ताज़ा खबर
 

बारादरी: इस बार भी मिलेगी हमें शानदार कामयाबी

केंद्रीय मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन का दावा है कि नरेंद्र मोदी की अगुआई में राजग को 2014 से ज्यादा अप्रत्याशित सफलता मिलेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पांच सालों में हर वर्ग के लिए और हर विषय पर काम किया है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी से लेकर जीएसटी और रफाल तक के सवालों के जवाब हैं, जनता का भरोसा और अदालत से क्लीन चिट मिल चुकी है लेकिन विपक्ष इसे देखना और सुनना नहीं चाहता। बातचीत कार्यक्रम का संचालन किया कार्यकारी संपादक मुकेश भारद्वाज ने।

बारादरी की बैठक में हर्षवर्धन। (सभी फोटो : आरुष चोपड़ा)

मनोज मिश्र : आपके पास अब पर्यावरण विभाग की भी जिम्मेदारी है। आपने पर्यावरण प्रदूषण कम करने की दिशा में क्या काम किए हैं?

हर्षवर्धन : यों पर्यावरण के क्षेत्र में बहुत से काम हम लोगों ने किए हैं, पर खासकर पिछले दो सालों में जो काम हुए उसके कारण संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च सम्मान, जिसे अर्थ केयर अवार्ड कहते हैं, वह हमारे प्रधानमंत्री जी को मिला। पहले पर्यावरण मंत्रालय का नाम काफी बदनाम हुआ करता था, पर आज मैं बड़े गर्व के साथ कह सकता हूं कि इस विभाग के काम में सौ फीसद पारदर्शिता है। दुनिया का सबसे बेहतरीन सॉफ्टवेयर- परिवेश- हमारे विभाग में लगा हुआ है। जो अनापत्ति प्रमाणपत्र छह-छह सौ दिनों के अंदर मिला करते थे, आज वे औसतन सौ दिनों के अंदर मिल जाते हैं। समय के अनुसार नियमों में बदलाव में तेजी आई है। सारे नियम हमने विश्व मानकों के अनुरूप बनाए हैं। दूसरा, जो बड़े विषय हैं, जैसे जलवायु परिवर्तन, उस पर हमने बहुत तेजी से काम किया है। पिछले जलवायु सम्मेलन में प्रधानमंत्री जी ने सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए जो इंटरनेशनल सोलर एलाएंस का जो विचार पेश किया था, उसका असर यह हुआ कि भारत में ही उसका केंद्र बन गया। इस तरह पर्यावरण के क्षेत्र में भारत दुनिया को रास्ता दिखा रहा है। स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य की ओर हम तेजी से बढ़ रहे हैं। बीएस-फोर चल रहा है। ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन रोकने के लिए हमने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वादा किया था कि तैंतीस फीसद कमी लाएंगे। मगर हम अभी इसमें इक्कीस प्रतिशत कमी की रिपोर्ट सौंप चुके हैं। इस तरह सारी दुनिया में पर्यावरण को लेकर भारत की साख बढ़ी है। हमने सामाजिक स्तर पर लोगों में पर्यावरण को लेकर जागरूकता पैदा करने में बड़ी कामयाबी हासिल की है। हमारे प्रयासों को अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हर कोई देख सकता है, उसका आकलन कर सकता है।

मृणाल वल्लरी : मगर पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले जीडी अग्रवाल जैसे कार्यकर्ताओं के साथ सरकार का व्यवहार क्यों अच्छा नहीं रहा है?
’जहां तक हमारे मंत्रालय का सवाल है, न तो हम किसी से रिश्ता खराब रखते हैं और न रिश्ता खराब रखने की हमारी कोई मंशा है। हम तो जो कुछ करते हैं, उसे सबसे पहले लोगों के सामने रखते हैं और फिर सबकी राय जानने के बाद ही उसमें आगे बढ़ते हैं। हमारी समितियों में अपने-अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं, हम उन्हीं के सुझावों के आधार पर आगे बढ़ते हैं, अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करते हैं। इसलिए यह कहना ठीक नहीं है कि किसी व्यक्ति या संस्था से मेरे रिश्ते खराब हैं। मेरे लिए जो भी पर्यावरण के लिए काम कर रहा है, उसके सुझाव सम्माननीय हैं। अगर हमारी नीतियों की अलोचना भी करता है, तो हम उसके अंदर सकारात्मकता तलाशने का प्रयास करते हैं। मैं अपने विभाग में काम करने वाले लोगों के बारे में पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि उनकी मंशा सकारात्मक है और उनमें सौ फीसद पारदर्शिता है।

