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संपादकीय: हादसा और सबक

ताजा हादसे के बाद बोइंग 737 मैक्स 8 की उड़ानें बंद करने के पीछे सबसे बड़ा मकसद हवाई यात्रा सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। यात्री विमान बनाने वाली बोइंग दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है।

Author March 14, 2019 3:11 AM
भारत सहित कई देशों ने इन विमानों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया। (Reuters Photo/File)

इथियोपिया में रविवार को हुए विमान हादसे के बाद हवाई यात्रा सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। ऐसे में यह आशंका भी स्वाभाविक है कि लोग जिस विमान में सवार हैं, वह सही-सलामत पहुंचेगा या नहीं! इथियोपिया में जो विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ वह बोइंग 737 मैक्स 8 था। पांच महीनों के भीतर ही इस बोइंग के दो विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होने से यह खौफ ऐसा फैला कि भारत सहित ज्यादातर देशों ने इन विमानों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया। लगभग पूरी दुनिया में ऐसा डर बैठा है कि जो देश बोइंग के इस विमान का उपयोग कर रहे थे, उन्होंने इन पर पाबंदी लगा दी। बल्कि कुछ देशों ने तो इन विमानों को अपने सीमा-क्षेत्र के आकाश से गुजरने से भी रोक दिया है। सबसे पहले चीन और इंडोनेशिया ने बोइंग 737 मैक्स 8 की उड़ानें बंद कीं। इसके बाद ब्रिटेन, फ्रांस, नार्वे, जर्मनी, आयरलैंड, आइसलैंड, सिंगापुर, आॅस्ट्रेलिया, मलेशिया, ओमान, ब्राजील, अर्जेंटीना, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया और वियतनाम ने भी इस विमान को उड़ाने से रोक दिया। शायद ही कोई महाद्वीप ऐसा बचा जिसके किसी न किसी देश ने बोइंग के इस विमान की उड़ान को बंद नहीं किया हो। हालांकि अमेरिका में बोइंग के ये विमान उड़ रहे हैं।

ताजा हादसे के बाद बोइंग 737 मैक्स 8 की उड़ानें बंद करने के पीछे सबसे बड़ा मकसद हवाई यात्रा सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। यात्री विमान बनाने वाली बोइंग दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है। लेकिन इथियोपिया हादसे के बाद तो इसकी छवि को गहरा धक्का लगा है। अरबों-खरबों का कारोबार करने वाली बोइंग को सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ है कि इन विमानों की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लग गया है। जिस तरह से कई विमानन कंपनियों ने इन विमानों की उड़ान बंद कर दी है, उससे साफ है कि बोइंग पर से भरोसा उठा है। ये कंपनियां अब कोई जोखिम नहीं ले सकतीं। माना जा रहा है कि ये दोनों ही हादसे विमान में किसी सॉफ्टवेयर की खराबी की वजह से हुए। उड़ान के दौरान विमान अचानक आगे की ओर झुक गया और दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसीलिए अमेरिका ने बोइंग से इस विमान के डिजाइन और सॉफ्टवेयर में तत्काल सुधार करने को कहा है।

जहां तक भारत का सवाल है, यहां विमान यात्रा कितना सुरक्षित है, यह किसी से छिपा नहीं है। उड़ान के दौरान इंजन खराब होने, रनवे पर टायर फटने, विमान के फिसल जाने, उतरते वक्त पहिए नहीं खुलने और इसी तरह की अन्य घटनाएं-समस्याएं आम हो गई हैं, जिनसे सैंकड़ों लोगों की जान जोखिम में पड़ जाती है। जाहिर है, ऐसे हादसे विमानों की तकनीकी गड़बड़ी से ही होते हैं। भारत में दो निजी विमानन कंपनियां स्पाइस जेट और जेट एअरवेज बोइंग 737 मैक्स 8 का संचालन कर रही हैं। स्पाइसजेट के पास बारह और जेट के पास पांच विमान हैं। पर इन दोनों ही कंपनियों ने बड़ी संख्या में बोइंग के इस विमान की खरीद का आॅर्डर दे रखा है। ऐसे में ये कंपनियां शायद चिंता में होंगी ही कि आखिर किस भरोसे के साथ बोइंग 737 मैक्स 8 खरीदा जाए। इन विमानों को किफायती श्रेणी का माना जाता है। अगर दूसरे देशों की तुलना में देखें तो भारत की विमानन कंपनियां और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) सुरक्षा के प्रति एक तरह से बेपरवाह ही कहे जाएंगे। चीन और इंडोनेशिया ने इथियोपिया हादसे के अगले दिन और यूरोपीय देशों ने मंगलवार को ही ये विमान बंद कर दिए थे जबकि भारत में यह फैसला काफी देर से हुआ। विमान यात्रियों की सुरक्षा विमानन कंपनियों की सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए।

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