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जनसत्ता बारादरी: ऑनलाइन शिक्षा-परीक्षा प्रणाली को मजबूत करेंगे

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ का कहना है कि किसी भी विद्यार्थी के लिए परीक्षा जरूरी होती है। लेकिन कोरोना विषाणु से संक्रमण के संकट को देखते हुए हम विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का जोखिम नहीं ले सकते हैं। हर विद्यार्थी को स्कूल के आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर पदोन्नत किया जाए। इसके अलावा दसवीं और बारहवीं के बचे हुए विषयों की बोर्ड परीक्षाएं पूर्णबंदी खत्म होने के बाद होंगी। मंत्रालय ने बच्चों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह भी फैसला किया है कि अब 83 विषयों की जगह सिर्फ 29 मुख्य विषयों की परीक्षाएं आयोजित करवाई जाएंगी। कोरोना वायरस के कारण पूर्णबंदी और सामाजिक दूरी के नियमों को देखते हुए केंद्रीय मंत्री ने ऑनलाइन माध्यमों से सवालों के जवाब दिए जिसका संचालन किया कार्यकारी संपादक मुकेश भारद्वाज ने।

Author नई दिल्ली | Updated: April 21, 2020 3:27 AM
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ -(जनसत्ता फोटो : अरुष चोपड़ा)

रमेश पोखरियाल —15 जुलाई 1959 को पौड़ी गढ़वाल में जन्म। अलग उत्तराखंड राज्य के लिए 1978 से जमीनी संघर्ष में जुटे। 1991 में पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए कर्णप्रयाग निर्वाचन-क्षेत्र से चुने गए थे। 1993 और 1996 मेंं उसी निर्वाचन क्षेत्र से उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए। 1997 में उत्तर प्रदेश राज्य सरकार के उत्तरांचल विकास मंत्री बने। 2009 से 2011 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री थे। 2011 से लेकर 2013 तक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे। राजनीति के साथ साहित्य के भी साधक हैं। इनकी रचनाएं पूरी दुनिया में कई भाषाओं में अनूदित हुई हैं, साथ ही देश-विदेश के विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल हैं। मानव संसाधन विकास मंत्री के रूप में नैतिक व सांस्कृतिक मूल्यों की पक्षधरता को लेकर मुखर रहे हैं।

सुशील राघव : कोरोना संकट की वजह से देश में लगाए गई पूर्णबंदी की अवधि को कुछ राज्यों ने गर्मी की छुट्टियों के रूप में घोषित कर दिया है। इसे लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय का क्या दिशानिर्देश है?
रमेश पोखरियाल निशंक : शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, जिस पर केंद्र और राज्य दोनों को कानून बनाने का अधिकार है। ऐसे में सबका प्रयास और प्राथमिकता यही है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान न हो और उनके शैक्षणिक सत्र का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जा सके। इसी वजह से ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली को केंद्र और लगभग सभी राज्य सरकारें काफी बढ़ावा दे रही हैं। राज्य सरकारों को अधिकार है कि वे स्कूलों के शैक्षणिक सत्र पर अपने हिसाब से विचार करें। इस मुद्दे पर मेरी कुछ राज्यों के शिक्षा मंत्रियों से बात हुई है और सभी ने एकमत से यह निर्णय लिया है कि स्कूलों को इस लॉकडाउन के समय में बंद रखेंगे। मानव संसाधन विकास मंत्रालय बहुत जल्द दिशानिर्देश जारी करेगा, जिसमें विस्तृत जानकारी होगी कि लॉकडाउन के बाद शैक्षणिक सत्र में किस तरह से काम होगा।