मुकेश भारद्वाज : मगर विपक्ष इस बात को नहीं मानता कि आपकी सरकार पूरी पारदर्शिता से काम करती है। अब चुनाव का समय है। इसमें इसे कैसे देखते हैं?
’विपक्ष तो विपक्ष है, इसलिए उसे विरोध करने का पूरा अधिकार है। देश में लोकतंत्र है। सबको अपने विचार रखने का भी अधिकार है। विपक्ष को अपना विचार रखने का अधिकार है। और हमें अपना कर्म करने का अधिकार है। हमें इस बात का पूरा संतोष है कि हमने सरकार में आने के बाद सौ प्रतिशत निष्ठा, सौ प्रतिशत पारदर्शिता और सौ प्रतिशत ईमानदारी के साथ काम किया है। मैं तो यहां तक कहूंगा कि पांच साल नरेंद्र मोदी जी के साथ काम करने के बाद, उनकी सोच को, उनके काम को नजदीक से देखने के बाद, 2014 में भारत के लोगों पर कोई दैवी कृपा हुई, जो उनको नरेंद्र मोदी जैसा प्रधानमंत्री मिला। आने वाले वर्षों में जब मूल्यांकन करेंगे, तो दिखेगा कि भारत वास्तव में ऊंचाइयों की तरफ गया है। इसलिए जैसी अप्रत्याशित सफलता 2014 में मिली थी, उससे कहीं इस बार के चुनाव में मिलने जा रही है। सबकी कल्पनाओं से ऊपर सफलता मिलेगी।

अजय पांडेय : दिल्ली में कहा जा रहा है कि अगर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का गठबंधन होगा, तो भाजपा की हार तय है। इस पर आपका क्या मानना है?
’मैं तो चाहता हूं कि यह गठबंधन जरूर बने। पर कुछ भी हो, हर परिस्थिति में हम सातों सीटें जीतेंगे। अगर गठबंधन हो जाता है, तो हमें इन दोनों को एक साथ मिल कर हराने में जो आनंद की अनुभूति होगी, वह अकेले में नहीं होगी। देखिए, हम जनता में अपने कामों के आधार पर जाएंगे। गठबंधन करके जो लोग आएंगे, उनके बारे में कुछ क्या कहना, उनके बारे में तो लोग सब जानते ही हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री महोदय उन लोगों के आगे गिड़गिड़ा रहे हैं, जिन्हें वे भ्रष्ट कहा करते थे। तो, इनकी राजनीति क्या है, इनकी सच्चाई क्या है, सब लोग जानते हैं। कांग्रेस के बारे में तो लोग साठ सालों से जानते हैं। वह भ्रष्टाचार की पर्याय रही है। आम आदमी पार्टी के साथ जिन लोगों की निष्ठा थी, वे भी छोड़ कर चले गए। इनको इतना भारी बहुमत मिला, पर कोई काम नहीं किया, इनके ज्यादातर विधायकों पर तरह-तरह के आरोप लग चुके हैं। जितने वादे इन्होंने किए थे, उनमें से कोई भी पूरा नहीं किया। इसलिए जब ये लोग मिल कर चुनाव लड़ेंगे, तो हमें तो कुछ करना ही नहीं पड़ेगा। जनता उनका हिसाब-किताब खुद ही कर देगी। हो सकता है, इनके कार्यकर्ता ही आपस में इनका हिसाब-किताब कर दें।

पंकज रोहिला : दिल्ली में पार्टी के स्तर पर भी इस बात पर असंतोष जाहिर किया जा चुका है कि आपके कैडर में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। फिर कैसे इस स्थिति से पार पाएंगे?
’हमें कोई चुनौती नहीं है। पार्टी का जो आधार है, जिसमें पार्टी के सदस्यों, कार्यकर्ताओं की संख्या के आधार पर देखें तो आज हम दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी हैं। ग्यारह-बारह करोड़ सदस्य हमारी पार्टी के हैं। इसमें केवल दिल्ली नहीं, पूरे देश के स्तर पर सदस्यों की संख्या बढ़ी है। किसी भी तरह से न तो हमारे सदस्यों की संख्या में कमी आई है और न कार्यकर्ताओं में कमी आई है। हमारे पास देवदुर्लभ कार्यकर्ता हैं। हमारे पास देवदुर्लभ स्वयंसेवक हैं, जो देशहित में भाजपा का समर्थन करते हैं, चुनाव के समय आकर मेहनत करते हैं। इस चुनाव में आप कोई भी गणित बिठा लें, पर जीत भाजपा की ही होने वाली है।

