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इस तरह दे सकता है पाकिस्तान भारत के सर्जिकल स्ट्राइक का जवाब…

पाकिस्तान भले ही भारत की सर्जिकल स्ट्राइक से इनकार कर रहा है लेकिन अंदर ही अंदर वो जवाबी कार्रवाई की तैयारी जरूर कर रहा होगा।

पाकिस्तान सेना के प्रमुख जनरल राहिल शरीफ। (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर के उरी में आतंकी हमले के बाद भारत ने नियंत्रण रेखा पारकर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए कई आतंकी ठिकानों को बर्बाद कर दिया। भारतीय सेना द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार भारत के ऑपरेशन में कई आतंकी मारे गए। विभिन्न मीडिया खबरों में भारत की सर्जिकल में मारे गए अातंकियों की संख्या 35-40 बताई जा रही है। हालांकि पाकिस्तानी सरकार, सेना और मीडिया इससे इनकार कर रहे हैं कि भारत ने पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक की है। लेकिन पाकिस्तान का ‘सच से इनकार’ करना कोई नई बात नहीं है। पाकिस्तान सरकार ने आधिकारिक तौर पर कारगिल में हमले की बात कभी स्वीकार नहीं की। उसने मुंबई में नवंबर 2008 में किए गए आतंकी हमले में पकड़े गए अजमल कसाब को पाकिस्तानी होने की बात भी नहीं स्वीकार की। 1993 के मुंबई बम धमाकों के वांछित दाऊद इब्राहिम के पाकिस्तान में होने की बात आज तक नहीं मानी है। पाकिस्तान भले ही ये माने कि पीओके में उसे मुंह की खानी पड़ी है, वो इसका जवाब की तैयार जरूर कर रहा होगा। पाकिस्तानी सरकार, पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के इतिहास को देखते हुए कहा जा सकता है कि वो पांच तरीकों से पलटवार करने कोशिश कर सकता है।

देखें भारत ने क्यों लिया सर्जिकल स्ट्राइक का फैसला: 

1- कश्मीर में अशांति को बढ़ावा देना: लगभग पूरा पाकिस्तान हिंसा, गरीबी और बेरोजगारी का शिकार है लेकिन ऐसा लगता है जैसे वहां के हुक्मरानों को अपने देश से ज्यादा कश्मीर की चिंता रहती है। भारत और पाकिस्तान कश्मीर को लेकर छोटी-बड़ी तीन लड़ाइयां लड़ चुके हैं। कश्मीर की अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी भी आम बात है। पाकिस्तान सरकार, सेना और उसकी खुफिया एजेंसियां कश्मीरी अलगाववादियों को लंबे समय से हथियारों का प्रशिक्षण और पैसा देते रहे हैं। जुलाई में आतंकी संगठन हिज्बुल मुहाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में फैली हिंसा को भी पाकिस्तान ने हवा दी थी। ऐसे में भारत की सर्जिकल स्ट्राइक से चोट खाया पाकिस्तान कश्मीर में भारत विरोधी कृत्य अंजाम देने या नए सिरे से बढ़ावा देने की कोशिश कर सकता है।

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2-  भारत में कारगिल जैसा कोई हमला करवाना: भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में घुसकर आतंकियों को मार गिराया है ऐसे में  अगर पाकिस्तान भी कोई सैन्य कार्रवाई करके भारत को जवाब देना चाहे तो इस पर किसी को हैरत नहीं होगी। पाकिस्तान पहले भी 1999 में कारगिल में घुसपैठ की ऐसी कोशिश कर चुका है। इससे पहले 1947 और 1948 में भी पाकिस्तान ने कश्मीर में ऐसी ही घुसपैठ की कोशिश की थी। अभी तक उसे ऐसे हर मौके पर मुंह की खा कर लौटना पड़ा है लेकिन पाकिस्तान के चाल-चलन देखकर शायद ही कोई मानेगा कि वो अपनी पिछली गलतियों से सबक लेता है। पाकिस्तान द्वारा ऐसे किसी सैन्य घुसपैठ की आशंका को देखते हुए ही शायद भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर और पंजाब में सीमा से सटे गांवों को खाली करने का आदेश दिया है।

देखें भारत ने क्यों खाली कराए सीमा से लगे गांव: 

3- भारत के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाना: पाकिस्तान ने पिछले कुछ सालों में भारत को नुकसान पहुंचाने के लिए उसके महत्वपूर्ण संस्थानों पर आतंकी हमले करवाना शुरू किया है। पठानकोट एयरबेस और ताजा उरी आर्मी कैम्प पर हुए हमले उसकी इस रणनीति का ताजा उदाहरण हैं। भारत को चोट पहुंचाने के लिए अगर पाकिस्तान अपने पाले हुए आतंकी संगठनों से भारत के किसी महत्वपूर्ण ठिकाने को निशाना बना सकता है।

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4- विभिन्न भारतीय शहरों में आतंकी हमले करवाना: पाकिस्तान का आतंकवादियों से प्यार जगजाहिर है। पाकिस्तान समर्थित आतंकियों से केवल भारत ही नहीं अमेरिका, अफगानिस्तान और बांग्लादेश जैसे कई देश पीड़ित हैं। भारत में ऐसे कई आतंकी हमले हो चुके हैं जिनके तार सीधे पाकिस्तान से जुड़े थे। साल 2008 में मुंबई में हमला करने वाले आतंकियों में से एक अजमल कसाब को जिंदा पकड़ लिया गया था। ऐसे में अगर भारत में मौजूद पाकिस्तान समर्थित आतंकियों के स्लीपर सेल को सक्रिय करके या नए आतंकी भेजकर पाकिस्तान जनता में खौफ पैदा करने के लिए आतंकी हमला करवा दे तो बड़ी बात नहीं होगी।

5- विभिन्न देशों में भारतीय संस्थानों पर हमला करवाना: भारत के विरोध में पाकिस्तान किस कदर अंधा है इसका पता इस बात से भी चलता है कि वो केवल भारत के अंदर ही हमले नहीं करवाता। पाकिस्तान दूसरे देशों में स्थित भारतीय दूतावासों या अन्य संस्थानों पर आतंकी हमले करवाता रहा है। पाकिस्तान की इस साजिश का सबसे ज्यादा शिकार अफगानिस्तान स्थिति भारतीय दूतावास होता रहा है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अफगानिस्तान पाकिस्तान के खिलाफ भारत के साथ खड़ा है। जब भारत ने  पाकिस्तान  में होने वाले दक्षेस सम्मेलन का बहिष्कार किया तो अफगानिस्तान उसे सबसे पहले समर्थन देने वालों देशों में था। इसी तरह बांग्लादेश भी पाकिस्तान के खिलाफ भारत के साथ है। उसने भी दक्षेस का बहिष्कार कर दिया है। ऐसे में भारत और इन देशों पर दबाव बनाने के लिए पाकिस्तान भारतीय संस्थानों को निशाना बना सकता है।

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देखें भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक के बाद जम्मू-कश्मीर में किया हाई अलर्ट: 

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