संजय स्वतंत्र : जिन विद्यार्थियों को बिना परीक्षा के अगली कक्षाओं में भेजा गया है, उनके प्रदर्शन को जांचने के लिए किसी तरह की परीक्षा आयोजित कराने की योजना है?
रमेश पोखरियाल निशंक : ’मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से कक्षा एक से आठ तक और कक्षा नौ एवं कक्षा 11 के छात्र-छात्राओं को बिना परीक्षा पदोन्नत करने को कहा है। मंत्रालय ने निर्देश दिया था कि हर छात्र-छात्रा को स्कूल के आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर पदोन्नत किया जाए। जिन-जिन राज्य सरकारों ने इसी तरह का फैसला किया है उन्होंने भी ऐसा ही कुछ सोच कर किया होगा। इसके अलावा दसवीं और बारहवीं के बचे हुए विषयों की बोर्ड परीक्षाएं लॉकडाउन खत्म होने के बाद होंगी। मंत्रालय ने विद्यार्थियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह भी निर्णय लिया है कि अब 83 विषयों की जगह सिर्फ 29 मुख्य विषयों की परीक्षाएं आयोजित करवाई जाएंगी। किसी भी विद्यार्थी के लिए परीक्षा जरूरी होती है और हम भी यही मानते हैं, लेकिन इस संकट काल के दौरान हम अपने छात्रों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का जोखिम नहीं ले सकते हैं। इसलिए हमें ऐसा निर्णय लेना पड़ा। आने वाले समय में हमारा प्रयास होगा कि हम ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली के साथ ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली को भी और मजबूत बना कर स्कूल की परीक्षाओं में भी उसका इस्तेमाल करें। इससे कई फायदे होंगे, जैसे कि स्कूल जाने वाले बच्चे बहुत जल्दी तकनीकी शिक्षा को समझने लगेंगे और समय की काफी बचत होगी।

संजय शर्मा : जेएनयू ने छात्रावास की नियमावली को लेकर विद्यार्थियों की हड़ताल के दौरान ऑनलाइन परीक्षाएं ली थीं। इसी तर्ज पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय का अन्य विश्वविद्यालयों में ऑनलाइन परीक्षाएं आयोजित करने को लेकर क्या विचार है?
रमेश पोखरियाल निशंक : ’जिस प्रकार भारत सरकार देश को कोरोना जैसी महामारी के प्रकोप से बचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ हर प्रयास कर रही है, उसी प्रकार मानव संसाधन विकास मंत्रालय भी यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि किसी भी स्तर पर, किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई पर कोई असर नहीं होना चाहिए। इसी प्रयास के तहत मंत्रालय ने ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बहुत सारी योजनाएं शुरू की हैं और इन सभी पहल को काफी सराहा भी जा रहा है। इस बाबत हमने शिक्षण संस्थानों को यह निर्देश जारी किया था कि वे कोरोना वायरस महामारी के दौरान छात्र-छात्राओं के लिए ऑनलाइन शिक्षा की व्यवस्था करें। हमारे निर्देशों को मानते हुए संस्थानों ने अपने यहां ऑनलाइन शिक्षा द्वारा पढ़ाई शुरू भी करवा दी है। हमने ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली को और बढ़ावा देने के लिए अभी हाल ही में ‘भारत पढ़े ऑनलाइन’ अभियान शुरू किया था जहां हमने छात्र-छात्राओं से, अभिभावकों से एवं अध्यापकों से ऑनलाइन शिक्षा पर सुझाव मांगे थे। काफी सारे लोगों ने इस पर अपने सुझाव दर्ज करवाए हैं। हमें लगभग 3000 सुझाव आए। ऑनलाइन मूल्यांकन के लिए, ऑनलाइन शिक्षा के लिए यूजीसी ने मंत्रालय के निर्देशों पर एक टास्क फोर्स का गठन किया है। एक बार हमें पूरी रिपोर्ट मिल जाएगी तो हम ऑनलाइन मूल्यांकन के लिए भी दिशानिर्देश जारी कर देंगे।

संदीप भूषण : कोरोना संकट से पहले देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू की गई थी। ऐसे में अब इसे लेकर मंत्रालय की आगे की रणनीति क्या रहने वाली है?
रमेश पोखरियाल निशंक : ’सबसे पहले मैं देश के सभी लोगों को खासकर उन लोगों को जो इस महामारी के संकट काल से पहले नियुक्तियों की प्रतीक्षा कर रहे थे, लेकिन उनकी नियुक्तियों में विलंब हो गया है, उन्हें यह बता देना चाहता हूं कि बिलकुल भी घबराने की जरूरत नहीं है। जो भी नियुक्तियां होनी थीं वो जरूर होंगी। इस महामारी की वजह से थोड़ा सा विलंब जरूर हो गया है। जैसे ही देश इस महामारी से निपट लेगा, हम इस दिशा में उचित कदम उठाएंगे। अभी भी मंत्रालय में इस दिशा में काफी चर्चाएं हो रही हैं और संबंधित कार्रवाई की जा रही है। सभी संबंधित अधिकारी इस पर अपना काम कर रहे हैं। हम सभी लोगों को यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है। मंत्रालय और सरकार इस दिशा में बहुत जल्द जरूरी दिशानिर्देश जारी करेंगे। अभी पूरे देश की प्राथमिकता कोरोना जैसी महामारी से निजात पाने की है क्योंकि जैसा कि प्रधानमंत्री जी ने कहा है, जान है तो जहान है।