सूर्यनाथ सिंह : पिछले चुनाव में आपके घोषणापत्र में जो मुद्दे रखे गए थे, उन पर कोई संतोषजनक काम नहीं हुआ। इस चुनाव में आतंकवाद और सेना को मुद्दा बना कर आगे बढ़ रहे हैं। क्या इन मुद्दों के जरिए विपक्ष को शिकस्त दे पाएंगे?
’एक बात समझिए, मुद्दा कोई ऐसी चीज तो होता नहीं, जिसे फैक्ट्री में बना कर बाजार में उतार दें। मुद्दा तो वह होता है, जिसे जनता सोचती है। जहां तक हमारे काम का सवाल है, हमने पांच सालों में हर विषय पर काम किया है, हर वर्ग के लिए काम किया है। गरीब के लिए भी काम किया है, असंगठित क्षेत्र के मजदूर और किसान के लिए भी काम किया है। छोटे बच्चों के लिए भी किया है, बुजुर्गों के स्वाभिमान के लिए भी किया है। जहां पर देश की रक्षा का विषय आया, वहां पर भी हमने कोई शिथिलता नहीं दिखाई है। हमारे प्रधानमंत्री के कार्यकाल में दो बड़ी घटनाएं हुर्इं, उड़ी हुई, पुलवामा हुआ। यह देश की सुरक्षा का मामला था। वही सेना थी, वही पायलट थे, पर फर्क जज्बे का था, इन दोनों घटनाओं का हमने ऐसा जवाब दिया कि वह इतिहास में लिखा जाएगा। इसलिए यह मुद्दा हमारा नहीं, देश की जनता का है। जहां तक काम का सवाल है, पहले भी कितनी सारी योजनाएं बनाई गर्इं, पर आज प्रधानमंत्री मोदी जी ने जितने विजन प्रोग्राम बनाए, उससे करोड़ों की संख्या में लाभार्थियों की संख्या पहुंच गई। प्रधानमंत्री केवल बोलते नहीं, काम के लिए बोलते हैं।

मनोज मिश्र : मगर विपक्ष नोटबंदी, जीएसटी, रफाल जैसे मुद्दों पर जो सवाल उठा रहा है, उसका जवाब कैसे देंगे?
’हमारे प्रधानमंत्री वही काम करते हैं, जो लोगों के हित में है। हो सकता है उसमें से कुछ बातें शुरू में अच्छी न भी लगें। उन्होंने जीएसटी लागू किया, तो कुछ लोगों को अच्छा नहीं लगा, पर धीरे-धीरे उन्होंने लोगों की तकलीफों को समझा और उनका समाधान किया। आज जीएसटी के कारण लोगों को फायदा मिल रहा है। आप नोटबंदी की बात कर रहे हैं, तब सारा देश कतार में खड़ा रहा, पर किसी ने उफ तक न की कि उन्हें लगता था कि प्रधानमंत्री की नीयत में कोई खोट नहीं है। आप रफाल की बात कर रहे हैं, तो इसके बारे में तो देश की सर्वोच्च अदालत ने क्लीन चिट दे दी। अब कितने प्रमाण चाहिए। अब कितने जवाब चाहिए। जवाब सबको पता है, पर जवाब कोई सुनना नहीं चाहता, इन्होंने कानों में रूई डाल रखी है। उनके पास अब बोलने को कुछ नहीं है, इसलिए इन मसलों को छेड़ रहे हैं।

अरविंद शेष : आपका वादा था हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देने का। मगर संसद तक में रिपोर्ट आई कि सरकारी भर्तियों में नवासी फीसद तक की कटौती हुई है। वास्तव में क्या स्थिति है।
’वास्तविक स्थिति का क्या कहें। अभी संसद में प्रधानमंत्री ने जो अपना आखिरी भाषण दिया, उसमें एक-एक क्षेत्र के बारे में विस्तार से ब्योरा दिया। उससे पता चलता है कि हमने जितना वादा किया था, उससे कहीं अधिक रोजगार सृजित हो गए। मुद्रा योजना से जो पंद्रह करोड़ लोग अपने पैरों पर खड़े हो गए, वे दूसरों के लिए भी रोजगार पैदा कर रहे हैं। यह एक मिथ है कि रोजगार कम हुआ है।

अजय पांडेय : इन्हीं पांच वर्षों में यह भी हुआ कि पहली बार सर्वोच्च न्यायालय के चार जजों ने सरकार के खिलाफ प्रेस कान्फ्रेंस की, आरबीआइ के दो गवर्नरों ने इस्तीफा दिया। पहली बार यह भी हुआ कि सीबीआइ के निदेशकों को हटाने के लिए रात में कार्रवाई हुई। इसे आप किस रूप में देखते हैं?
’मैं नहीं समझता कि सर्वोच्च न्यायालय के किसी जज को या सीबीआइ के किसी अधिकारी को अपने वरिष्ठ के प्रति इस तरह सार्वजनिक रूप से रोष व्यक्त करना चाहिए। यह मेरा व्यक्तिगत मत है। अब उन्होंने ऐसा क्यों किया और उनके व्यक्तिगत विचार क्या थे, इस पर न तो सरकार कोई बात कह सकती है, न कहना चाहिए। हां, सीबीआइ के मामले में यह जरूर शर्मनाक था कि उसके दो अधिकारी आपस में उलझ पड़े थे। उसमें प्रधानमंत्री को कार्रवाई करना जरूरी था, सो किया। किसी भी देश में ऐसी संस्थाओं से देश की प्रतिष्ठा भी जुड़ी होती है। नहीं तो आज जैसी आजादी लोगों को अपनी बातें कहने, अपने विचार प्रकट करने की है, वैसी कभी नहीं रही।

