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समय यात्रा की ओर एक ऊंची छलांग

हम अनादिकाल से ब्रह्माण्ड को समझने का प्रयास करते रहे हैं। आधुनिक विज्ञान का प्रयास यह जानने का है कि उस पर हमारा कितना नियंत्रण है।

समय यात्रा की ओर एक ऊंची छलांग
लेखक के मुताबिक वास्तविक जीवन में समय एक भौतिक अवधारणा नहीं है। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस फाइल)

डॉ. वीर सिंह

समय क्या है? यह प्रश्न बहुत जटिल है, और इसका उत्तर देना असंभव-सा हो सकता है। समय का अस्तित्व नहीं भी हो सकता, अथवा समय एक भ्रम या एक अवधारणा भी हो सकता है, जिसका उपयोग हम अपने आस-पास की दुनिया को समझने के लिए करते हैं। समय है, या समय नहीं है, अथवा यह एक कोरी अवधारणा है, ऐसे प्रश्न हमारे तर्कों-कुतर्कों में फंसे रह सकते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों ने एक कण को समय की उलटी यात्रा पर भेजने में सफलता पा ली है।

हम अनादिकाल से ब्रह्माण्ड को समझने का प्रयास करते रहे हैं। आधुनिक विज्ञान का प्रयास यह जानने का है कि उस पर हमारा कितना नियंत्रण है। प्रत्येक नया आविष्कार भौतिकी के उन नियमों की अवहेलना करता है जिन पर अब तक हमारा विश्वास था। अगर हमने अब तक समय के किसी तीर का अनुभव किया है, एक नया आविष्कार उस पर प्रश्नचिन्ह लगा सकता है। वैज्ञानिकों ने अभी सिद्ध किया है कि सैद्धांतिक रूप से समय यात्रा संभव है।

अभी तक हमने देखा है कि समय यात्रा विज्ञान कथा की एक अवधारणा के अतिरिक्त कुछ नहीं थी, जिसका उद्देश्य रहा है हमारी कल्पना शक्ति को सक्रिय करना और हमारा मनोरंजन करना। समय यात्रा का विचार 1800 के दशक का है जब वेल्स ने “द टाइम मशीन” प्रकाशित की। यह एक अविष्कारक की कहानी है जो एक चौथे, अस्थाई आयाम के माध्यम से यात्रा करने वाले उपकरण का निर्माण करता है। किसी अन्वेषण के रास्ते प्रश्नों से खुलते हैं। प्रश्न है कि क्या होगा यदि समय यात्रा केवल कल्पना की दुनिया तक ही सीमित न हो? यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर वैज्ञानिक किसी ऐसी घटना का पटाक्षेप करने के प्रयास के जोखिम पर देने का प्रयास करते हैं जो जो हमारी प्रजाति के लिए नहीं है।

वास्तविक जीवन में समय एक भौतिक अवधारणा नहीं है। इतिहास रचने वाले कुछ वैज्ञानिकों की रचनात्मकता के कारण हमने ब्रह्माण्ड और समय के निर्माण के बारे में अपने ज्ञान के बारे में काफी प्रगति की है। उदाहरण के लिए, आइंस्टीन के समीकरणों ने हमे क्वांटम क्षेत्र और समय के बारे में एक गहरा दृष्टिकोण दिया। परन्तु तर्कशास्त्री कर्ट गोडेल ने इसे एक कदम आगे बढ़ाया और यह पता लगाया कि आइंस्टीन के समीकरणों ने अतीत में समय यात्रा प्रशस्त की थी। समस्या यह थी कि अभी भी कोई ऐसा तरीका नहीं था जो हमारे भौतिक आधारों के अनुकूल हो। इसके उत्तर के हल के लिए आतुर आर्गन नेशनल लेबोरेटरी, मास्को इंस्टिट्यूट ऑफ़ फिजिक्स एंड टेक्नोलॉजी तथा ईटीएच ज्यूरिख के वैज्ञानिकों को प्रेरित किया। इस तरह उन्होंने सफलतापूर्वक एक कण को समय पर वापस भेजा।

भौतिकी के ऐसे नियम हैं जो भविष्य को अतीत से अलग नहीं करते हैं

सामान्यतः गुरुत्वाकर्षण और भौतिकी के नियमों के कारण, जिन्हें स्कूलों में पढ़ाया जाता है, हम समय को रैखिक मानते हैं, जहा अतीत में पहुँचने का कोई रास्ता नहीं है और भविष्य में तेजी से आगे बढ़ने की कोई तकनीक नहीं है। यद्यपि यह सदैव सहमत होने वाला कथन नहीं है। भौतिकी के ऐसे नियम हैं जो भविष्य को अतीत से अलग नहीं करते हैं और कहते हैं कि वे सभी एक ही समय में काम करते हैं। कोई अतीत, वर्तमान या भविष्य नहीं।

