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इजराइल: क्या-क्या बदलेगा नेतन्याहू के कमजोर होने से

सितंबर में हुए चुनाव में गेंट्ज की ब्लू एंड व्हाइट पार्टी को 120 में से 33 और नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 32 सीटें मिलीं।

Author Published on: October 29, 2019 4:14 AM
इजराइल की आबादी लगभग 85 लाख की है। इसमें करीब 75 फीसद यहूदी हैं और 21 फीसद अरब।

इजराइल के सशक्त नेता कहे जाने वाले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कुर्सी खतरे में है। करीब साढ़े 10 साल तक प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने वाले नेतन्याहू 26 दिनों की कोशिश के बाद सरकार गठन करने में नाकाम रहे। चुनाव टालने की कोशिश में वहां के राष्ट्रपति ने नेतन्याहू के प्रतिद्वंद्वी रहे बेनी गेंट्ज को सरकार बनाने का न्योता दिया है। रविवार को नेतन्याहू और गेंट्ज के बीच राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने के मुद्दे पर बातचीत हुई है। दोनों नेता आगे एक बार और बात कर कुछ घोषणा कर सकते हैं।

इस समूची कवायद को लेकर यह कहा जाने लगा है कि इजराइल में राष्ट्रवाद के नारे के साथ वहां राज करने वाले ताकतवर नेता नेतन्याहू का दौर पर उतार पर है। इससे पहले जब नेतन्याहू को सरकार बनाने का मौका मिला था, तब भी वे गेंट्ज के साथ बात कर रहे थे और गेंट्ज ने खुद को प्रधानमंत्री बनाए जाने की शर्त रखी थी। अब गेंट्ज को बात करने का मौका मिला है। जाहिर है, गेंट्ज के समर्थक उन्हें अगले प्रधानमंत्री के रूप में देखने लगे हैं। इजराइल में जोश से लबरेज गेंट्ज के समर्थक सड़कों पर चुनाव नतीजों के बाद से ही यह नारा लगा रहे हैं- ‘देखो देखो कौन आया, अगला प्रधानमंत्री आया।’ इजराइल की मीडिया रपटों में यह जोश बढ़ गया बताया जा रहा है।

इजराइल की आबादी लगभग 85 लाख की है। इसमें करीब 75 फीसद यहूदी हैं और 21 फीसद अरब। हिब्रू और अरबी यहां की दो मुख्य भाषाएं है। इस साल इजराइल में दो बार आम चुनाव कराए जा चुके हैं। नेतन्याहू की पार्टी अल्पमत में आई। पहली दफा न तो वह और न ही विपक्षी धड़े में से कोई सरकार बना सका। तब दूसरी बार सितंबर में चुनाव कराए गए। दोनों आम चुनावों में बेनी गेंट्ज जीते तो नहीं, लेकिन नेतन्याहू को भी नहीं जीतने दिया। सितंबर में हुए चुनाव में गेंट्ज की ब्लू एंड व्हाइट पार्टी को 120 में से 33 और नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 32 सीटें मिलीं।

दूसरी बार के नतीजों के बाद वहां के राष्ट्रपति ने पहले नेतन्याहू को ही सरकार बनाने को कहा। इस कवायद में सफल नहीं होने के बाद नेतन्याहू ने यह कहते हुए राष्ट्रपति कदम पीछे खींचे, ‘मैंने राष्ट्रपति को बता दिया कि मैं सरकार बनाने का जनादेश लौटा रहा हूं। मैंने एक व्यापक राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने की बहुत कोशिश की। मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए इजराइल को इसकी जरूरत है।’ अब अगला मौका बेनी गेंट्ज को मिला है। गेंट्ज ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। अभी उन्हें 28 दिनों के भीतर बहुमत हासिल करने की चुनौती पार करनी है। अगर वे ऐसा नहीं कर पाए तो इजराइल में एक साल के भीतर तीसरी बार आम चुनाव कराने होंगे।

संयोग वश यह स्थिति गेंट्ज के पक्ष में जा रही है। वहां की कोई राजनीतिक पार्टी चुनाव नहीं चाहती। ऐसे में संभव है चुनाव टालने की कोशिश में वहां कोई गठबंधन आकार ले ले। गेंट्ज को 28 दिनों के भीतर बहुमत हासिल करने की मुश्किल चुनौती पार करनी है। गेंट्ज को इजराइल में मध्यमार्गी दक्षिणपंथी माना जाता है। इसलिए उनके लिए सरकार गठन का गठबंधन करना आसान माना जा रहा है। हालांकि, गेंट्ज ने शर्त रखी है कि प्रस्तावित राष्ट्रीय सरकार में नेतन्याहू न हों। अगर ऐसा हुआ तो नेतन्याहू सत्ता के परिदृश्य से ओझल हो जाएंगे। गेंट्ज के सामने अन्य छोटे दलों का समर्थन लेकर अल्पमत की सरकार बनाने का विकल्प है।

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