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AgustaWestland Deal: मोदी सरकार के लिए तीन सवाल

भ्रष्टाचार का आरोप और सीबीआई में जांच चलने के बावजूद बीजेपी सरकार ने अगस्ता को सरकारी ठेके पाने के लिए पीछे के दरवाजे से प्रवेश दे दिया। भारत में रक्षा के क्षेत्र में निवेश करने के लिए एफआईपीबी से मंजूरी भी प्राप्त कर ली।

Author नई दिल्ली | May 11, 2016 11:45 am
अगस्तावेस्टलैंड चॉपर। तस्वीर का इस्तेमाल प्रतिकात्मक तौर पर।

रणदीप सिंह सुरजेवाला

अगस्ता वेस्टलैंड मुद्दे पर काफी कुछ कहा जा चुका है, लेकिन सुना बहुत कम गया है। बीजेपी सरकार चिल्ला-चिल्ला कर देश को अपनी बात पर सहमत कराना चाहती है। इसलिए यह बेहद जरूरी हो गया है कि लोगों के सामने सही तथ्य रखे जाएं। पहले ही किसी निष्कर्ष पर पहुंच चुके बीजेपी के भक्तों से अलग, लोगों को स्वयं इस मसले पर अपनी राय बनानी चाहिए। हम ये मानते हैं कि इस मसले पर तीन सवाल हैं जिनके जवाब बीजेपी सरकार को देने चाहिए।

पहला प्रश्न, यूपीए सरकार द्वारा अगस्ता वेस्टलैंड मामले में लिए गए एक्‍शन की अनदेखी क्‍यों की जा रही है?

अगस्ता के खिलाफ कार्रवाई अप्रैल 2012 में ही शुरू हो गई थी। यूपीए सरकार ने इस पूरे मामले को सीबीआई, (फरवरी 2013), ईडी (जुलाई 2012) और आयकर विभाग (जनवरी 2013) के हवाले कर दिया था। जुलाई 2012 में नेपल्‍स प्रशासन को भी सबूत जुटाने के लिए पत्र लिखा गया था। इन जांचों में सामने आए तथ्य को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने 1 जनवरी 2014 को यह सौदा रद्द कर दिया था। इसके बाद जब यूपीए सरकार ने इस मसले को जेपीसी में भेजना चाहा, तो बीजेपी ने इसका विरोध किया। बीजेपी की मांग थी कि इस मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच होनी चाहिए। इसके अलावा हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि सरकारी खजाने को नुकसान न पहुंचे, इसलिए यूपीए सरकार ने 1,586.66 करोड़ रुपए की चुकाई गई रकम के एवज में अगस्ता वेस्टलैंड द्वारा जमा की गई बैंक गांरटी भुना कर 2,068 करोड़ रुपए और तीन हेलिकॉप्‍टर वसूल लिए थे। इस तरह यूपीए ने सरकार को एक पैसे का भी नुकसान नहीं होने दिया था। इन बातों की अनदेखी कर अब बीजेपी इतालवी कोर्ट के फैसले को गलत तरीके से कोट करके झूठ फैला रही है। वह भी कोर्ट के फैसले की कॉपी संसद में रखे बिना। भाजपा को यह भी साफ करना चाहिए कि उसने दो साल तक इतालवी कोर्ट को जरूरी दस्‍तावेज क्‍यों नहीं मुहैया कराए?
दूसरा प्रश्न यह है कि क्या बीजेपी हमें यह बताएगी अपनी सरकार के पहले साल में अगस्ता वेस्टलैंड को बचाने के लिए उसने क्या-क्या उपाय किए थे?

अगस्ता को बैन करने की शुरुआत यूपीए सरकार के शासन में फरवरी 2014 में शुरू हुई थी। तत्कालीन रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने 12 मई 2014 को इस आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। लेकिन बीजेपी सरकार आने के बाद इस निर्णय को 3जुलाई, 2014 तक रोक लिया गया। 2 अगस्त 2014 को भ्रष्टाचार का आरोप और सीबीआई में जांच चलने के बावजूद सरकार ने अगस्ता को सरकारी ठेके पाने के लिए पीछे के दरवाजे से प्रवेश दे दिया। इसके बाद अगस्ता ने पीएम मोदी के कार्यक्रम मेक इन इंडिया में भी भाग लिया और भारत में रक्षा के क्षेत्र में निवेश करने के लिए एफआईपीबी से मंजूरी भी प्राप्त कर ली।

तीसरा प्रश्न यह है कि क्या वाजपेयी सरकार ने जो मानदंड कायम किए थे, उन्‍हें कमजोर कर दिया गया?

नवंबर 2003 में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दफ्तर की ओर से हेलिकॉप्‍टर की उड़ान की अधिकतम सीमा 4500 मीटर तय करने का प्रस्‍ताव आया था, जबकि इससे पहले यह सीमा 6,000 मीटर प्रस्‍तावित थी। वर्तमान सरकार भी उसी मापदंड का पालन कर रही है। यूपीए सरकार ने जिस मापदंड का पाालन किया वह भाजपा सरकार द्वारा तय किया गया था। इसमें यह भी शामिल था कि हेलिकॉप्‍टर का फील्‍ड ट्रायल विदेश में किया जाए। जब दोनों ही बातें भाजपा के ही पूर्ववर्ती लोगों द्वारा लिखी गई हैं तो क्‍या वे कह सकते हैं कि मानदंडों को कमजोर किया गया? अगर ऐसा है तो बीजेपी को अपने ही नेतृत्‍व को कठघरे में खड़ा करना चाहिए।

शुरूआती तथ्य बताते थे कि क्राइम हुआ है। इसलिए यूपीए सरकार ने भ्रष्‍टाचार का केस दायर कराया, सीबीआई जांच का आदेश दिया, कंपनी के सौदे को रद्द किया, कंपनी की बैंक गारंटी जब्त की। जबकि बीजेपी बता रही है कि यूपीए सरकार ने कांग्रेस नेताओं को बचाने के लिए क्राइम पर पर्दा डाला। अगर बीजेपी इस केस में दोषी को पकड़ना चाहती हैं, जैसा कि हम चाहते हैं तो एक समय सीमा तय कर जांच पूरी करने के आदेश क्यों नहीं देती? इस बात का कोई जवाब नहीं है कि सीबीआई और ईडी पिछले दो साल में वर्तमान सरकार के नेतृत्व में कुछ कर क्यों नहीं पाई?

(लेखक रणदीप सिंह सुरजेवाला ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के कम्‍युनिकेशन इनचार्ज हैं)

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