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कविता प्रकृति है, प्रकृति दुनिया है और दुनिया एक कविता

कविता को प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों से मुक्त करने की जरूरत है। नकारात्मक विचारों या निराशावादी भावनाओं, जैसे, अंधविश्वास, क्रूरता, घृणा, संवेदनहीनता, उदासीनता, सामाजिक विघटन, वासना, दासता और मानवीय अपमान-के लिए कोई जगह नहीं है कविता में।

प्रतीकात्मक तस्वीर

वीर सिंह

कविता एक अद्भुत, निराली और इस जीवटता भरी दुनिया की सबसे सुन्दर कला है। कला के अन्य रूपों में कविता हो न हो, पर कविता अपने में सभी कलाओं को समाहित करने का सामर्थ्य रखती है। जीवन और अजीवन के सभी पहलू, सभी सुंदरताएँ, और सभी सार कविता के माध्यम से व्यक्त किए जा सकते हैं। कार्ल सैंडबर्ग कहते हैं, कविता एक गूंज है, जो एक छाया को नृत्य करने के लिए कह रही है ।

जीवन के सभी रूप, पृथ्वी के सारे सत्त्व, सभी खगोलीय पिंड, सारे ग्रह, सभी सितारे, आकाश गंगाएं, ब्रह्मांड की सभी घटनाएं, और सारे का सारा ब्रह्मांड सब कविता के हृदय में गूंजते हैं। इतना विराट हृदय है कविता का ! एक कोशिका से लेकर सम्पूर्ण जीवजगत तक और एक परमाणु से लेकर पूरे ब्रह्माण्ड तक कविता का राज है। कविता पूरे अतीत, वर्तमान और सभी भविष्यों पर अपना आधिपत्य जमाने का साहस रखती है। सारे यथार्थ कविता की चासनी में पकते हैं।

कविता कल्पनाओं को गले लगाती है और जो अकल्पनीय है उसे भी जन्म दे सकती है। कविता और सौंदर्य को परिभाषित करना कठिन है। लेकिन दोनों अपार खुशी देते हैं। दोनों प्रेरणादायक हैं। हम सौंदर्य को शब्दों तक सीमित नहीं कर सकते और न कविता को। सौंदर्य और कविता दोनों शब्द-बाध्य परिभाषाओं की सीमाएं तोड़ते हैं। कविता को परिभाषित करना साधारण मन के दायरे से बाहर है। ऐसा करने के लिए एक कल्पना की असाधारण दुनिया में डुबकी लगाने की जरूरत पड़ती है। जब कोई कविता को परिभाषित करने का प्रयास करता है, तो वह एक अलग, अक्सर अकल्पनीय, शब्दों की दुनिया चुनता है। मिल्टन कविता को शाश्वत आत्मा की प्रार्थना के रूप में परिभाषित करता है।

फ़्रांसीसी कवि वी. चचरे के अनुसार, कविता सर्वोपरि कला है, क्योंकि यह सबसे अच्छे अनंत का प्रतिनिधित्व करती है। सिनोंसो ऊसे कविता को सब कुछ में देखते हैं: हवाओं में, आकाश में, समुद्र में, पेड़-पौधों में, आदमियों में, आँखों में, प्यार में, मौत में। वह पूरी दुनिया को एक कविता के रूप में देखते हैं : कविता प्रकृति है/प्रकृति दुनिया है/ और दुनिया एक कविता है।

सौंदर्य ही कविता की आत्मा है। कुछ भी जो कविता में व्यक्त नहीं किया गया या एक कविता द्वारा छुआ नहीं गया, गहनता से अपने अस्तित्त्व का प्रदर्शन नहीं कर सकता। जो कविता से गले नहीं उतर सकता वह वह सुन्दर नहीं हो सकता। कविता सौंदर्य पैदा करती है और चीजों के अस्तित्त्व को गहन बनाती है और उन्हें शाश्वत रूप में ढालती है। केवल कविता ही बातों को, गाथाओं को, लोगों को, समाजों को और घटनाओं को शाश्वत बनाती है।

वाल्मीकि की रामायण, जिसकी रचना कई हजार साल पहले हुई थी, जब तक पृथ्वी मौजूद रहेगी, तब तक अस्तित्व में रहेगी। महाभारत के दौरान रचा गया दर्शन भगवद्गीता के कारण शाश्वत है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा मध्यकालीन युग में रचित रामचरितमानस को पूरी दुनिया में करोड़ों-अरबों लोगों ने गाया है। प्राचीन ग्रीक कवि होमर के भजन जो विभिन्न देवताओं का जश्न मनाते हैं, हमेशा यूरोपीय और पश्चिमी साहित्य में सुंदर माने जाएंगे।

