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Blog: युद्ध की मांग के बीच इन दो विकल्‍पों में से किसे चुनेंगे पीएम नरेंद्र मोदी?

युद्ध सबसे आखिरी विकल्‍प होना चाहिए क्‍योंकि जंग के नतीजे व्‍यापक और दूरगामी होते हैं।

Author नई दिल्ली | September 20, 2016 5:02 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह। (Source: PTI)

उरी हमले के बाद नरेंद्र मोदी सरकार के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ, सरकार को सेना के ब्रिगेड कैंप पर हुए हमले पर पलटवार करना है। दूसरी तरफ, आतंकवाद पर कोई ठोस कार्रवाई न होने की वजह से भड़के देशवासियों के गुस्‍से को भी शांत कराना है। देश का एक बड़ा तबका पाकिस्‍तान के खिलाफ युद्ध छेड़ने की मांग कर रहा है, मगर केन्‍द्र सरकार समेत सेना भी तत्‍काल ऐसी किसी स्थिति के पक्ष में नहीं है। उरी हमले के बाद नरेंद्र मोदी सरकार सभी मौजूद विकल्‍पों पर गौर कर रही है, लेकिन भाजपा के भीतर से ही पाकिस्‍तान को करारा जवाब दिए जाने की मांग से सरकार असहज स्थिति में है। मोदी सरकार की मंशा अंतर्राष्‍ट्रीय मंच पर पाकिस्‍तान को अलग-थलग करने के बाद ठोस कार्रवाई करने की है, लेकिन पार्टी और सोशल मीडिया पर तत्‍काल कुछ किए जाने की मांग ने सरकार की दुविधा बढ़ा दी है।

मीडिया में रविवार को खबर आई कि प्रधानमंत्री उरी हमले के बाद बेहद गुस्‍से में थे। भाजपा के कई सांसदों व पदाधिकारियों ने उरी हमले के बाद बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की है। जाहिर है, इससे सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। उरी हमले के बाद, जहां आरएसएस के राम माधव ने फेसबुक‍ पर लिखा कि ‘अब एक दांत के बदले पूरा जबड़ा उखाड़ने’ का वक्‍त आ गया है। वहीं भाजपा सरकार में विदेश राज्‍य मंत्री व पूर्व थलसेनाध्‍यक्ष जनरल वीके सिंह ने पाकिस्‍तान को ‘उसी की भाषा में जवाब देने’ की बात कही। बीजेपी सांसद तरुण विजय ने पाकिस्‍तान पर कार्रवाई के लिए ललकारते हुए कविता लिखी है। रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने कहा कि ”बड़ा सवाल ये भी उठ रहा है कि क्‍या सरकार आतंकियों के खिलाफ वैसी ही कार्रवाई करेगी जैसी म्‍यांमार सीमा में घुसकर की थी। पूरा देश इस समय एक ही बात कह रहा है। ये वक्त कड़ा जवाब देने का का है।” बीजेपी सांसद आरके सिंह भी कहते हैं कि भारत को पाकिस्‍तान के आतंकी कैंपों में घुसकर हमले करने चाहिए। जम्‍मू-कश्‍मीर के उप-मुख्‍यमंत्री निर्मल सिंह ने कहा कि ”यह छद्म युद्ध है। एक देश, जो पाकिस्तान है, इस बात में जुटा है कि जम्मू एवं कश्मीर में कैसे शांति भंग की जाए।” सरकार के भीतर से ऐसी आवाजें उठने का मतलब साफ है कि पार्टी के भीतर के लोग सरकार द्वारा कुछ ठोस कार्रवाई चाहते हैं, न कि ‘कड़ी निंदा’ वाला कोई बयान।

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हालांकि उरी हमले के बाद किसी तरह की सैन्‍य प्रतिक्रिया देने से सरकार अभी परहेज कर रही है। हमले के बाद सैन्‍य व सुरक्षा अधिकारियों के साथ हुई बैठक में भी तत्‍काल किसी तरह के प्रतिकार से बचने पर सहमति बनती नजर आ रही है। उच्‍चस्‍तरीय बैठक में सेना की तरफ से सरकार को यही सलाह दी गई कि तत्‍काल किसी तरह की सैन्‍य कार्रवाई से बचा जाए। बैठक में यह तय हुआ कि पाकिस्‍तान को इस हमले का जवाब जरूर दिया जाएगा, मगर थोड़े समय के बाद ताकि अंतर्राष्‍ट्रीय मंच पर भारत को अपना केस मजबूत करने का मौका मिल सके। उरी हमले के बाद दुनिया का समर्थन भारत के साथ है, ऐसे में सरकार किसी भी ऐसी कार्रवाई से बच रही है जो वैश्विक स्‍तर पर उसकी कू‍टनीति पर सवाल खड़े करे। सरकार ने पाकिस्‍तान को कूटनीतिक स्‍तर पर अलग-थलग करने का मन बनाया है। सेना से भी कह दिया गया है कि वह इस हमले का जवाब देने का समय और तरीका खुद चुने।

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पाकिस्‍तान की धरती पर पल रहे आतंकवाद को नेस्‍तनाबूद किया जाना बेहद जरूरी है। मगर सरकार को इसके लिए ठंडे दिमाग से सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद फैसला करना होगा। युद्ध सबसे आखिरी विकल्‍प होना चाहिए क्‍योंकि जंग के नतीजे व्‍यापक और दूरगामी होते हैं। आजादी हासिल करने के 70 सालों के भीतर तीन बड़े युद्धों से नुकसान हमें भी पहुंचा है, इस तथ्‍य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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