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बेबाक बोल: खेल नहीं खां साहेब

बिलावल भुट्टो ने इमरान खान पर यह कहते हुए निशाना साधा है कि जो पाकिस्तान पहले श्रीनगर को आजादी दिलाने की बात कहता था आज वह मुजफ्फराबाद बचाने की चिंता कर रहा है।

Author Updated: August 31, 2019 5:12 AM
पाकिस्तान के पीएम इमरान खान

इमरान खान भारत को परमाणु बम की धमकी दे रहे हैं तो पाक सेना बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण कर रही है। शुक्रवार को इमरान खान की अगुआई में वहां ‘कश्मीर ऑवर’ मनाया गया। पाकिस्तान में यह सब हो रहा है 370 हटाने के भारत के नितांत घरेलू फैसले पर। अंतरराष्ट्रीय मंच पर अकेले पड़ चुके इमरान खान से पाकिस्तानी विपक्ष ही सवाल कर रहा है कि श्रीनगर पर कब्जे की बात होते-होते अब मुजफ्फराबाद को बचाने की बात कैसे होने लगी, और कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए नरेंद्र मोदी की जीत वाली दुआ की सौदेबाजी क्या थी। कश्मीर पर भारत सरकार के फैसले के बाद खान जिस तरह परमाणु बम की धमकी दे रहे हैं उससे लगता है कि उन्हें परमाणु हथियारों और दिवाली के पटाखों के बीच अंतर ही नहीं पता है। क्रिकेट के इस खिलाड़ी की राजनीति में फिसलती पारी पर बेबाक बोल।

इसमें तेरा घाटा, मेरा कुछ नहीं जाता
भारतीय सामानों, फिल्मों के बहिष्कार को पाकिस्तानियों ने ट्विटर पर ट्रेंड किया तो एक भारतीय का जवाब यही था। पिछली 18 अगस्त को इमरान खान के पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम बनने के एक साल पूरे होने के साथ ही उनके कामकाज का जब विश्लेषण हो रहा था तभी वो भारत को परमाणु बम की धमकी दे रहे थे। हमने सोचा था कि प्रधानमंत्री जैसे गरिमामय पद पर बैठने के बाद इमरान खान क्रिकेट के मैदान और सियासत में अंततर समझ पाएंगे। लेकिन अफसोस कि इमरान के लिए सियासत क्रिकेट नहीं बच्चों के खेल का मैदान ही बनी हुई है।

पाकिस्तान में इन दिनों इजराइल की चर्चा है। इजराइल अपनी अस्मिता को लेकर आक्रामक रुख अख्तियार करता रहा है। इजराइल उन देशों में से है जिसने सबसे पहले खुद को परमाणु शक्ति से संपन्न किया था। भीषण युद्ध लड़ने के बाद भी इजराइल के नेताओं ने आज तक परमाणु बम के इस्तेमाल की धमकी नहीं दी है। कोई भी परमाणु शक्ति संपन्न देश ऐसी धमकी देने की बेवकूफी नहीं करता क्योंकि सबको पता है कि इसके बाद अंतरराष्टÑीय मंचों पर आप एक बुरी शक्ति के रूप में देखे जाते हैं। दावा किया जाता रहा है कि इजराइल के पास 200 से ज्यादा परमाणु हथियार हैं। जाहिर तौर पर इनका निशाना ईरान को ही माना जाता है। लेकिन इजराइल ने अपनी इस विध्वंसक शक्ति पर हमेशा चुप्पी साधे रखी है। उसके परमाणु बम के जखीरे पर ईरान के पूर्व राष्टÑपति अहमदीनेजाद ने कहा था, ‘अगर हमारे पास एक परमाणु बम भी हुआ तो हम उसका क्या करेंगे, उसे पोछ-पोछ कर चमकाएंगे’? अहमदीनेजाद के कहने का मतलब यह था कि इजराइल अगर परमाणु बम का इस्तेमाल कर भी लेगा तो फिर राज किस पर करेगा? हर देश शक्ति-संतुलन को दिखाने के लिए परमाणु बम बनाता है, उस पर गौरव भी करता है लेकिन यह भी जानता है कि अब बम गिरा के सत्ता पाने के दिन गए।

अमेजन के जंगलों से लेकर अन्य मुद्दों पर देख लें, सर्वशक्तिमान अमेरिका यही संदेश देता है कि उसके लिए कारोबार बड़ी चीज है और जाहिर सी बात है कि भारत उसके लिए बड़ी आर्थिक शक्ति है। यह हम सब जानते हैं कि अमेरिका किसी नैतिक दृष्टिकोण की वजह से भारत के पक्ष में खड़ा नहीं दिख रहा, बल्कि यह उसकी कारोबारी मजबूरी है। बीच-बीच में वह पाकिस्तान को भी तुष्टिकरण की सुई लगाता रहेगा क्योंकि भारत और पाकिस्तान का भूगोल उसके कारोबार को प्रभावित करता है। अंतरराष्टÑीय समुदायों की कश्मीर पर कूटनीति जैसी भी हो लेकिन भारत सरकार के इस बार के कड़े रुख के बाद यह हालात तो बना दिए गए हैं कि दो के झगड़े में फायदा कोई तीसरा न उठा ले जाए। कूटनीतिक स्तर पर यह कम बड़ी सफलता नहीं है कि नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप के सामने कहा कि कश्मीर द्विपक्षीय मसला है। इन्हीं ट्रंप से मध्यस्थता के वादे का दावा लेकर इमरान खान कश्मीर को ‘आजाद’ करने और भारत के मामले को शुरू करने के बाद उसे खत्म करने की शेखी बघार रहे थे।