मृणाल वल्लरी : पर सरकार की छवि एक एरोगेंट सरकार की क्यों बन गई?
’मुझे नहीं पता कि कौन लोग एरोगेंट बोलते हैं, पर सच्चाई यह है कि जो लोग ईमानदारी, सच्चाई और बिना डरे, जज्बे के साथ काम करता है, कई बार सख्त फैसले करता है, उन्हें लागू करने में सख्ती से पेश भी आता है, तो कुछ लोगों को लगता है कि अरे, ये तो हमारी बात ही नहीं सुनते। हमारे प्रधानमंत्री को कोई व्यक्ति देशहित में कोई अच्छा सुझाव दे तो वे उसे पकड़ कर कार्यक्रम बनाते और उसे लागू कराने का प्रयास करते हैं। उनके पास अगले पांच सालों में क्या करना है, इसे लेकर स्पष्ट दृष्टिकोण है। लोगों के सुझावों पर काम करते हैं। विचारों का सम्मान करने की जो प्रवृत्ति इस सरकार में है, वह किसी और सरकार में नहीं रहा है।

अजय पांडेय : एक तरफ तो ऐसे लोगों को लाया जा रहा है, पर दूसरी तरफ ऐसे लोगों को किनारे कर दिया जा रहा है, जिन्होंने पार्टी को खड़ा किया, जैसे आडवाणी जी।
’इसमें दो बातें समझिए। एक तो यह बहुत गलत व्याख्या है कि किसी को किनारे खड़ा कर दिया गया। यह सच्चाई से बहुत दूर है। इसमें कोई दो राय नहीं कि हमारी पार्टी को खड़ा करने में अटल जी, आडवाणी जी, मुरली मनोहर जोशी जी, कुशाभाऊ ठाकरे जी जैसे लोगों का बड़ा योगदान रहा है। ऐसे हजारों लोगों ने अपने जीवन भर की तपस्या लगाई है। आडवाणी जी का स्थान कोई नहीं ले सकता। पर अपनी आयु के इस पड़ाव पर वे चुनाव नहीं लड़ पा रहे हैं, तो उसे इस तरीके से व्याख्यायित करना ठीक नहीं है। बिना आडवाणी जी की सहमति के उनको चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता। फिर पार्टी ने एक मापदंड तय किया कि एक स्तर पर पहुंच कर चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। नानाजी देशमुख ने तो साठ साल का मापदंड तय कर दिया था। फिर मोदी जी के समय में सुना कि पचहत्तर साल की सीमा तय की गई है। तो, जब पार्टी कोई सीमा तय करती है, तो ऐसा नहीं कि किसी व्यक्ति के हिसाब से उसका पालन किया जाए। हमारे वरिष्ठ नेताओं से भी राय-विमर्श करके यह पैमाना बनाया गया होगा। निश्चित रूप से उन्हें भी इसकी जानकारी होगी। फिर वे जीवन भर संसद में रहे हैं, अब संसद में होने या न होने से उनके सम्मान में कोई कमी नहीं आती। उनका सम्मान इसलिए है कि वे आडवाणी जी हैं। उनका सम्मान शाश्वत है। लोगों में उनके प्रति सम्मान सदा बना रहेगा।

डॉक्टर हर्षवर्धन
मरीजों के साथ-साथ जनता की समस्याओं की भी नब्ज पकड़ने वाले डॉक्टर हर्षवर्धन का जन्म 13 दिसंबर 1954 को दिल्ली में हुआ था। आज भी दिल्ली के कृष्णानगर में मौजूद अपने पुश्तैनी घर में रहते हैं। मौजूदा समय में चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, पृथ्वी विज्ञान मंत्री हैं। नाक, कान और गले के रोगों के चिकित्सक हैं। दिल्ली में भाजपा सरकार (1993-1998) के दौरान इन्होंने स्वास्थ्य मंत्री, कानून मंत्री और शिक्षामंत्री सहित राज्य मंत्रिमंडल में विभिन्न पद संभाले। दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में कभी नहीं हारे हैं। बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्रालय में अपने समय के दौरान इन्होंने अक्तूबर, 1994 में पोलियो उन्मूलन योजना शुरू की थी, जिसने ऐतिहासिक सफलता हासिल की। 2013 में हर्षवर्धन भाजपा की ओर से दिल्ली के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार भी घोषित किए गए थे।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App