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चौपाल: रमजान के बहाने

संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करना तो नेताओं की आदत बन चुका है। राजनीति की आड़ में देश की संवैधानिक संस्थाओं पर अविश्वास कर एक तरह से लोकतंत्र को तिरस्कृत किया जा रहा है।

Author Published on: March 13, 2019 3:57 AM
चुनाव के दौरान रमजान पर छिड़ी लड़ाई (फोटो सोर्स ; Indian express)

चुनाव आयोग ने देश में लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है पर कुछ राजनीतिक दलों ने रमजान के महीने का हवाला देकर चुनाव की तारीखों पर सियासी घमासान शुरू कर दिया है। यह ऐसा मुद्दा है जिसे उठाने की कोई तुक नहीं है और साफ है कि इसके बहाने राजनीतिक पार्टियां धर्म और समुदाय के नाम पर केवल वोट की राजनीति कर रही हैं। चुनाव आयोग एक निष्पक्ष संवैधानिक संस्था है और उसे किसी भी पार्टी से कोई मतलब नहीं होता। पर अब विपक्ष इस पर भी सवाल खड़े करने लगा है। कभी सुप्रीम कोर्ट, कभी सीबीआई तो कभी चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करना तो नेताओं की आदत बन चुका है। राजनीति की आड़ में देश की संवैधानिक संस्थाओं पर अविश्वास कर एक तरह से लोकतंत्र को तिरस्कृत किया जा रहा है।
’शुभम गुप्ता, धनबाद, झारखंड

जानलेवा प्रदूषण
वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या है जिसका निवारण अभी तक नहीं हो पाया है। इस प्रदूषण में जितना भाग कारखानों का है उतना ही गाड़ियों का भी है। इंटरनेशनल काउंसिल आॅन क्लीन ट्रांसपोर्ट (आईसीसीटी) ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि गाड़ियों के धुएं से लोगों की सांसें छिन रही हैं। इनके धुएं से पीएम 2.5 की मात्रा में बढ़ोतरी के साथ ही और ओजोन की परत पर बुरा असर पड़ा है। 2015 की रिपोर्ट में सबसे ज्यादा प्रदूषण वाले देशों में भारत दूसरे स्थान पर रहा और शहरों में दिल्ली का स्थान छठा रहा। छह दिसंबर को लैंसेट प्लेनेटरी हेल्थ में प्रकाशित एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में पाया गया कि 2017 में कम से कम 12.5 फीसद मौतें सांस संक्रमण, हृदय रोग, फेफड़ों के कैंसर और मधुमेह (जो कुछ प्रतिशत मामलों में गंभीर वायु प्रदूषण का परिणाम है) से हुई हैं।
’मौ वाजिद अली, अंबेडकर कॉलेज, दिल्ली

करनी का फल
पाकिस्तान के आतंकवाद को विश्व के सामने लाने के प्रयासों में भारत को अभूतपूर्व सफलता मिली है। भारत के अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को साधने का ही नतीजा रहा कि पाकिस्तान शेष विश्व से लगभग अलग-थलग पड़ गया है। इसी कूटनीति दबाव के चलते उसे भारत के एक पायलट को लगभग चौबीस घंटे में ही बिना शर्त रिहा करना पड़ा। सारा विश्व जानता है कि पाकिस्तान आतंकवाद का पोषक है और पिछले दो-तीन दशकों से वह इस्लामिक आतंकवाद का सिरमौर बना बैठा है। यह सही है कि अमेरिका ने ही अफगानिस्तान में सोवियत संघ की मौजूदगी के खिलाफ पाकिस्तान को आतंक की फैक्ट्री स्थापित करने में मदद की थी। जब उस फैक्ट्री से फल-फूल कर अनेक फैक्ट्रियां बन गर्इं और वे स्वयं अमेरिका के खिलाफ खड़ी हो गर्इं तब अमेरिका को अपनी भूल का अहसास हुआ। भारत पिछले चालीस वर्षों से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से पीड़ित है।

पुलवामा हमले के बाद पैदा हालात ने भारत को सहनशीलता का चोला उतार फेंकने पर मजबूर कर दिया और भारतीय वायु सेना ने बालाकोट में कार्रवाई कर पाकिस्तान को उसकी करनी का फल चखा दिया। कंधार कांड या मुंबई हमले के बाद भी अगर ऐसी कार्रवाई हो गई होती तो भारत को शायद आतंकवाद के इतने दंश न झेलने पड़ते। हालांकि अभी ऐसा कुछ नहीं हुआ है जिससे पाकिस्तान-पोषित आतंकवाद पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी, लेकिन भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध जो आक्रामक नीति अपनाई है, उसे नए युग की शुरुआत समझा जाना चाहिए और इसके सुखद परिणाम अवश्य आएंगे।
’सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी, नई दिल्ली

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