला राष्ट्रपति कौन होना चाहिए?” के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए सोनिया से मिले। दूसरी तरफ राष्ट्रपति बनवाने के लिए जरूरी वोटों से महज चंद कदम दूर खड़ी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) चुपचाप ये नजारा देखती रही। मीडिया और सोशल मीडिया ने बीजेपी के राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर कई नाम उछाले लेकिन खुद बीजेपी के किसी नेता ने किसी भी नाम पर कोई चर्चा नहीं की। यहां तक कि विपक्षी दलों से बातचीत के लिए बनाई गई राजनाथ सिंह, वेंकैया नायडू और अरुण जेटली की कमेटी ने भी पार्टी के राष्ट्रपति उम्मीदवार के नाम का संकेत नहीं दिया। राजनाथ और वेंकैया जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने तो उन्होंने सोनिया को बीजेपी के उम्मीदवार का नाम न बताकर उन्हीं से पूछ लिया कि वो क्या सोच रही हैं! और जब सोमवार (19 जून) को बीजेपी ने बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद का नाम राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर घोषित किया तो अचानक ही विपक्ष का इतने दिनों से बनाया जा रहा एकजुटता का शिराजा बिखर गया।

बीजेपी ने एक गैर-विवादित वरिष्ठ बीजेपी दलित नेता रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदार बनाकर कांग्रेस के तोते उड़ा दिए हैं। यूपी के रहने वाले कोविंद बिहार के राज्यपाल हैं। उनका राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से “मधुर संबंध” रहे हैं, ऐसा खुद जदयू नेता केसी त्यागी ने कहा है। अभी तक आई रिपोर्टों के अनुसार ये लगभग तय माना जा रहा है कि नीतीश कुमार कोविंद की उम्मीदवारी को समर्थन देने जा रहे हैं। और शायद इसी को भांप कर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद के पटना पहुंचने की खबरें आ रही हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आजाद नीतीश को नाजुक वक्त में “विपक्ष के संग एकजुटता” बरकरार रखने की अहमियत समझाएंगे। बिहार में जदयू की राजद और कांग्रेस के संग गठबंधन सरकार है।

रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाकर बीजेपी ने दूसरा सबसे बड़ा किला उत्तर प्रदेश में फतह किया है। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी दोनों के लिए कोविंद का विरोध करना मुश्किल हो गया है। बसपा प्रमुख मायावती ने तो कह भी दिया है कि अगर विपक्ष बेहतर दलित उम्मीदवार नहीं उतारता तो वो कोविंद को लेकर सकारात्मक हैं। जाहिर है नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस को मजबूर कर दिया है कि बीजेपी की पिच पर आकर खेलें। कोविंद यूपी के कानपुर के रहने वाले हैं। ऐसे में मायावती और अखिलेश यादव के लिए उनका विरोध करना क्षेत्रीय भावनाओं के खिलाफ भी होगा क्योंकि अगर कोविंद जीते तो लंबे समय बाद यूपी का कोई नेता राष्ट्रपति बनेगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मुलायम सिंह यादव ने तो बीजेपी की पसंद पर मुहर लगा भी दी है। अखिलेश ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है लेकिन दलित विरोधी और यूपी विरोधी ठहराए जाने का डर तो उन्हें भी सता रहा होगा।

रामनाथ कोविंद के बीजेपी उम्मीदवार घोषित किए जाने की सूचना पीएम नरेंद्र मोदी ने खुद फोन करके तेलंगाना के सीएम और तेलंगाना राष्ट्रीय समिति के प्रमुख के चंद्रशेखर राव को दी। राव ने तत्काल ही कोविंद के नाम पर अपनी सहमति भी दे दी। माना जा रहा है कि तमिलनाडु के सीएम ई पलानीस्वामी भी कोविंद का विरोध नहीं करेंगे। लेकिन हारे को हरिनाम की तर्ज पर कांग्रेस ने अपने दूत को जेल में बंद शशिकला नटराजन को मनाने के लिए भेजा है। पलानीस्वामी शशिकला कैंप के समर्थन से ही राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं। विपक्ष किस हद तक अपने बिखरते हुए कुनबे को एकजुट रख पाएगा ये तो वक्त बताएगा लेकिन अभी तो यह कहा ही जा सकता है कि नरेंद्र मोदी ने साबित कर दिया है कि अगर विपक्ष डाल डाल है तो वो पात पात हैं।

राष्ट्रपति चुनाव की बात सुनने और देखने में जितनी आसान लगती है, असल में यह उतनी ही टेढ़ी खीर है। देश की सबसे ताकतवर कुर्सी के लिए जनता मतदान नहीं करती। जी हां, राष्ट्रपति को सीधे तौर पर लोग खुद नहीं चुन सकते। राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया में विधायक और सांसद वोट देते हैं। ऐसे गिने जाते हैं उनके मत। राष्ट्रपति चुनाव 2017 बेहद करीब है। चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। नए राष्ट्रपति के नाम को लेकर सभी बैठकें और विचार-विमर्श में जुटे हैं। तो आइए जानते हैं कि इस बार के चुनाव में दिख सकती है कुछ इस तरह की तस्वीर।

वीडियो- पीएम नरेंद्र मोदी ने एक तीर से काटे कई नाम

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