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BLOG: मैं गुजराती मुसलमान, मेरे लिए हिंदुओं से नफरत करना असंभव, क्‍या RSS ऐसा कर सकता है?

पूरे देश में मुसलमान नरेंद्र मोदी को 2002 की त्रासदी के चश्‍मे से देखते हैं।

Author May 27, 2016 3:49 PM
संघ परिवार को मुसलमानों से नफरत छोड़नी चाहिए। तभी भारतीय पुनर्जागरण इस्‍लामी जगत को बचा पाएगा।

हाल ही में हुए पांच राज्‍यों के विधानसभा चुनावों की खास बातें उत्‍तरपूर्व में भाजपा का उदय, कांग्रेस का सिकुड़ना और बंगाल व तमिलनाडु में ताकतवर क्षत्रपों का उभरना रहीं। अजीब बात है कि मीडिया ने इन चुनावों से 18 करोड़ मुसलमानों पर पड़ने वाले प्रभाव को नजरअंदाज किया। पूरे देश में मुसलमान नरेंद्र मोदी को 2002 की त्रासदी के चश्‍मे से देखते हैं। पिछले दो सालों में घर वापसी, लव जिहाद, पाकिस्‍तान जाओ, बीफ बैक, भारत माता की जय और हाल ही में मालेगांव धमाकों के संदिग्‍धों की रिहाई ने मुसलमानों को और डरा दिया। यहां यह नोट करने की बात है कि केवल 25 फीसदी मुसलमान ही अपर या मिडिल क्‍लास में आते हैं। बाकी बचे 13.50 करोड़ दलित और पिछड़े हैं।

कमजोर और गरीब मुसलमानों में भाजपा के उभरने का खौफ सबसे ज्‍यादा है। अब उनके पास और कोई चारा भी नहीं है। असम में उन पर सबसे बड़ा खतरा होगा। वहां पर मुसलमानों को वापस भेजने के नाम पर उन्‍हें बांग्‍लादेशी करार दिया जा सकता है। क्‍या भाजपा सरकार इसे रोक सकती है। केबी हेडगेवार, एमएस गोलवलकर और वीडी सावरकर जैसे नेताओं के विचारों से भाजपा का विकास हुआ। आज भाजपा भारतीय राजनीति की केंद्रीय ताकत बन चुकी है। क्‍या वे मुस्लिमों की इतनी बड़ी आबादी से नफरत करने का जोखिम उठा सकती है।

केंद्र में सरकार बनने के बाद से भाजपा में कई मुसलमान शामिल हुए हैं। इससे समुदाय में उम्‍मीद बंधी है कि उनके प्रति घृणा में कमी आ सकती है। लेकिन इसके लिए जरूरी होगा कि भाजपा के मुसलमान खुद को समुदाय से जोड़े। मुसलमानों को भी अपने पैरों पर खड़ा होना होगा। प्रतिस्‍पर्धा से भरे इस संसार में कोई उन्‍हें छूट नहीं देगा। मुसलमानों को अपना ध्‍यान गुणवत्‍ता वाली शिक्षा, व्‍यापार और महिलाओं को सम्‍मान की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्‍हें हज और उमरा पर लगातार जाने से बचना होगा। इससे जो राशि बचेगी उससे गरीब बच्‍चों और बच्चियों की शिक्षा के लिए इस्‍तेमाल किया जा सकता है। मेरे अनुमान से प्रत्‍येक उमरा यात्रा को टालकर एक मेडिकल या पांच इंजीनियरिंग छात्रों को शिक्षित किया जा सकता है। ऐसे काम से अल्‍लाह ज्‍यादा खुश होगा।

भारतीय मुसलमानों को वैश्विक परिदृश्‍य में देखना चाहिए। इंडोनेशिया और मलेशिया के मुसलमानों को अपवाद मान लें तो पूरे मुस्लिम जगत में खलबली है। पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश और अफगानिस्‍तान की स्थिति छुपी नहीं है। अफ्रीकी मुस्लिम देश खतरनाक बन चुके हैं। मध्‍य पूर्व के देश प्राकृतिक संसाधनों के बूते शिया-सुन्‍नी की लड़ाई में उलझे हैं। मिस्र कठिन दौर से गुजर रहा है। इस अंधेरे में भारतीय मुसलमान उम्‍मीद और शांति के स्रोत हैं। ख्‍वाजा मोइनुद्दीन चिश्‍ती और निजामुद्दीन औलिया जैसे इस्‍लामी संतों का भारत से नाता है। भारतीय मुसलमानों के पास संस्‍कृति, धर्म और इतिहास है। संघ परिवार को मुसलमानों से नफरत छोड़नी चाहिए। तभी भारतीय पुनर्जागरण इस्‍लामी जगत को बचा पाएगा। इसका श्रेय आरएसएस समेत सभी भारतीयों को जाएगा।

मुसलमानों और आरएसएस को एक दूसरे के प्रति नकारात्‍मक भावना को छोड़ना होगा। एक गुजराती मुसलमान के रूप में, जिसने 2002 में भारी कीमत चुकाई, मैं उन सभी को माफ करता हूं जिन्‍होंने मुझे और मेरे समुदाय को नुकसान पहुंचाया मेरी इकलौती बेटी की शादी मेरी मर्जी से गुजराती हिंदू से हुई है। आज मेरे लिए गुजराती हिंदू से नफरत करना असंभव है। क्‍या आरएसएस ऐसा कर सकता है? यह हमारे प्‍यारे भारत की तस्‍वीर बदल देगा।

लेखक फिजिक्‍स के पूर्व प्रोफेसर हैं। वर्तमान में वडोदरा में रहते हैं और मानवाधिकारों के लिए काम करते हैं।

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