अकावाघोसा की बिधा-चरिता, मिल्टन की पैराडाइज लॉस्ट और पैराडाइज रेगेंड, शेक्सपीयर के जूलियस सीजर सदैव मानव दिलों में निवास करेंगी। कविता का अस्तित्त्व ब्रह्मांडीय है और ब्रह्मांडीय प्रकाश ने इसकी सर्जना की है। पारिस्थितिक दर्शनशास्त्र के जनक और कवि प्रोफेसर हेनरिक स्कोलिमोस्कि की एक अंग्रेजी कविता—कविता, ब्रह्माण्ड, प्रकाश और आदमी की एकात्मता कितनी खूबसूरती से चित्रित करती है:

कविता के बिना ब्रह्मांड केवल हकला सकता था,
कविता के माध्यम से ब्रह्मांड ने गाना शुरू किया।
कविता के बिना ब्रह्मांड आकारहीन और धुंधला था।
कविता के माध्यम से इसने प्राप्त किया
अपनी विशिष्ट विशेषताओं को।
जब प्रकाश पर्याप्त रूप से परिपक्व हुआ,
वह खुशी से प्रस्फुटित हुआ
कविता और गीत के साथ ।
जब कविता और प्रकाश एक साथ जुड़े
ब्रह्मांड खुशी में नृत्य करने लगा।
तुम थे केवल धूल का एक धब्बा,
प्रकाश और कविता के साथ जुड़कर
तुम बन गए देवत्व की गौरवशाली छवि।

आत्मा को छूने वाले और जनमानस के मन में क्रांति लाने वाले कवि सदैव प्रेरणा के स्रोत रहे हैं और रहेंगे भी। इसलिए कालिदास लोगों की स्मृतियों में बने रहेंगे। वेदों और उपनिषदों के लेखक, महाभिषेक के अब तक के सबसे बड़े महाकाव्य और हिंदुओं की पवित्र पुस्तक भगवद्गीता रचयिता वेदव्यास सभी के मन में वास करते हैं और उनकी काव्य ऊर्जा सदैव सामाजिक प्रेरणाओं का संचार करती रहेगी। तुलसीदास हर दिन लाखों परिवारों में गाए जाते हैं। सूरदास का भगवान श्रीकृष्ण को काव्य-प्रणाम भारत में जनमानस को सदैव प्रेरित करेगा। कविता मानव के मन में संवेदनशीलता पैदा करती है। कविता के माध्यम से मानव साहस को सबसे अच्छा व्यक्त किया जाता है।

कविता रचनात्मकता को प्रज्वलित करती है, जो हमेशा साहस के साथ मिश्रित होती है। यह मनुष्यों के लिए उच्चतम महिमा के लिए एक मार्ग प्रशस्त करती है। इसमें एक निष्क्रिय और सो रही सभ्यता को जगाने की शक्ति है। मुर्दों में भी जीवन का संचार करने की ऊर्जा है कविता में।

कविता को प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों से मुक्त करने की जरूरत है। नकारात्मक विचारों या निराशावादी भावनाओं, जैसे, अंधविश्वास, क्रूरता, घृणा, संवेदनहीनता, उदासीनता, सामाजिक विघटन, वासना, दासता और मानवीय अपमान-के लिए कोई जगह नहीं है कविता में। कविता में इन तत्वों के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता, क्योंकि यह सुन्दरतम विधा तो केवल प्रकाश और सौंदर्य के प्रसार और जीवन मूल्यों की अभिवृद्धि के लिए ही है।

हाँ, अन्धकार को मिटाने और पापों और पापियों का अंत करने की आग भी है कविता में। कविता शनैः शनैः मर रही है। कविता के साथ हमारे समकालीन समाजों की संवेदनशीलता भी। हमारे समय की सबसे बड़ी विडम्बना! हमारे समाजों को नपुंसकताओं के दुष्चक्रों से मुक्त करने और समाज की नैसर्गिक जीवटताओं को सींचने के लिए कविता को सुसुप्तावस्था से जगाना ही होगा।

कविता का पुनरुद्धार बहुत जरूरी है सभी कलाओं के निखार के लिए तथा अंधकारों की ओर सरकते समाजों की राह को प्रकाश की ओर मोड़ने के लिए भी। और यह हमारे समय में मानव एजेंडे का एक अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए। हमारा भविष्य सुंदर होना चाहिए। और भविष्य तभी सुन्दर होगा जब सौंदर्य अपनी आत्मा –अर्थात कविता – के साथ पुष्पित- पल्लवित होगा।

(लेखक जी. बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्व विद्यालय के पूर्व प्रोफेसर हैं)

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