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तो क्या अब दलित भी बन रहे राजनीतिक मोहरा?

दलित संगठनों का मानना है कि इस फैसले के बाद उनके खिलाफ अत्याचार के मामले और बढ़ जाएंगे। देश में इस वक्त दलितों के भारत बंद और इस बंद के दौरान हिंसा तथा छह लोगों की मौत को लेकर हंगामा मचा है। लेकिन सच यह है कि धीरे-धीरे देश में दलितों का आंदोलन पहले से ज्यादा मुखर होता जा रहा है
Bharat Bandh यूपी के मुजफ्फरनगर और हापुड़ में गाड़ियां फूंक दी हैं। वहीं मेरठ में एक पुलिस चौकी में आग लगा दी। (Photo: ANI)

जिस वक्त देश की सबसे बड़ी अदालत इस मसले पर सुनवाई कर रही थी कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम को लेकर दिये गये अपने पूर्व के फैसले पर वो पुनर्विचार करेगी या नहीं…? उस वक्त कई दलित संगठन पूरे भारत को बंद कराने के लिए सड़कों पर आंदोलन कर रहे थे। देश के करीब 14 से ज्यादा राज्यों में कई दलित संगठनों ने ‘सुप्रीम’ आदेश के खिलाफ जबरदस्त हिंसक प्रदर्शन किया है। सोमवार (02-04-2018) की अहले सुबह से ही दलित संगठन के कार्यकर्ता अलग-अलग जगहों पर सड़कों पर जमा होने लगे थे, हालांकि उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि शाम होते-होते इस आंदोलन की आग में 6 लोग झुलस जाएंगे।

मध्य प्रदेश में 4, राजस्थान में 1 और उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में एक शख्स की मौत ने इस आंदोलन को रक्तरंजित कर दिया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आंदोलनकारियों ने पुलिस चौकी में आग लगा दी। राजस्थान के बाड़मेर और मध्य प्रदेश में आंदोलनकारी आपस में ही भिड़ गए जिसमें 30 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए। पंजाब, बिहार औऱ ओडिशा भी भारत बंद से त्रस्त रहा। इन सभी राज्यों के अलग-अलग जिलों में आंदोलनकारियों ने ट्रेन के पहिये थाम दिये और सड़कों पर जमकर हंगामा किया। इस आंदोलन का असर देश की 100 से ज्यादा ट्रेनों के परिचालन पर पड़ा है। भारत बंद पर हुए इस महाभारत का असर पूरे देश में हुआ।

राज्य तथा केंद्र की सरकारों ने लोगों से शांति बरतने की अपील की है। इस बीच गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को कमजोर करने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर दी है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अभी इस मामले में तत्काल सुनवाई करने से मना कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एससी एसटी ऐक्ट के तहत तत्काल गिरफ्तारी न किए जाने का आदेश दिया था। इसके अलावा एससी/एसटी ऐक्ट के तहत दर्ज होनेवाले मामलों में अग्रिम जमानत को भी मंजूरी दे दी थी। अदालत के इसी फैसले से नाराज दलित संगठन कोर्ट से फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

सड़क पर उतरने वाले दलितों को राहुल गांधी ने किया सलाम, देखें आगजनी-तोड़फोड़-पथराव की PHOTOS

दलित संगठनों का मानना है कि इस फैसले के बाद उनके खिलाफ अत्याचार के मामले और बढ़ जाएंगे। देश में इस वक्त दलितों के भारत बंद और इस बंद के दौरान हिंसा तथा छह लोगों की मौत को लेकर हंगामा मचा है। लेकिन सच यह है कि धीरे-धीरे देश में दलितों का आंदोलन पहले से ज्यादा मुखर होता जा रहा है। इसी साल महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव में दलित समाज सुधारक की मूर्ति तोड़े जाने के बाद हिंसा हुई थी।

उससे पहले गुजरात के उना की घटना हो या फिर रोहित वेमुल्ला की घटना को लेकर संसद से सड़क तक दलितों का संग्राम। हालांकि एक सच यह भी है कि अब दलितों का यह आंदोलन सियासी ज्यादा बन गया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत तमाम विपक्षी पार्टियों ने अपने-अपने तरीके से भारत बंद के दौरान हुई हिंसा की इस आंच पर सियासी रोटियां सेकनी शुरू कर दिये हैं।

राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा कि दलितों को भारतीय समाज के सबसे निचले पायदान पर रखना भाजपा और आरएसएस के डीएनए में है और जो इस सोच को चुनौती देते है उसे वो हिंसा से दबा देते हैं। जाहिर है इस तरह की घटनाओं ने विपक्ष को बड़ा मुद्दा थमा दिया है। हर दलित आंदोलन के बाद बीजेपी को दलित विरोधी प्रचारित करने की पुरजोर कोशिश तमाम विपक्षी दल कर रहे हैं। हालांकि बीजेपी भी इस वक्त दलितों को साधने में पीछे नहीं है।

भीमराव आंबेडकर का सम्मान हो या फिर आंबेडकर साहब से जुड़े स्थलों को विकसित करने की रणनीति बीजेपी 2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति में दलितों को ऊपर रख रही है। हालांकि समय-समय पर अलग-अलग मुद्दों को लेकर देश में दलितों के होने वाले आंदोलन बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। देश में दलितों के आंदोलन धीरे-धीरे ज्यादा हिंसक होते जा रहे हैं और इन हिंसाओं पर सियासत ने दलितों के हिस्से में सिर्फ मौत और मातम दिया है।

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