ताज़ा खबर
 

बारादरी: सुरक्षा हमारा धर्म होना चाहिए

केंद्र सरकार में मंत्री सत्यपाल सिंह ने कहा कि पुलवामा पर आतंकवादी हमले के बाद जिस तरह सारा देश प्रधानमंत्री के साथ खड़ा हुआ उससे एक मजबूत भारत की छवि उभरी। उन्होंने कहा कि जिन्हें हम आतंकवादी कहते हैं, दुनिया के कुछ देश उन्हें स्वतंत्रता सेनानी कहते हैं। हमारी सरकार इस काम में लगी हुई है कि उन लोगों को अंतरराष्टÑीय आतंकवादी घोषित किया जाए, जो अंतरराष्ट्रीय रडार पर हैं। पुलवामा पर हुए आतंकवादी हमले के बाद सरकार के प्रतिनिधि से बातचीत के इस कार्यक्रम का संचालन किया कार्यकारी संपादक मुकेश भारद्वाज ने।

सत्यपाल सिंह (सोर्स- आरुष चोपड़ा)

सत्यपाल सिंह का जन्म 29 नवंबर, 1955 को हुआ। इन्होंने जनता वैदिक कॉलेज बड़ौत और नागपुर विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की। मुंबई के पुलिस आयुक्त के तौर पर चर्चित हुए। सोलहवें लोकसभा चुनाव के पहले पुलिस सेवा से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी के सदस्य बने। बागपत सीट से अजित सिंह को हरा कर भाजपा के सांसद बने। वर्तमान में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री हैं और उच्च शिक्षा विभाग का कार्यभार संभाल रहे हैं। इसके अलावा इनके पास प्रधानमंत्री की अहम योजना ‘गंगा पुनर्विकास मिशन’ का भी कार्यभार है। राष्ट्रीय सुरक्षा और पठन-पाठन के विषयों पर गहन अध्ययन किया है, और इन विषयों पर मुखर होकर बोलते-लिखते हैं।

मनोज मिश्र : आज जो हालात हैं, उसमें आपको क्या लगता है कि युद्ध अनिवार्य है?
सत्यपाल सिंह : युद्ध तो अंतिम विकल्प होता है किसी भी देश के लिए, किसी भी समाज के लिए। दुनिया भर के सभ्य और लोकतांत्रिक समाज में आम लोगों की सोच है कि अगर बिना युद्ध के हम समस्याओं को सुलझा सकें, तो वही बेहतर है। सौभाग्य की बात है कि आज पुलवामा हमले के बाद जिस तरह सारा देश दुख और आक्रोश में था, सारा देश प्रधानमंत्रीजी के साथ खड़ा था, अच्छी बात है कि विपक्ष भी साथ था। कम से कम इस विषय पर लोगों ने राजनीति नहीं की, यह अच्छी बात है। और अब लोगों में खुशी भी है कि हमने शहादत का बदला लिया है। फिर जिस तरह से पाकिस्तान के ऊपर अंतरराष्ट्रीय दबाव चल रहे हैं, उन्हें अलग-थलग होने का बड़ा खतरा है, तो मुझे लगता है कि आगे चल कर ज्यादा समझदारी से काम लेंगे।

अनिल बंसल : क्या आपको लगता है कि वहां जो आतंकवादियों के अड्डे हैं, उन पर पाकिस्तान को कोई निगरानी रखनी ही पड़ेगी?
’यह तो करना ही चाहिए। मुझे लगता है कि दबाव के कारण जहां सरकार करेगी, आतंकवादियों का जितना नुकसान हो सकता है, वे लोग भी करेंगे। जिस प्रकार से अंतरराष्ट्रीय दबाव है, उनको निगरानी रखनी चाहिए। आपको याद होगा कि जब अमेरिका में ट्विन टावर पर हमला हुआ था, उसके बाद से अमेरिका पहला देश है दुनिया में, जिसने पैट्रिएट कानून बनाया। इस कानून में यही बात लिखी हुई है कि कहीं से भी, जहां से आतंकवाद निकल कर आएगा, जहां से लोग आएंगे, जहां से प्रशिक्षण पा रहे होंगे, जहां से उन्हें वित्तीय मदद मिल रही होगी, वहां हमें हमला करने का अधिकार होगा। मगर पिछले कुछ वर्षों में हमारे यहां जिस प्रकार की सत्ता रही और आतंकवाद के प्रति हमने अलग-अलग रुख अपनाए रखा- कोई भगवा आतंकवाद बोलने लगा, कोई कुछ और बोलने लगा। इससे आतंकवाद पर काबू पाने में दिक्कतें आई हैं। पहले आतंकवाद की परिभाषा तो तय हो कि आतंकवाद है क्या? जिन्हें हम आतंकवादी कहते हैं, दुनिया के कुछ देश उन्हें स्वतंत्रता सेनानी कहते हैं। इसलिए पहले तो उन लोगों को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करो, जो अंतरराष्ट्रीय रडार पर हैं। हमारी सरकार इसी के लिए लगी हुई है।

