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दिल्‍लीवालों के पैसों से पंजाब में सरकार बनाने के लिए वोट जुटा रहे अरविंद केजरीवाल

सादगी और कम चुनावी खर्चों के वादे के साथ सत्ता में आई आम आदमी पार्टी अखबारों, टीवी, रेडियो और अन्‍य जरियों से विज्ञापन देने में किसी भी अन्‍य पार्टी से कम नहीं है।

Author June 10, 2016 2:05 PM
दिल्ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ओर उपमुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया। (Photo: PTI)

दिल्‍ली में सत्‍ता में बैठी आम आदमी पार्टी ने शुक्रवार को अखबारों में पंजाबी भाषा को लेकर सरकार की ओर से किए गए कार्यों के बारे में विज्ञापन दिया। पूरे पन्‍ने का यह विज्ञापन लगभग सभी हिंदी और अंग्रेजी अखबारों में दिया गया। इस विज्ञापन का शीर्षक है, ‘पंजाबी भाषा को बढ़ावा देने के लिए दिल्‍ली सरकार के अहम फैसले।’ इसके बाद लिखा है, ‘अब हर सरकारी स्‍कूल में कम से कम एक पंजाबी शिक्षक जरूर होगा। पंजाबी शिक्षकों का वेतन बढ़ाया।’ विज्ञापन देने के लिए मशहूर हो चुकी आप सरकार का यह विज्ञापन राजनीतिक रूप से काफी महत्‍व रखता है।

अगले साल पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं। आप को वहां से काफी उम्‍मीदें हैं। 2014 के लोकसभा चुनावों में उसे पंजाब में अप्रत्‍याशित रूप से चार सीटों पर जीत मिली थी। इसके बाद से आप ने पंजाब को गंभीरता से लेना शुरू किया। पंजाब में अकाली दल-भाजपा गठबंधन की सरकार एंटी इंकमबेंसी का सामना कर रही है। कांग्रेस अंदरूनी मतभेदों से जूझ रही है। इसके चलते आप वहां पर मजबूत दावेदार बनकर उभरी है। यहीं वजह रही है अरविंद केजरीवाल वहां पर कई रैलियां कर चुके हैं। हरियाणा और पंजाब के बीच सतलुज-यमुना लिंक नहर के मुद्दे पर भी केजरीवाल का बयान आया था और उन्‍होंने पंजाब की तरफदारी की थी। जबकि दिल्‍ली को मुनक नहर के जरिए हरियाणा से पानी मिलता है। दिल्ली सरकार का पंजाबी भाषा को लेकर दिया गया विज्ञापन इसी कड़ी में उठाया गया कदम है।

दिल्‍ली में सिखों की आबादी कुल जनसंख्‍या की 4 प्रतिशत के लगभग है। साथ ही दिल्ली पंजाब से सटा हुआ भी है। पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों में भी आप को सिखों के वोट बड़ी संख्‍या में मिले थे। सीएसडीएस की रिपोर्ट के अनुसार 2015 विधानसभा चुनाव में आप को 57 प्रतिशत सिख वोट मिले थे। दिल्‍ली में सिख बहुल तिलक नगर, हरि नगर, राजौरी गार्डन, शाहदरा और कालकाजी सीटें जीती थीं। इस लिहाज से आप का पंजाबी भाषा को लेकर विज्ञापन पूरी तरह से पंजाब के लक्ष्‍य पर आधारित है। ‘उड़ता पंजाब’ फिल्‍म को लेकर चल रहे विवाद में भी अरविंद केजरीवाल बढ़-चढ़कर फिल्‍म के समर्थन में है। वे फिल्‍म को सेंसर सर्टिफिकेट न मिलने के लिए सीधे अकाली दल और भाजपा पर हमला बोल रहे हैं।

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सादगी और कम चुनावी खर्चों के वादे के साथ सत्ता में आई आम आदमी पार्टी अखबारों, टीवी, रेडियो और अन्‍य जरियों से विज्ञापन देने में किसी भी अन्‍य पार्टी से कम नहीं है। उसने दिल्ली में एक साल पूरा होने के मौके पर कई एड दिए थे। साथ ही में पिछले दिनों उसने लगातार देशभर के कर्इ राज्‍यों में दो-तीन पन्‍नों के विज्ञापन दिए। इसके चलते उसे खासी आलोचना झेलनी पड़ी। विपक्ष का आरोप है कि जनता के पैसों को केजरीवाल विज्ञापनों पर बहा रहे हैं। केजरीवाल सरकार ने साल 2015-16 में विज्ञापनों के लिए 526 करोड़ रुपये का बजट रखा था। आप का कहना था कि इस पैसे के जरिए वह जनता को जानकारी मुहैया कराएगी। यह अलग बात है कि जब किसी अन्‍य पार्टी का विज्ञापन आता है तो आप उस पर जनता के पैसों को विज्ञापनों में उड़ाने का आरोप लगाती है।

आप का पंजाबी भाषा को लेकर दिया गया विज्ञापन में अपने आप में उसके खुद के विचारों के विपरीत है। आम आदमी पार्टी का दावा था कि वह आम जनता के लिए राजनीति है। वह जाति, समुदाय या पंथ के नाम पर वोट नहीं मांगती। लेकिन पंजाबी भाषा को लेकर वोट मांगना तो इन दावों से उलट है। सीधी सी बात है कि केजरीवाल सरकार इस विज्ञापन के जरिए सिखों में पहुंच बनाना चाहती है और परोक्ष रूप से पंजाब में मजबूत होना चाहती है। दिल्‍ली सरकार ने जो विज्ञापन में लिखा है वह इतना बड़ा काम भी नहीं है कि जिसका बखान किया जाए। यह सामान्‍य सा कदम है लेकिन जिस तरह से आप ने इसका प्रचार किया है वह अपने आप में असामान्‍य है।

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