इन ‘बाहुबलियों’ के लिए कौन बनेगा ‘कटप्पा’

जिसके पिता इतने दबंग हो, जो सरेआम किसानों को धमका रहा हो, उस परिवार में जन्म लेने वालों की परवरिश भी तो इसी तरह हुई होगी। जो भी हो, मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को और हत्या में शामिल अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है और इसकी जांच भी हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज प्रदीप कुमार श्रीवास्तव करेंगे।

Lakhimpur Kheri, UP Police
लखीमपुर खीरी हिंसा में 8 लोगों की जान गई थी(फोटो सोर्स: PTI)।

भारतीय राजनीतिज्ञ निरीह आम जनता पर कितना और अत्याचार करेंगे। कितना झूठ बोलेंगे, उन्हें कितना गुमराह करेंगे, कितने नए जुमले रचेंगे – गढ़ेंगे । उसके बल पर कितने दिनों तक शासन चलाएंगे? जरा सोचिए और लखीमपुर खीरी प्रकरण के जीवंत वीडियो देखिए। क्या आपको लगता है कि निरपराध किसान, जो सामान्य रूप से अपने अन्य साथियों सहित जुलूस निकालकर सहज-शांत भाव से चल रहे थे, एक बड़ी गाड़ी आकर उन्हें रौंद जाती है। कुचले जाने से कई किसान घायल होकर तड़पते हैं, कई छिटककर दूर जा गिरते हैं।

सोचिए-देखिए, क्या ऐसा कृत्य कोई साधारण व्यक्ति कर सकता है? इस तरह की घटना को कभी आपने अपनी आंखों से घटित होते देखा है? सच तो यह है कि ऐसा कृत्य कोई दरिंदा ही कर सकता है, जो इस बात से निश्चिंत हो कि आगे—पीछे उसका कुछ होने वाला नहीं है, क्योंकि उसे जन्मजात ‘पिताश्री का कवच’ हासिल है जिसके कारण उसका जरा भी बाल बांका नहीं होने वाला है। यह कवच उसके पिताश्री को भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त समस्त प्रशासनिक अधिकारों का स्वामी बना दिया है, जो देश का गृह राज्यमंत्री है, जिस पर देश के समस्त आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी है, जिसपर लोग आंख मूंदकर भरोसा करते हैं। वही रक्षक यदि आमजन के लिए भक्षक बन जाए तो फिर निरीह जनता की रक्षा कौन करेगा!

आइए, अब छायावादी बातों से ऊपर उठकर स्पष्ट बात करें। तिथि : 3 अक्टूबर 2021 दिन : रविवार। स्थान : उत्तर प्रदेश का लखीमपुर खीरी। यहां भड़की हिंसा में आठ लोगों की मौत हो गई। आरोप है कि केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा की कार ने प्रदर्शन कर रहे किसानों को रौंद दिया, जिससे चार लोगों की मौत हो गई। वहीं, इसके बाद भड़की हिंसा में चार लोग और मारे गए। इस पूरे बवाल के बाद सियासत भी तेज हो गई। विपक्षी नेता केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का इस्तीफा मांग रहे हैं।

तीन अक्टूबर रविवार को डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य तय कार्यक्रम के तहत लखीमपुर खीरी के दौरे पर थे। उन्हें रिसीव करने के लिए गाड़ियां जा रही थीं। ये गाड़ियां केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा की बताई गईं। रास्ते में तिकुनिया इलाके में किसानों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इससे झड़प हो गई। बाद में ऐसा आरोप लगाया गया कि आशीष मिश्रा ने किसानों के ऊपर गाड़ी चढ़ा दी, जिससे चार लोगों की मौत हो गई। किसानों की मौत के बाद मामला बढ़ गया और हिंसा भड़क गई। हिंसा में भाजपा नेता के ड्राइवर समेत चार लोगों की मौत हो गई। कुल मिलाकर इस हिंसा में आठ लोगों की मौत हुई। तिकुनिया की इस घटना में एक खबरिया चैनल के निघासन तहसील संवाददाता रतन कश्यप की भी कवरेज करने के दौरान मौत हो गई। गाड़ी की ज़ोरदार टक्कर से वह सड़क किनारे पानी में जा गिरे थे। कश्यप भाजपा से भी जुड़े हुए थे।

मारे गए किसानों के शवों को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों और प्रशासन के बीच समझौता हो गया है। दरअसल, किसानों ने चार मांगें प्रशासन के आगे रखी थीं जिनमें से कुछ मांगों पर सहमति बनी है। इनमें मृतक किसानों के आश्रितों को नौकरी, आठ दिन में आरोपियों की गिरफ़्तारी, मृतक के परिजनों को 45-45 लाख रुपये और घायलों को 10-10 लाख रुपये का मुआवज़ा और घटना की न्यायिक जांच पर समझौता हो गया है। लखीमपुर खीरी हिंसा के मुख्य आरोपी और केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र ने क्राइम ब्रांच के सामने सरेंडर किया। मजिस्ट्रेट के सामने 12 घंटे तक लंबी पूछताछ चली। जांच में सहयोग न करने पर पुलिस देर रात उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।