मुकेश भारद्वाज : क्या अपने देश में भी ऐसे कानून की जरूरत है?
’मुझे लगता है कि बिना कानून के भी हमारी सरकार ने जो कर दिखाया है, वह सबके सामने प्रत्यक्ष है। पिछले चार वर्षों से संयुक्त राष्ट्र के स्तर पर भी भारत इसके लिए सतत प्रयत्न कर रहा है। कितना कुछ इस पर बोला जा रहा है, लिखा जा रहा है। जहां भी प्रधानमंत्री जा रहे हैं, विदेशमंत्री जा रही हैं, इसी बात पर जोर दिया जा रहा है।

मृणाल वल्लरी : पुलिस सेवा में रहते हुए आपने ‘आॅपरेशन मृत्युंजय’ जैसा अभियान शुरू किया था, जिसमें युवाओं को सतर्क और संवेदनशील बनाने का प्रयास किया गया था। क्या आज के संदर्भ में भी वैसे अभियान की जरूरत है?
’मैंने इस अभियान की शुरुआत 2007 में की थी। तब देश में कई ऐसी आतंकवादी घटनाएं घटी थीं। आप पूरी दुनिया में आतंकवाद का इतिहास देखें, तो पता चलेगा कि ज्यादातर युवा क्यों आतंकवादी बन रहे हैं। ऐसा नहीं कि कम पढ़े-लिखे या अनपढ़ लोग आतंकवादी बन रहे हैं। बहुत पढ़े-लिखे, बुद्धिजीवी किस्म के लोग- इंजीनियर, डॉक्टर वगैरह भी आतंकवादी बन रहे हैं। तो, मुझे ऐसा लगा कि अगर हम बच्चों के ऊपर ऐसा प्रभाव डाल सकें, उन्हें हम बता सकें कि आतंकवाद से दुनिया को कितना नुकसान हो रहा है, मजहब के नाम पर समाज को बांटना कितना गलत है, तो एक बड़ा काम होगा। मैं कहता हूं कि आतंकवाद की जड़ बाहर नहीं है, यह पहले दिमाग में पनपता है। इसलिए जो चीज दिमाग में पनप रही है, अगर अपराध दिमाग में पनप रहा है, तो उसे बदलने की जरूरत है। तो, बच्चों में हमारा अभियान काफी सफल रहा। हमने बच्चों को इस तरह तैयार किया था कि उन्हें कहीं भी आतंकवाद दिखाए दे, तो वे उसकी सूचना दें। आज जरूरत है कि सुरक्षा हमारा धर्म होना चाहिए। हम मंदिर-मस्जिद जाएं न जाएं, पर सुरक्षा को लेकर सतर्कता हममें सदा होनी चाहिए। इससे हाईस्कूल से ऊपरी कक्षाओं के बच्चे बहुत प्रभावित हुए।

दीपक रस्तोगी : पुलवामा पर आतंकवादी हमले से एक बार फिर जाहिर हुआ है कि बिना स्थानीय लोगों की मदद के, आतंकवादी सफल नहीं हो सकते। कश्मीर में इस हालात को कैसे रोका जा सकता है?
’मात्र दो-चार आतंकवादियों को मार देने से समस्या हल नहीं होने वाली। जब तक लोगों के दिमाग में कट््टरवाद रहेगा, तब तक यह समस्या नहीं खत्म होगी। पहले इस कट्टर विचारधारा को खत्म करना होगा। कश्मीर में जो आतंकवाद शुरू हुआ वह पहले बच्चों के दिमाग में भरा गया। वहां स्कूलों, कॉलेजों, मदरसों के अंदर बताया गया। फिर जब उसकी पौध तैयार हो गई, तब लोगों को लगा कि आतंकवाद शुरू हो गया। स्थानीय मदद के बिना इन लोगों को कामयाबी नहीं मिल सकती। कोई न कोई तो होगा, जो उन्हें सूचनाएं देता होगा। आतंकवादियों को सूचना पहुंचाने वालों, उन्हें प्रशिक्षण देने वालों, उन्हें वित्तीय मदद पहुंचाने वालों पर भी नियंत्रण करना होगा।

