COVID-19 से लड़ाईः BJP शासित राज्यों में भी अच्छे नहीं हालात

भाजपा नेता भले ही विपक्ष शासित राज्यों को कोसते रहें, आंकड़े भाजपा शासित प्रदेशों के भी बहुत अच्छे नहीं

kanpur, coronavirusकानपुर: कोरोना वायरस के मामलों में जारी उछाल के बीच, बाजार में भीड़ कम नहीं हो रही है। (PTI Photo)

केंद्र सरकार को कोविड-19 की मौजूदा स्थिति के लिए भले ही सिर्फ विपक्ष शासित राज्य ही दोषी नज़र मगर हालात भाजपा शासित राज्यों में भी बहुत खराब हैं। इतने कि गुजरात हाइकोर्ट को इस पर स्‍वत: संज्ञान लेकर सुनवाई के लिए बाध्य होना पड़ा। लखनऊ के डीएम का वह कथन भी बहुत गंभीर है कि लोग सड़क पर मर रहे हैं। इसी तरह भोपाल और इंदौर की रिपोर्ट्स भी स्थिति की भयावहता को बताती हैं।

मध्य प्रदेश में अस्पतालों की हालत अच्छी नहीं है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ऐसा स्वीकार भले न करें लेकिन सोमवार को आए उनके ट्वीट्स देखने-समझने लायक हैं। उधऱ, उत्तराखंड में कोविड से लड़ाई एक अलग ही लेवल पर जा पहुंची है। वहां, हरिद्वार में कुंभ चल रहा है, जिसके कारण हर की पैड़ी पर गंगा नहाने वालों का हुजूम उमड़ रहा है। दो गज की दूरी तो छोड़िए, शरीर से शरीर टकरा रहे हैं। हरिद्वार के आइजी संजय गुंज्याल को सोमवार की दोपहर यह सत्य ट्वीट करना पड़ा, “शाही स्नान के बीच घाटों पर सामाजिक दूरियों को लागू करवाने में हमें कठिनाइयों का सामना करना पढ़ रहा है।”

इंडियन एक्सप्रेस में अमिताभ सिन्हा ने अपनी रिपोर्ट में स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन के बयान को उठाया है। मंत्री ने कहा था कि गैर-भाजपा शासित राज्य, खासतौर पर महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ कोविड-19 का सियासी इस्तेमाल कर रहे हैं। आरोप लगाया कि इन राज्यों मो रोग की रोकथाम के लिए कुछ खास नहीं किया।

विपक्ष शासित राज्य महाराष्ट्र, केरल, दिल्ली और छत्तीसढ़ संक्रमण के लिहाज से आगे हैं लेकिन दूसरा सच यह भी है कि सुकून की सांस लेने की स्थिति में कोई भी राज्य नहीं है। कर्नाटक को ही ले लें, कुल संक्रमण के नाते यह राज्य तीसरे नम्बर पर है। पहले दो स्थानों पर महाराष्ट्र और तमिलनाडु हैं। याद दिलाने की ज़रूरत नहीं कि तमिलनाडु में सत्ताधारी दल एआइडीएमके भाजपा की सहयोगी दल है।

कर्नाटक और उसके साथ उत्तर प्रदेश इस बीच संक्रमण के नए मामलों में देश के टॉप-5 में आ गए हैं। एक अन्य भाजपा शासित राज्य गोवा प्रति दस लाख में मौतों के मामले में महाराष्ट्र से भी आगे है। ऐसी ही रिपोर्ट लद्दाख की है। जहां तक मृत्यु दर की बात है तो हिमाचल की पोजीशन केरल से बदतर है।

हर्षवर्धन ने छत्तीसगढ़ को यह कहकर खूब कोसा कि वहां जांच का ज्यादातर काम रैपिड एंटीजन टेस्ट के जरिए हुआ और इसीलिए पिछले दिनों वहां बड़ी संख्या में मौतें हुईँ। लेकिन, सत्य यह भी है कि उत्तर प्रदेश और बिहार में भी टेस्टिंग की इस टेक्नीक का अधिकांश उपयोग किया गया। टेस्टिंग की बेहतर टेक्नीक यानी आरटी-पीसीआर का इस्तेमाल करने में महाराष्ट्र और तमिलनाडु आगे रहे। वहां इस टेक्नीक का 80 फीसदी इस्तेमाल हुआ, जबकि भाजपा शासित यूपी और बिहार में सिर्फ 50 फीसदी।

स्वास्थ्य मंत्री ने कोवैक्सीन से इनकार करने के लिए भी छत्तीसगढ़ को कोसा। लेकिन, ऐसा करने वाला यह इकलौता राज्य नहीं। छोटे-छोटे 14 राज्यों ने इसके इस्तेमाल से इनकार कर दिया था। इनमें भाजपा शासित गोवा भी है। गोवा में संक्रमण और मृत्युदर अपेक्षाकृत रूप से ज्यादा है।

इस सिलसिले में एक अन्य अखबार ने लिखा है कि जब से कोविड-19 का संक्रमण फैला है, तब से लेकर सारे फैसले राज्य सरकारों ने नहीं, केंद्र सरकार ने ही लिए। कब लॉकडाउन लगना है, कब और कितना हटना है—यह सब राज्यों ने नहीं तय किया। सो, आज यदि हालात अच्छे नहीं हैं तो इनके लिए केंद्र खुद को किस तरह त्रुटिहीन कह सकता है।

Next Stories
1 कविता प्रकृति है, प्रकृति दुनिया है और दुनिया एक कविता
2 महाराणा प्रताप से लेकर राणा सांगा तक, पढ़ें- राजस्थानी-साहित्य और युद्ध-कौशल से जुड़े चर्चित किस्से
3 होली के रंग – अर्थ की खिड़की
ये पढ़ा क्या?
X