पुलवामा पर तनाव के बाद भी इमरान खान के दफ्तर ने परमाणु समिति वाली बैठक की तस्वीरें जारी की थीं। अपने पिछले एक साल के कार्यकाल में इमरान खान ने परमाणु बम की कितनी बार व कैसे धमकी दी है और इसके बाद उनकी छवि और कितनी कमजोर हुई है यह राजनीति-शास्त्र के विद्यार्थियों के लिए शोध का विषय हो सकता है। लेकिन वह जिस तरह से परमाणु बम का जाप करते हैं उससे लगता है कि उन्हें परमाणु बम और दिवाली या अन्य उत्सवों पर फोड़े जाने वाले पटाखों में अंतर नहीं पता।

भारत को लेकर इमरान खान अपनी बेवकूफियों का विस्फोट करते रहे हैं। अब तो वे अपने घर में भी बुरी तरह घिर चुके हैं। वो राजनेता जिसने आम चुनावों में नरेंद्र मोदी की जीत की कामना की थी अब लगातार उन्हीं पर निजी हमले कर रहे हैं। आश्चर्यजनक तरीके से उनके जुबानी हमले पर राष्टÑीय स्वयंसेवक संघ का नाम आ रहा है। लगातार दूसरी बार उन्होंने भारत में संघ के खतरे को लेकर ऐसे आगाह किया मानो खुद किसी साम्यवादी विचारधारा की पैदाइश हों। नरेंद्र मोदी की जीत और कश्मीर मसले हल करने वाला बयान अब उनके खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है। विपक्षी पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो सीधे इमरान खान से सवाल कर रहे हैं कि उन्होंने यह क्यों कहा था कि मोदी चुनाव जीतेंगे तो कश्मीर का मसला हल होगा। क्या यही हल निकला है कि कश्मीर मसले पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की एकतरफा जीत होती जा रही है और पाकिस्तान एक खलनायक के तौर पर पेश किया जा रहा है। पूरा अंतरराष्टÑीय समुदाय आज एक सुर में कह रहा है कि कश्मीर द्विपक्षीय मसला है और भारत-पाक इसे आपस में सुलझा लें। पाकिस्तान की आजादी के दिन मुजफ्फराबाद में विशेष संसदीय सत्र में कश्मीर को आजादी दिलाने की बात कहने वाले पाकिस्तानी वजीर-ए- आजम अब मुजफ्फराबाद को ही लेकर घेरे जा रहे हैं। भारतीय संसद में कहा जा चुका है कि पाकिस्तान से अब जो भी बात होगी वह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पर ही होगी। बिलावल भुट्टो ने इमरान खान पर यह कहते हुए निशाना साधा है कि जो पाकिस्तान पहले श्रीनगर को आजादी दिलाने की बात कहता था आज वह मुजफ्फराबाद बचाने की चिंता कर रहा है।

खान ने अपने ताजा भाषण में एक बार फिर से मुसलिम अस्मिता का कार्ड खेलते हुए कहा कि मुसलमान संयुक्त राष्टÑ संघ की ओर देख रहे हैं कि वह क्या फैसला करता है। जब इमरान खान मुसलमान-मुसलमान की रट लगा रहे होते हैं और कहते हैं कि वे संयुक्त राष्टÑ में कश्मीर के राजदूत बनेंगे तभी मुसलिम अस्मिता का अगुआ देश संयुक्त अरब अमीरात मोदी के सम्मान में बिगुल बजाता है। जब संयुक्त अरब अमीरात में नरेंद्र मोदी को ‘आॅर्डर आॅफ जायद’ दिया रहा था तो पाकिस्तान का मीडिया अपने नेता से सवाल पूछ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है। मुसलिम देशों से सम्मानित भारत के नेता विपक्ष के लिए इमरान के खिलाफ बड़ा हथियार बन रहे हैं। इमरान खान अब भी कह रहे हैं कि दुनिया पाकिस्तान का साथ न दे तो भी वह कश्मीर के लिए आखिरी दम तक लड़ेगा। लेकिन जिस तरह से विपक्ष और मीडिया कश्मीर पर नाकामी को लेकर इमरान खान को घेर रहा है उससे लगता है कि उन्होंने अपने राजनीतिक करियर पर फिदायीन हमला कर लिया है। इसके बाद भी अगर वे कहते हैं कि 24 सितंबर को संयुक्त राष्टÑ में कश्मीर का मुद्दा उठाएंगे तो हल्के-फुल्के तरीके से यही कहा जा सकता है, ‘इसमें तेरा घाटा’। अगर वे अपनी बेवकूफियों का सिलसिला जारी रखेंगे तो लगता है कि कम से कम उनके शासनकाल में कश्मीर भारत के लिए एकतरफा मामला रह जाएगा।

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