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जलवायु संकट: बढ़ेगा समुद्र का जलस्तर

आइपीसीसी के वाइस चेयरमैन बैरेट के अनुसार, 36 देशों के 100 से अधिक वैज्ञानिकों ने मिलकर यह रिपोर्ट तैयार की है।

Author Published on: October 1, 2019 3:11 AM
समुद्र के स्तर और चक्रवात जैसी घटनाओं में वृद्धि के कारण अंडमान और निकोबार जैसे द्वीप डूब जाएंगे।

संयुक्त राष्ट्र की जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी समिति (आइपीसीसी) द्वारा तैयार की गई लैंडमार्क रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इससे वर्ष 2100 तक समुद्र का तल एक मीटर तक बढ़ सकता है और दुनिया के सामने बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। समुद्र के स्तर और चक्रवात जैसी घटनाओं में वृद्धि के कारण अंडमान और निकोबार जैसे द्वीप डूब जाएंगे। कुछ वर्षों बाद अंडमान और निकोबार, मालदीव जैसे द्वीपों को खाली करना होगा। भारत में चक्रवात जैसी जलवायु घटनाओं की गंभीरता बढ़ जाएगी।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में वैश्विक जलवायु परिवर्तन का मुद्दा अहम रहा। लैंडमार्क रिपोर्ट में कहा गया है कि हिमालय और अंटार्कटिका में बर्फ तेजी से पिघल रही है। इससे पानी में रहने वाली मछलियां और अन्य जीव मर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि अगर इसी तेजी से ग्लेशियर पिघलते रहे तो न्यूयार्क और शंघाई जैसे शहरों में भी बाढ़ का खतरा पैदा हो जाएगा। ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के कारण वैश्विक तापनाम बढ़ रहा है और ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं।

आइपीसीसी के वाइस चेयरमैन बैरेट के अनुसार, 36 देशों के 100 से अधिक वैज्ञानिकों ने मिलकर यह रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट में 2030 तक ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 फीसद से नीचे रखने के सुझाव दिए गए हैं। यह पहली बार है, जब आइपीसीसी ने इतने बड़े पैमाने पर पृथ्वी में सबसे दूर ध्रुवीय क्षेत्रों के पहाड़ों और गहरे सागरों के बारे में गहन शोध कर बड़ी रिपोर्ट सौंपी हैं।

इसमें कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पहले भी मनुष्य को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। भविष्य में ना जाने और कितने नुकसान उठाने पड़ें। अगर मनुष्य जीवाश्म ईंधन पर वैश्विक अर्थव्यवस्था की निर्भरता को समाप्त करने के लिए तेजी से कदम उठाए तो इसके कुछ साकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रीनलैंड में बर्फ की परत अकेले समुद्र के स्तर को 20 मीटर तक बढ़ा सकती है। यह परत 2006 से 2015 के बीच 275 गीगाटन पिघल चुकी है। 2007 से 2016 के बीच अंटार्कटिका में बर्फ की परत तेजी से पिघली है। विशेषज्ञों ने कहा कि जिस रफ्तार से अंटार्कटिका में बर्फ की परत पिघल रही है, इससे साल 2100 में समुद्र की सतह तीन फीट तक बढ़ जाएगी।

वैज्ञानिकों ने कहा कि अगर ऐसे ही बर्फ की परत पिघलती रही तो 2050 में दुनिया भर में समुद्र तटीय क्षेत्रों में रहने वाले 680 मिलियन (68 करोड़) लोगों को बाढ़ का सामना करना पड़ेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके कारण तटीय देशों के मौसम में बदलाव आ जाएगा और उन्हें बाढ़ जैसी आपदाओं से जूझना पड़ेगा।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर वैश्विक तापमान मौजूदा गति से बढ़ता रहा तो यूरोप, पूर्वी अफ्रीका के ग्लेशियर, एंडीज और इंडोनेशिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र सदी के अंत तक अपने द्रव्यमान का 80 फीसद खो सकते हैं। इस तरह के बदलावों से पानी की गुणवत्ता, कृषि, पर्यटन और ऊर्जा उद्योग प्रभावित होगा।

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