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बाखबरः भारत माता का पता

‘दुनिया का सबसे बड़ा डाटा बेस’ यानी ‘आधार कार्ड’ को अंतत: आधार मिल गया, फाइनेंस बिल की तरह आखिरकार पास हो गया। दो पाटन...

तवलीन सिंह का कॉलम वक्त की नब्जः संकीर्ण पंथनिरपेक्षता

धर्म परिवर्तन रोकने के लिए निकल पड़ते हैं संघी सीना तान के। बीफ खाने वालों को जान से मारने के लिए भी निकल पड़ते...

पी चिदंबरम का कॉलम दूसरी नजर: आधार विधेयक का मकसद सही, तरीका गलत

इतिहास को किस्सों के जरिए बताया जा सकता है। राजनीति को भी। अगर आप भारत की राजनीति को कहानी के जरिए व्याख्यायित करना चाहते...

बेबाक बोलः गणवेश का गणित

आरएसएस को ‘फीडबैक’ आधारित संस्था भी कहा जाता है। अपनी स्थापना के बाद से स्वतंत्र भारत में तीन बार प्रतिबंध का सामना कर चुकने...

बाखबरः मालहरण लीला

अंत में सब लोग एनजीटी को कोसते दिखे कि पांच करोड़ का जुर्माना ही क्यों लगाया? चैनलों में होती आलोचना आलोच्य वस्तु की महिमा...

तवलीन सिंह का कॉलम वक्त की नब्ज़ः दोहरे पैमाने

प्रधानमंत्री ने चुनाव के दौरान काला धन वापस लाने का वादा किया था, वह न सिर्फ ‘चुनावी जुमला’ था, बल्कि झूठी बात थी। वैसे...

पी चिदंबरम का कॉलम दूसरी नजरः बजट 2016-17: राजकोषीय उलझाव

मुख्य आर्थिक सलाहकार को खुश होना चाहिए कि राजकोषीय घाटे को लेकर उनकी बात गलत निकली। वह अच्छा तर्क था जो गलत साबित हुआ!...

5 राज्यों के विस चुनावों पर बेबाक बोल: अब ‘पंच परमेश्वर’

भाजपा ने लोकसभा चुनावों में तो यहां अपनी मौजूदगी जोर-शोर से दर्ज करा दी थी, लेकिन उसके बाद हिंदी भाषी प्रांतों में उसका जो...

Blog: प्रोफेसर अपूर्वानंद, आपने उमर खालिद की जगह अफजल गुरू को गोद क्यों नहीं लिया?

क्या आप इस देश के सभी माता-पिताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं? प्रोफेसर साहब, अगर इस देश के सभी माता-पिता आपकी तरह सोचने लगे...

वेंकैया नायडू का Blog: दो मिनट की शोहरत के लिए पार्टी और देश का बड़ा नुकसान करा गए राहुल गांधी

740 से ज्यादा विश्वविद्यालयों में से केवल तीन-चार कैम्पस में ही अल्ट्रा लेफ्ट और नक्सल विचारधारा वाले छात्र आंदोलन पर उतरे हुए हैं।...

बाखबरः फेयर एंड लवली

राहुल ने अपनी व्यंग्यात्मक शैली के जरिए सत्तापक्ष पर कई बार चुटकियां कसीं। काले धन को गोरा करने की सरकार की ब्यूटी एंड लवली...

तवलीन सिंह का कॉलम वक्त की नब्जः परिवर्तन का सपना

प्रधानमंत्री को पिछले सप्ताह लोकसभा में बोलते हुए सुन कर अच्छा लगा। इसलिए कि पिछले दिनों वे कुछ ज्यादा ही मौन रहे हैं और...

पी चिदंबरम का कॉलम दूसरी नजरः क्या किसानों के अच्छे दिन आएंगे!

किसान खुशी मना सकते हैं। सरकार ने आखिरकार माना कि किसान भारत के अंग हैं, कि कृषिक्षेत्र गहरे संकट में है, और किसानों को...

बेबाक बोलः शोर की स्मृति

इतालवी बुद्धिजीवी अंबर्तो इको ने कहा था कि आजादी का मतलब तो झूठे और नकली शब्दों से मुक्त होना भी है। विश्वविद्यालय परिसरों और...

Blog: एक साधारण भाषण से क्‍यों हीरो बना कन्‍हैया

देश को ऐसे हीरोइज्‍म या हीरो की जरूरत नहीं है, क्‍योंकि यह क्षणिक है। यह नायकत्‍व व्‍यक्ति की शख्‍सीयत या उसके काम से उपजा...

BLOG: 210 में से 24 नस्लों की बकरियां हमारे यहां हैं, हम सबसे ज्यादा बकरी का दूध उत्पादक हैं, फिर भी नहीं उठा पा रहे बकरियों से आर्थिक लाभ

अच्छी नस्ल से संभोग कराने पर औसतन नर बच्चों का वजन 1.65 किलोग्राम बढ़ जाएगा। अगर आप रोगनिरोधी उपाय अपनाते हैं तो बच्चों की...

आरक्षण के रण पर बेबाक बोल: हक-बंदी

आरक्षण की मांग पर हरियाणा का यह पहला बड़ा आंदोलन रहा जिसमें व्यापक स्तर पर जान-माल का नुकसान हुआ। सरकारी तौर पर आरक्षण की...

तवलीन सिंह का कॉलम वक्त की नब्जः इस विरोध के पीछे

पटियाला हाउस में जो हुआ शर्मनाक जरूर है, लेकिन उन हादसों से इस देश को मेरी नजर में कोई खतरा नहीं है। खतरा है,...