अजय पांडेय : एक बार फिर से धारा तीन सौ सत्तर हटाने की बात हो रही है। क्या इसे हटाया जाना चाहिए?
’यह बात भारतीय जनता पार्टी के घोषणापत्र में थी। अब जनता इसकी मांग उठा रही है। मुझे लगता है कि सही निर्णय सरकार लेगी।
अनिल बंसल : कश्मीर से जो लोग छोड़ कर आए वही अब वहां जाने को तैयार नहीं हैं, तो फिर वहां कौन जाना चाहेगा?
’दरअसल, वहां ऐसी परिस्थिति का निर्माण ही नहीं हो पाया कि लोग वहां जाकर बसें। आप एक समूह को ले जाकर वहां बसाना चाहते थे। अगर वहां एक सामान्य माहौल बन जाए कि दूसरे लोग भी जाकर बसें, तो माहौल निस्संदेह बदल जाएगा।

पंकज रोहिला : आप बागपत सीट से हैं। वहां गन्ना किसानों में भुगतान को लेकर असंतोष है। इस पर आपकी क्या रणनीति है?
’आपको जानकर बड़ी खुशी होगी कि पहली बार वहां के गन्ना किसानों का पूर्ण भुगतान हो गया है, दो दिन पहले। अभी तक ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसानों का समय पर भुगतान हुआ हो। लोग गन्ना भुगतान को लेकर राजनीति किया करते थे। पर इस बार पूरा भुगतान हुआ है। हम किसानों के साथ खड़े रहे, इसलिए दबाव बना और मिल को भुगतान करना पड़ा।

मनोज मिश्र : किसान बार-बार सड़कों पर उतरे हैं। किसानों की माली हालत सुधारने के लिए आपकी सरकार क्या प्रयास कर रही है?
’बागपत का किसान सड़कों पर नहीं उतरा है। इस सरकार ने नियम बनाया कि अगर प्राकृतिक आपदा से पूरे गांव में एक भी किसान का नुकसान होता है, तो उसे मुआवजा मिलेगा। इसके लिए पटवारी, तहसीलदार के पीछे भागने की जरूरत नहीं। फोटो खींचो और भेज दो, आपको मुआवजा मिलेगा। इस सरकार से पहले यूरिया उत्पादन की सीमा तय कर रखी थी, इसलिए कि वह यूरिया किसानों के अलावा दूसरे लोग ले जाते थे। किसानों को यूरिया नहीं मिल पाती थी। हमारी सरकार ने यूरिया उत्पादन की सीमा हटा दी। सात कारखाने बंद थे, उन्हें भी खोल दिया गया। फिर यूरिया को नीम लेपित कर दिया, इससे उसका दुरुपयोग बंद हो गया। इस तरह पूरे देश में कहीं भी यूरिया की किल्लत नहीं हो रही। उसकी कीमत भी कम हुई है। किसानों को स्वाइल कार्ड जारी किए गए हैं। सबसिडी किसानों के खातों में भेजी जाने लगी। अभी प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना शुरू हुई है। देश के बानबे फीसद किसान गरीब हैं, उनकी दो रुपए में बीमा की योजना चल रही है। जनधन खाते खोले गए। सिंचाई की सतहत्तर बड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। स्वामिनाथन समिति की रिपोर्ट जो इतने समय से लंबित थी, उसे लागू कर दिया गया है। तो, इतना जो काम हुआ है उसका फायदा किसानों को तो मिल ही रहा है। हमारी सरकार मानती है कि बिना किसानों के खुशहाल हुए देश में खुशहाली नहीं आ सकती।

मृणाल वल्लरी : अभी विश्वविद्यालयों में तेरह प्वाइंट रोस्टर का जो मामला चल रहा है, क्या सरकार उस पर अध्यादेश लाएगी?
’सरकार इस बात पर प्रतिबद्ध है कि किसी भी वर्ग को नुकसान नहीं होना चाहिए। आरक्षण के मामले में किसी को नुकसान नहीं होना चाहिए। इसलिए लोगों के हित में जो भी जरूरी कदम उठाना होगा, वह सरकार उठाएगी।

अजय पांडेय : उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच हुए गठबंधन को क्या आप भाजपा के लिए कोई बड़ी चुनौती मानते हैं?
’आज भाजपा सबसे सशक्त पार्टी है, कैडर बेस्ड पार्टी है। ये जो दूसरी पार्टियां हैं, आपको मालूम है कि वे कैसी हैं। इनकी विचारधारा में कोई साम्य नहीं है, एक-दूसरे को जेल में डालने की बात करते हैं। भाजपा इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि हमें इक्यावन फीसद वोट मिलने चाहिए, वह इसके लिए प्रयास कर रही है।