दीपक रस्तोगी : विश्वविद्यालय और विद्यालय परिसरों में रहने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों की कोरोना संक्रमण से संबंधित स्क्रीनिंग को लेकर मंत्रालय ने क्या तैयारियां की हैं? सभी की स्क्रीनिंग कब तक पूरी हो जाएगी?
रमेश पोखरियाल निशंक : ’मानव संसाधन विकास मंत्रालय सभी छात्र एवं शिक्षकों के स्वास्थ्य के प्रति पूरी तरह से सचेत है और उनकी देखभाल के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि काफी विद्यार्थी लॉकडाउन की खबर सुनकर अपने घर या आसपास रहने वाले रिश्तेदारों के यहां चले गए। इसके बाद भी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालयों या विद्यालयों के परिसर में रह रहे हैं। हमारा प्रयास है कि हम सभी विद्यार्थियों और अध्यापकों को हर संभव मदद पहुंचाएं। इसके अलावा मैंने खुद आइआइटी के निदेशक और केंद्रीय विश्वविद्यालओं के कुलपतियों से इस बारे में विस्तृत चर्चा की है और उन्हें कोरोना वायरस से संबंधित सभी एहतियात बरतने को लेकर निर्देश दिए हैं। मैंने खुद उन्हें आयुष मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय के जारी किए गए दिशानिर्देश अपने परिसरों में लागू करने को भी कहा है। हमारा सतत प्रयास है कि विद्यार्थियों को इस संकट भरे दौर में किसी भी समस्या का सामना ना करना पड़े। विश्वविद्यालयों और विद्यालयों में मौजूद भोजनालय सुचारू रूप से चालू हैं। सभी छात्र-छात्राओं का स्वास्थ्य हमारी प्राथमिकता है और हमने संबंधित अधिकारियों को सभी जरूरी दिशानिर्देश दे दिए हैं और सबको सचेत रहने को कहा गया है।

पंकज रोहिला : इस संकट की घड़ी में जबकि सभी मंत्रालय एक-दूसरे के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं, मानव संसाधन विकास मंत्रालय की कोरोना के खिलाफ लड़ाई में क्या भूमिका है?
रमेश पोखरियाल निशंक : ’इस संकट में न सिर्फ सभी मंत्रालय बल्कि सभी राज्यों की सरकारें भी मिलजुल कर काम कर रही हैं। यही वजह है कि भारत इस खतरनाक कोरोना वायरस से जंग में बहुत सारे विकसित देशों से काफी आगे है। सभी विभाग एक-दूसरे की मदद में हाथ बंटाते रहते हैं और एक-दूसरे के पूरक साबित हो रहे हैं। जहां तक मानव संसाधन विकास मंत्रालय की बात है तो हम स्वास्थ्य मंत्रालय से लगातार संपर्क में हैं और वहां से जारी सभी दिशानिर्देश इत्यादि सभी स्कूलों, कॉलेजों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, आइआइटी जैसे संस्थानों में लागू करवाए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय और आयुष मंत्रालय के मार्गदर्शन में बहुत सारे आइआइटी कोरोना वायरस से संबंधित बहुत सारी चीजों पर अत्याधुनिक अनुसंधान कर रहे हैं, जिससे इस लड़ाई में देश को और सशक्त किया जा सके। इसके अलावा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने हमारे ‘स्वयं प्रभा’ चैनलों को टाटा स्काई और एअरटेल डिश टीवी पर दिखाने में काफी मदद की है जिसकी वजह से हम घर पर रहने वाले छात्र-छात्राओं को शिक्षा से जोड़े रखेंगे। खेल मंत्रालय के साथ मिलकर हमने लाइव फिटनेस सत्र शुरू किए हैं जो सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जाएगा। यूट्यूब पर उसी सत्र का रिकार्डेड संस्करण दिखाया जाएगा। हमने ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देते हुए विभिन्न ऑनलाइन कोर्स पढ़ाने के दिशानिर्देश भी दिए हैं। हमने विभिन्न प्रदेशों में अपने हॉस्टलों को क्वारंटाइन सेंटर में बदल दिया है और इसकी जानकारी उस प्रदेश सरकार को भी दे दी गई है। अभी तक मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले विभिन्न संस्थानों के 110 हॉस्टलों को क्वारंटाइन सेंटर के रूप में अधिग्रहीत कर लिया गया है।

