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बेबाक बोलः समर शेष- अगस्ता की उड़ान, आरोपों का विमान

रक्षा सौदों से जुड़ी असुरक्षा किसी भी देश के लिए रक्षा सौदे बहुत अहम होते हैं। देश की जरूरतों के अनुसार रक्षा सौदे तय करना...

साहित्य, सियासत और प्रतिबद्धता

‘मेरे यारों, यह हादसा हमारे ही समयों में होना था, कि मार्क्स का सिंह जैसा सिर सत्ता के गलियारों में मिनमिनाता फिरना था’। पंजाबी...

प्रसंगवशः आत्मा पर जमी काई

जीवन में जो कुछ ऊबड़-खाबड़, असुंदर है, अन्यायसंगत है, साहित्य का धर्म उसकी आलोचना है। और आलोचना का धर्म यह देखना है कि साहित्य...

सुधीश पचौरी का कॉलम बाखबरः देने वाला वहां, लेने वाला यहां

यह चिपकाने की कला है। आपके पास आरोप हैं तो उनको इस तरह से मारो कि निशाने पर चिपकें। आप मारते जाइए, कुछ तो...

तवलीन सिंह का कॉलम वक़्त की नब्जः भ्रष्टाचार की परतें

अगस्ता वेस्टलैंड ने अच्छा मौका दिया है मोदी सरकार को इन चीजों में परिवर्तन लाने का। सो, बहुत जरूरी है कि इस मौके को...

पी चिदंबरम का कॉलम दूसरी नजरः न्यायिक सुधार में सरकार का सहयोग जरूरी

सिर्फ एक स्तंभ मेंइस विषय का विवेचन नहीं किया जा सकता, फिर भी मेरा खयाल है, मुझे बात छेड़नी चाहिए।

बेबाक बोल- बेकार सियासत

आत्ममुग्ध होने की भी हद है और खुद पर मोहित रहना एक कला ही है। अब धीरे-धीरे पुरानी पड़ रही दिल्ली की आम आदमी...

पश्चिम बंगाल चुनाव पर बेबाक बोल : परिवर्तन पंथी

पश्चिम बंगाल की विधानसभा में सीटों की कुल संख्या 294 सदस्यों की है, जिनमें से फिलहाल 184 सीटों पर ममता बनर्जी का कब्जा है।...

ब्‍लॉग: सनी लियोनी और भारतीय समाज का पाखंड

जो समाज एक पूर्व पोर्न स्टार को सम्मानित कलाकार के रूप में स्वीकार कर सकता है, वह अपने ही समाज की लड़कियों के साथ...

सत्य के साथ यथावत

2015 में पद्मश्री से नवाजे गए राम बहादुर राय ने अपने पत्रकारीय जीवन में कई सरकारों और उनके कार्यकाल पर निष्पक्ष कलम चलाई।

बेबाक- बोलः आर-पार

मौलाना मसूद अजहर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सरगना है। जैश-ए-मोहम्मद भारत में हमलों के लिए बनाया गया आतंकवादी संगठन है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने भारत...

बेबाक बोल- संविधान एक खोज, सत्ता का सत्य

फेडरिक नीत्शे ने लिखा है कि सत्य नहीं होते, सिर्फ व्याख्याएं होती हैं। वे एक जगह यह भी कहते हैं कि सभी चीजों की...

बेबाक बोलः अहं, हिंसा और हम

तृप्त जानवर होने से बेहतर है अतृप्त इनसान बन कर रहना। दरअसल, इनसान और जानवर के बीच मूल फर्क यही है कि तृप्त रहने...

Blog: होली के बाद होली पर विचार… ‘खाये गोरी का यार बलम तरसे..’ का सच

होली के पहले के कुछ दिनों से यत्र-तत्र-सर्वत्र बजते रहे ‘हिट’ गीतों को याद कीजिये। ‘सिलसिला’ फिल्म का गाना ‘..खाये गोरी का यार बालम...

बेबाक बोलः संकट में शक्तिमान

पूरे देश में जब कांग्रेस के खिलाफ सुनामी आई थी तब देवभूमि कहे जानेवाले हिमाचल प्रदेश में पार्टी की डगमगाती कश्ती के खेवनहार बने...

रम्य रचनाः रेल में ओम शांति

एक समय था कि हवाई जहाज की आवाज आ जाए तो उसे आकाश में उड़ता देखने के लिए खाना छोड़ देते थे। वही समय...

बाखबरः भारत माता का पता

‘दुनिया का सबसे बड़ा डाटा बेस’ यानी ‘आधार कार्ड’ को अंतत: आधार मिल गया, फाइनेंस बिल की तरह आखिरकार पास हो गया। दो पाटन...

तवलीन सिंह का कॉलम वक्त की नब्जः संकीर्ण पंथनिरपेक्षता

धर्म परिवर्तन रोकने के लिए निकल पड़ते हैं संघी सीना तान के। बीफ खाने वालों को जान से मारने के लिए भी निकल पड़ते...