3 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक़ लखीमपुर खीरी के दौरे पर थे, जहाँ ज़िले के वंदन गार्डन में उन्हें सरकारी योजनाओं का शिलान्यास करना था। इस कार्यक्रम के लिए पहले वह हेलीकॉप्टर से आने वाले थे, लेकिन शनिवार सुबह प्रोटोकॉल बदला और उप मुख्यमंत्री सड़क मार्ग से लखीमपुर पहुंचे। संयुक्त किसान मोर्चा ने उप मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के विरोध और काफ़िले के घेराव की कॉल दी थी जिसमें लखीमपुर और उत्तर प्रदेश के तराई इलाके के दूसरे ज़िलों से किसानों को शामिल होने का आह्वान किया गया था।

लगभग एक से डेढ़ बजे के बीच में केशव प्रसाद मौर्य और अजय मिश्र लखीमपुर ज़िला मुख्यालय से योजनाओं का शिलान्यास कार्यक्रम ख़त्म करके नेपाल बॉर्डर पर टेनी के गांव बनवीरपुर के लिए रवाना हुए जो तिकुनिया से महज़ चार किलोमीटर की दूरी पर है। तिकुनिया के एक प्राइमरी स्कूल में 2 अक्टूबर को हुए दंगल के विजेताओं का पुरस्कार समारोह था। अजय मिश्र को केंद्रीय मंत्री बनाए जाने के सम्मान में इस बार का कार्यक्रम ज़्यादा बड़ा और भव्य था। इसीलिए उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य उसके मुख्य अतिथि थे, लेकिन स्थानीय किसानों ने मंत्री अजय मिश्र टेनी का विरोध करने की ठान रखी थी।

घटना के मुख्य आरोपी आशीष मिश्र के पिता केंद्रीय गृह मंत्री अजय मिश्रा की दबंगई का एक भाषण पूरे घटनाक्रम का कारण बना। एक समारोह में मंच से गृह राज्यमंत्री कह रहे हैं, ‘मैं केवल मंत्री नहीं हूं, सांसद, विधायक भर नहीं हूं। जो विधायक और सांसद बनने से पहले मेरे विषय में जानते होंगे, उनको यह भी मालूम होगा कि मैं किसी चुनौती से भागता नहीं हूं।’ मिश्रा ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, ‘जिस दिन मैंने उस चुनौती को स्वीकार करके काम कर लिया उस दिन पलिया नहीं, लखीमपुर तक छोड़ना पड़ जाएगा, यह याद रहे।’

जानकारों के अनुसार मिश्रा पिछले महीने के आखिरी हफ्ते अपने संसदीय क्षेत्र में गए थे जहां कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों ने उन्हें काले झंडे दिखाए। इससे गृह राज्यमंत्री नाराज हो गये और उन्होंने काले झंडे दिखाने वालों को यह गंभीर चेतावनी दे दी। इसके बाद से किसान उनके खिलाफ आंदोलित थे और बनबीरपुर में उनके पैतृक गांव में आयोजित एक समारोह में उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के जाने का विरोध कर रहे थे। किसान नेता गुरमीत सिंह ने खीरी के तिकोनिया में एक समाचार चैनल को बताया, ’25 तारीख को गृह राज्यमंत्री पलिया से आगे संपूर्णानगर की तरफ आए थे तो हमारी यूनियन (क्रांतिकारी किसान यूनियन) और भारतीय किसान यूनियन के लोगों ने उनको काले झंडे दिखाए तो वह मंच पर चढ़े और उन्होंने बोला, ‘मैं बहुत बड़ा गुंडा हूं… मैं हिसाब बराबर कर दूंगा… मेरे बारे में जानते नहीं हो…।’ इस तरह की धमकी दी।

जिसके पिता इतने दबंग हो, जो सरेआम किसानों को धमका रहा हो, उस परिवार में जन्म लेने वालों की परवरिश भी तो इसी तरह हुई होगी। जो भी हो, मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को और हत्या में शामिल अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है और इसकी जांच भी हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज प्रदीप कुमार श्रीवास्तव करेंगे। रिपोर्ट दो महीने में देंगे। किसान अब भी इस बात पर अड़े हैं कि मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा के पिता गृह राज्यमंत्री इस्तीफा दें, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है और जिसके कारण देशभर में उनके काफिले को काला झंडा और अंडे फेंके जा रहे हैं। ऐसा इसलिए भी हो रहा है, क्योंकि गृह राज्यमंत्री ने स्वयं घटना के बाद कहा था कि मेरा बेटा यदि इस हत्याकांड में शामिल होगा, तो वह तुरंत अपने पद से त्यागपत्र दे देंगे।

आज उनका बेटा जेल में है और वह सरेआम देश में घूम रहे हैं। यह क्या हो गया हमारे देश को! किसकी नजर लग गई, जहां आदमी के जान की कोई कीमत नहीं। यदि कोई बाहुबली है तो वह कहीं भी कुछ भी कर सकता है, क्योंकि वह जानता है कि सरकार उसकी जेब में है और कानून को भी अपने वश में करने की क्षमता वह रखता है। भला हो सुप्रीम कोर्ट का, जहां से अभी भी आमजन का विश्वास जुड़ा है। इस प्रकरण में भी वही तो हुआ है। यदि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप नहीं किया होता तो अब तक यह प्रकरण समाप्त हो गया होता। अब देखना है कि न्यायिक जांच में क्या सच सामने आता है और उसका क्या असर देश की आम जनता पर पड़ता है, जिसमें गृह राज्यमंत्री बरी हो जाते हैं अथवा उन्हें अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ता है।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं और यहां व्यक्त विचार उनके निजी हैं।

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