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बेबाक बोल

बेबाक बोल: दर्द की दवा क्या…

औपनिवेशिक शासन के अंत ने भारत को विभाजन जैसे नासूर के साथ कश्मीर जैसी लाइलाज बीमारी भी दे दी। राजे-रजवाड़ों को आजाद हिंदुस्तान की...

बेबाक बोल : आगे 2019 है…

जंतर मंतर और रामलीला मैदान से एनजीओ, आइआइटी, हाई प्रोफाइल समाज सेवकों के डिजाइनर आंदोलन से आम आदमी पार्टी का ब्रांड निकला था। शहर...

बेबाक बोल : फुटबॉल का ‘खेल’

इंग्लैंड की फुटबॉल टीम के स्वीडिश मूल के मैनेजर स्वेन गोरान एरिक्सन ने कहा था, ‘फुटबॉल में राजनीति से ज्यादा राजनीति है’। आज जब...

बेबाक बोल : मिसाल

मजहब की दीवार लांघ एक लड़की और लड़का प्रेम करते हैं। इस प्रेम और शादी की मांग के खिलाफ लड़के की हत्या कर दी...

बेबाक बोल : कठिन राह

केंद्र की राजग सरकार ने चुनाव सुधारों के तहत लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ करवाने के लिए कदम उठाने की इच्छा जाहिर की...

बेबाक बोल : खबर जिंदा है

14 मई 2018 को टॉम वुल्फ ने दुनिया को अलविदा कहा। 88 पार की उम्र में अपने खास तरह के फैशन के लिए मशहूर...

बेबाक बोल : कर्नाटक की बोध कथा

‘अब तो ईगलटन रिसॉर्ट के मालिक का भी कहना है कि मैं सरकार बनाऊंगा मेरे पास 117 सदस्यों का बहुमत है’। कर्नाटक में येदियुरप्पा...

बेबाक बोल: तारीखी तस्वीर

आमार शोनार बांग्ला, आमि तोमाए भालोबाशी (मेरा सोने जैसा बंगाल, मैं तुमसे प्यार करता हूं)। रवींद्रनाथ टैगोर ने 1905 में यह गीत लिखा था...

राजकाजः बेबाक बोल – बनते देखा है..

इस सिरे से उस सिरे तक सब शरीके-जुर्म हैं/आदमी या तो जमानत पर रिहा है या फरार...। जब बात अतिक्रमण की आती है तो...

राजकाजः बेबाक बोल – आदम सोच

दो साध्वियों और एक बच्ची की अथक जंग के बाद राम-रहीम और आसाराम बलात्कार के जुर्म में सलाखों के पीछे होते हैं। सत्ता और...

बारादरी: कांग्रेस के भगवा आतंकवाद के कुप्रचार का लाभ मिला पाकिस्तान को

विश्व हिंदू परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष आलोक कुमार का कहना है कि राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनाने का आंदोलन अपनी परिणति तक पहुंच...

बेबाक बोल: राजकाज – शर्मसार

निर्भया के पहले भी हिंसा के ऐसे क्रूरतम मामले हुए थे और बाद भी। 2012 में दिल्ली की सड़क पर हुई बर्बरता ने पूरे...

बेबाक बोलः बिसरि गयो हरि नाम

धर्म और उसका संदेश समाज के पक्ष में सकारात्मक तरीके से लिया जाए तो उसके अनुयायी बड़ी ताकत को झुका सकते हैं। विश्नोई समुदाय...

बेबाक बोलः राजकाज- कहते हैं कि…

अब अपना इख्तियार है चाहे जहां चलें/रहबर से अपनी राह जुदा कर चुके हैं हम...। देवी प्रसाद त्रिपाठी ने राज्यसभा में लोकतंत्र के अभिभावक...

बेबाक बोलः राजकाज- केदरानाथ

‘किसी को प्यार करना/तो चाहे चले जाना सात समुंदर पार/पर भूलना मत/कि तुम्हारी देह ने एक देह का/नमक खाया है...’। केदारनाथ सिंह भावनाओं को...

बेबाक बोलः राजकाज- साडा हक

मेरी हड्डियां/मेरी देह में छिपी बिजलियां हैं/मेरी देह/मेरे रक्त में खिला हुआ कमल...। कवि केदारनाथ सिंह की इन पंक्तियों के साथ हमने उन किसानों...

बेबाक बोलः राजकाज- राग दरबारी 2

श्रीलाल शुक्ल की रचना ‘राग दरबारी’ ने पचास साल पूरे कर लिए हैं। इसके लिखे जाने के समय ही पाठकों ने महसूस किया कि...

बेबाक बोलः राजकाज- दुराग्रहों का द्वंद्व

दिल्ली के शासन में आम आदमी पार्टी शानदार जीत के बाद ऐसी मजबूत विधायिका बन कर आई जहां विपक्ष नाम की चीज नहीं थी।...