यह ऊष्मप्रवैगिकी के दूसरे नियम के विपरीत जाता है, जिसमे कहा गया है कि एक बंद प्रणाली सदैव क्रम से अवस्था की ओर बढ़ती है। उदाहरण के रूप में हम कह सकते हैं कि एक बार गेहूं को पीस कर आटा बना लें तो फिर आटे को गेहूं में वापस नहीं लाया जा सकता। ऊष्मप्रवैगिकी के उस दूसरे नियम के कारण, हमने माना कि समय रैखिक था, और एक ही दिशा में समय निरंतर आगे बढ़ रहा था। हमने इसे समय का तीर कहा। हमने मान लिया था कि प्रतंच्या से छोड़े तीर की तरह समय एक ही दिशा में चलता है, और हम समय के रूप में प्रभाव देखते हैं। इसलिए समय को आगे बढ़ने के रूप में समझने की हमारी मानव-निर्मित प्रणाली काम करती है। लेकिन कुछ नियम तोड़े जाने के लिए होते हैं। क्या यह उनमे से एक हो सकता है?

क्वांटम कंप्यूटर उस कंप्यूटर की तरह काम नहीं करते जिस पर हम सामान्यतः काम करते हैं

हमने ऊष्मप्रवैगिकी के दूसरे नियम में स्वयं को फंसा लिया। जिस तरह से हमने दुनिया का अनुभव किया, उससे यह समझ में आया; यद्यपि, इसने हमारे सभी प्रश्नो का उत्तर नहीं दिया। इसलिए वैज्ञानिकों की दूसरी टीम यह देखना चाहती थी कि क्या क्वांटम सीमा में दूसरा नियम तोड़ा जा सकता है। ज्ञातव्य है कि क्वांटम कंप्यूटर उस कंप्यूटर की तरह काम नहीं करते जिस पर हम सामान्यतः काम करते हैं। जबकि पारंपरिक कंप्यूटर 1 या 0 की बाइनरी प्रणाली के साथ काम करते हैं, एक क्वांटम कंप्यूटर सूचना की एक बुनियादी इकाई का उपयोग करता है जिसे क्वेट कहा जाता है, जहां 1 और 0 दोनों एक साथ मौजूद होते हैं। यह सूचनाओं को बहुत तेजी से संसाधित करने में मदद करता है। अपने प्रयोग में, शोधकर्ताओं ने कणों के लिए कुबिट्स को प्रतिस्थापित किया।

पहले चरण में यह सुनिश्चित करना सम्मिलित है कि कुबिट्स का आदेश दिया गया था, ताकि जो कुछ भी होता है, वह अन्य सभी को भी प्रभावित करे। दूसरे, उन्होंने कंप्यूटर पर एक कार्यक्रम प्रारम्भ किया, जिसने उस प्रारंभिक क्रम को अधिक जटिल स्थिति में तोड़ने के लिए माइक्रोवेव रेडियो पल्स का उपयोग किया। तीसरा चरण व्यवस्थित रूप से स्वयं को रिवाइंड करते हुए कणों को उनके अतीत में ले जाता है। अध्ययन के लेखक वेलेरी एम. विनोकुर के अनुसार, सरल शब्दों में, यह एक तालाब की लहरों को उनके स्रोत पर वापस लाने के लिए जोर देने के बराबर है।

क्वांटम यांत्रिकी संभाव्यता के बारे में है; इसमें कुछ भी गारंटी नहीं। फिर भी एल्गोरिथ्म 85 प्रतिशत छलांग लगाने में सफल रहा। यह काफी प्रशंसनीय प्रयोग है। यद्यपि हर बार जब उन्होंने कुबिट्स की संख्या को बढ़ाकर तीन करने का प्रयास किया, तो सफलता की दर गिरकर 50 प्रतिशत हो गई। शोधकर्ताओं ने अपने परिणामों को साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित किया। दुर्भाग्य से विज्ञान में इस ऊँची छलांग के बावजूद भी हम अभी टाइम मशीन में नहीं कूद सकते। यह प्रयोग हमे दिखता है कि एक कण को समय पर वापस भेजना संभव है, लेकिन इसमें अविश्वनीय मात्रा में काम और बाहरी हेरफेर होता है। यह देखते हुए कि मनुष्यों के पास लगभग 7,000,000,000,000,000,000,000 (7 ओक्टीलियन) परमाणु कण हैं, इस शोध के साथ अभी भी आगे बढ़ने की बहुत सम्भावना है।

एक कण समय में उलट यात्रा में सफलतापूर्वक ली जाने के उपरांत भी अभी यह थ्योरी अपरिपक्व है। क्या हम इसे उस बिंदु पर ले जाएंगे जहाँ हम समय यात्रा कर सकते हैं? यह संभव है, पर हमारे जीवनकाल में नहीं।

(लेखक जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में एमेरिटस प्रोफेसर, पर्यावरण विज्ञान हैं)

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First published on: 06-10-2022 at 10:08:00 pm