प्रियरंजन : दसवीं और बारहवीं की सीबीएसई और अन्य राज्यों की जो बोर्ड परीक्षाएं स्थगित की गई हैं, उन्हें आयोजित करवाने की मानव संसाधन विकास मंत्रालय की क्या योजना है?
रमेश पोखरियाल निशंक : ’न सिर्फ परीक्षाएं बल्कि शिक्षा का सत्र शुरू करवाने के लिए मंत्रालय पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। बाकी कक्षाओं के लिए तो हमने पहले भी बताया है कि कक्षा एक से कक्षा नौ और कक्षा ग्यारह के बच्चों को बिना परीक्षा के पदोन्नत कर दिया गया और बोर्ड परीक्षाएं जल्द से जल्द करवाई जाएंगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय को परीक्षा की तारीखें तय करते समय बहुत सारे पहलुओं पर विचार करना होगा। सबसे बड़ी बात यह है कि जब किसी भी कारणवश परीक्षा बीच में स्थगित होती है तो विद्यार्थियों पर इस बात का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। जब परीक्षाएं लगातार चल रही होती हैं तो छात्रों में पढ़ाई के प्रति एक गंभीरता बनी रहती है। लेकिन अगर बीच में परीक्षाएं रोकनी पड़ जाए तो उनकी पढ़ाई में बाधा आ जाती है। इसलिए हमें परीक्षा की तारीख पर निर्णय लेने से पहले इस पर गंभीरता से सोचना होगा। इसके अलावा बारहवीं के बहुत सारे बच्चे ऐसे होंगे जिन्होंने बहुत सारी प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भरे होंगे तो हमें बोर्ड की परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तारीखों में इतना अंतर रखना होगा कि परीक्षार्थियों को समस्या न आए और उन्हें दोनों के लिए पढ़ने का भरपूर समय मिल जाए। ऐसे बहुत सारे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार-विमर्श हो रहा है और बहुत जल्द हम एक नीति ले आएंगे।

ब्रह्मांश यादव : देश में अगले आदेश तक सभी प्रवेश परीक्षाएं (जेईई मुख्य, नीट, नाटा, सीयूसेट आदि) स्थगित हैं। ऐसे में विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थाओं के नए सत्र की शुरुआत के लिए आपने क्या रूपरेखा तैयार की है?
रमेश पोखरियाल निशंक : ’जैसा कि मैंने पहले भी कहा है कि फिलहाल हम सबके लिए प्राथमिकता कोरोना वायरस से जंग जीतने की है। हर दिशा में उचित कदम उठाए जा रहे हैं जिससे कि सभी लोगों की समस्याओं को सुलझाया जा सके। इसी दिशा में हमने दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाएं अगले आदेश तक स्थगित कर दी थीं। हम इस बात से अच्छी तरह से अवगत थे कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों के शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में देर होगी। लेकिन कोरोना वायरस की वजह से अभी हम इस पर कोई नीति नहीं बना पाए हैं। फिलहाल प्राथमिकता कोरोना वायरस को हराना है। एक बार जब इस जंग को हम जीत लेते हैं तो फिर सभी तरह की गतिविधियां सुचारु रूप से चालू हो जाएंगी। मंत्रालय जल्दी ही उच्च शिक्षण संस्थान और विश्वविद्यालयों के नए सत्र के संबंध में नीति लाएगा।

प्रेम प्रकाश : ऑनलाइन पढ़ाई तो ठीक है, लेकिन गांव और पिछड़े जिलों के ऐसे विद्यार्थियों के लिए सरकार के पास क्या योजना है जिनके पास ऑनलाइन पढ़ाई के लिए जरूरी साधन ही उपलब्ध नहीं हैं?
रमेश पोखरियाल निशंक : ’वैसे तो आजकल इंटरनेट की उपलब्धता देश के हर कोने में है। फिर भी कहीं ऐसी समस्या है तो हमने अध्यापकों को निर्देश दिए हैं कि वे विद्यार्थियों के मोबाइल पर एसएमएस भेजकर या फोन पर बात कर के उनका मार्गदर्शन करें। हमने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) का बनाया गया एक वैकल्पिक अकादमिक कैलेंडर जारी किया है। इस कैलेंडर से हम उन छात्रों को भी निरंतर शिक्षा उपलब्ध करवा सकते हैं जिनके पास इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा हमने ऑनलाइन शिक्षा के लिए टास्क फोर्स भी बनाई है जो कि इस समस्या की विस्तृत जांच करेगी और हम इस समस्या का समाधान करने की कोशिश करेंगे।

प्रस्तुति : सुशील राघव/मृणाल  वल्लरी 

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