मुकेश भारद्वाज : पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने पिछले दिनों की घटनाओं को आसन्न आम चुनावों से जोड़ कर पेश किया है। मगर हमारे यहां जो सभी विपक्षी दलों की बैठक हुई उसमें उन्होंने सरकार का समर्थन किया, पर उन्होंने दबे स्वर में यही कहा कि इन घटनाओं का राजनीतिकरण किया जा रहा है। इसे आप कैसे देखते हैं।
’जहां देश की सुरक्षा का प्रश्न है, जहां हमारी फौज का प्रश्न है, हमारे जवानों का प्रश्न है, वहां कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। हमारी सरकार मानती है कि देश पहले है, पार्टी बाद में है।

पंकज रोहिला : गंगा सफाई योजना में अभी कुछ कमियां रह गई हैं। उन्हें दूर करने का क्या प्रयास हो रहा है?
’आप एक बार कुंभ में जाकर देखें, वहां एक भी व्यक्ति अगर कहे कि पानी शुद्ध नहीं था, तो फिर कहिएगा। वस्तुस्थिति यह है कि प्रदूषण काफी हद तक दूर हुआ है। अभी तक हमने जितनी भी परियोजनाएं शुरू की थीं उनमें से सत्तासी फीसद पूरी हो चुकी हैं। हमारे वरिष्ठ मंत्री गडकरी जी ने कहा है कि अभी पानी नहाने लायक है, कुछ समय बाद पानी आचमन के लायक होगा। हम सिर्फ गंगा पर काम नहीं कर रहे, चालीस सहायक नदियों पर काम कर रहे हैं। तेरह और परियोजनाएं चालू की हैं। तो, हम लोग इस विषय में बहुत गंभीर हैं।

अनिल बंसल : नदी जोड़ योजना की दिशा में काम आगे क्यों नहीं बढ़ पाया?
’यह तय हुआ था कि तीन महीने में केन-बेतवा जोड़ परियोजना का शिलान्यास हो जाएगा। लेकिन दोनों राज्यों के बीच कुछ विवाद शुरू हो गया, जिसके चलते थोड़ी देर हो गई। गुजरात में भी कार्य प्रगति पर है। काफी काम प्रगति पर है।

अजय पांडेय : कश्मीर से पाकिस्तान को मिलने वाले पानी को भी अपनी नदियों में मिलाने की बात चल रही है? क्या इस दिशा में सरकार सोच रही है?
’इस विषय में काफी गंभीरता से चिंतन हो रहा है। सिंधु जल बंटवारे का जो समझौता हुआ था उसमें तीन नदियों का 135 मिलियन फुट पानी पाकिस्तान को चला जाता है और हमें सिर्फ 33 मिलियन फुट पानी मिल पाता है। हमारी सरकार यह कह रही है कि हमारा जो पानी है, वह तो हमें मिले। हमारे किसानों के काम आए, पीने के काम आए, उद्योगों के काम आए।

मुकेश भारद्वाज : मगर अभी इस पर क्यों जोर दिया जाने लगा है? पांच साल तक इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया?
’मैं तो जबसे इस मंत्रालय में आया हूं, तबसे इस पर काम चल रहा है। असल में दिक्कत यह हुई कि जम्मू-कश्मीर में पहले जो सरकार थी उसने अपनी बनाई योजना पर ठीक से काम नहीं किया। इसलिए उस परियोजना में थोड़ी देर हो गई।

सूर्यनाथ सिंह : क्या आपको नहीं लगता कि अपराध पर काबू पाने के लिए भय का सहारा लेने के बजाय रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना ज्यादा जरूरी है?
’रोजगार की तरफ तो ध्यान देना ही पड़ेगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जो बेरोजगार हैं, वही आतंकवादी बनते हैं। आतंकवादी बनने के पीछे गरीबी कारण नहीं है। पर रोजगार के अवसर तो उपलब्ध कराने ही पड़ेंगे, क्योंकि जिसके पास रोजगार नहीं है, उसे कोई पैसा दे तो वे अपराध में शामिल हो जाए। इसलिए हमारी शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो संस्कार भी दे और रोजगार भी दे सके। हमारी सरकार इसी दिशा में आगे बढ़ रही है। युवाओं के रोजगार के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं। तेरह करोड़ युवाओं को मुद्रा योजना के तहत रोजगार प्रदान किए गए हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App