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बारादरीः पूर्ण राज्य का दर्जा चाहते ही नहीं केजरीवाल

भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी का आरोप है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री आरोप तो लगाते हैं, लेकिन मुद्दे सुलझाने के लिए बातचीत की मेज पर नहीं आते। उनका कहना है कि अरविंद केजरीवाल चाहते ही नहीं हैं कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले। उत्तर प्रदेश को लेकर बिधूड़ी ने कहा कि पहली बार की […]

रमेश बिधूड़ी का जन्म 18 जुलाई, 1961 को दिल्ली में हुआ। दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री ली।

भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी का आरोप है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री आरोप तो लगाते हैं, लेकिन मुद्दे सुलझाने के लिए बातचीत की मेज पर नहीं आते। उनका कहना है कि अरविंद केजरीवाल चाहते ही नहीं हैं कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले। उत्तर प्रदेश को लेकर बिधूड़ी ने कहा कि पहली बार की तरह मायावती को एक बार फिर भाजपा के साथ आ जाना चाहिए। बातचीत का संचालन किया कार्यकारी संपादक मुकेश भारद्वाज ने।

मनोज मिश्र : दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार है, आपकी पार्टी कहती है कि वे लोग काम नहीं कर पा रहे, पर आम लोगों तक यही संदेश पहुंचाने में आप सफल क्यों नहीं हो पा रहे?

रमेश बिधूड़ी : नहीं, आम लोगों को भी पता है कि वे कुछ नहीं कर पा रहे। पर अरविंद केजरीवाल एक चीज में माहिर हैं, कि गरीब तबके का किस प्रकार भावनात्मक दोहन किया जा सकता है। वे जानते हैं कि वे पांच सौ स्कूल नहीं बना सकते, दो सौ कॉलेज नहीं बना सकते, पर चूंकि पिछले करीब चार दशक से देश की राजनीति गरीबी हटाओ के नारे पर चलती रही है, तो लोगों को लगता है कि जो सबको भ्रष्ट बता रहा है, वही गरीबी हटा सकता है। वे सबको चोर बताते रहे, लोगों को लगा कि सभी पार्टियों को देख लिया, इन्हें भी देखते हैं। इस तरह प्रयोग के रूप में लोगों ने उन्हें वोट दिया था। अब लोग उन्हें जान गए हैं। अब वे उन्हें नकारना शुरू कर चुके हैं।

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राजेंद्र राजन : दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग भाजपा ने उठाई थी, कई चुनावों में उसे दोहराती भी रही। उस वादे को पूरा करने के लिए भाजपा क्या कर रही है?

’अब केजरीवाल साहब जो भाषा बोलने लगे हैं, वह भाषा उनकी मुख्यमंत्री बनने से पहले नहीं थी। जब शीला दीक्षित की सरकार थी, तब वे बोलते थे कि शीला जी, जो व्यवस्था आपको मिली हुई है, उसमें आप काम नहीं कर पा रहीं, आप लाचार हैं। अगर आप लाचार हैं, तो इस्तीफा क्यों नहीं दे देतीं। अगर केजरीवाल साहब तब भी बोलते कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दो, तो बात समझ में आती। अगर केजरीवाल साहब टेबल पर बैठ कर इसके लिए बात करें तो बात कुछ आगे बढ़े, मगर वे तो बस आरोप लगाते फिर रहे हैं। इसके लिए ठीक से पहल कभी की ही नहीं। सभी लोगों के साथ बैठ कर बात तो करते, पर नहीं की। वे पूर्ण राज्य का दर्जा चाहते भी नहीं। भाजपा चाहती है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले, पर इसके लिए दिल्ली सरकार को भी तो आगे आना चाहिए।

अजय पांडेय : अब चुनाव सामने है और आम आदमी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन की बात होने लगी है। इसे आप कैसे देखते हैं?

’अगर वे सोचते हैं कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी साथ हो जाएंगी, तो उन्हें फायदा होगा, तो वे गलत हैं। उन्हें कोई लाभ नहीं होगा। दिल्ली में तो कतई नहीं हो सकता। क्योंकि केजरीवाल की विश्वसनीयता खत्म हो चुकी है। जिस केजरीवाल ने बच्चों की कसम खाकर कहा था कि मैं कांग्रेस के साथ कभी नहीं जा सकता, उन्होंने पहली बार उससे हाथ मिला लिया। अब अगर वे कांग्रेस से हाथ मिलाते हैं, तो वोट वहां से खिसक जाएगा। कांग्रेस के कार्यकर्ता बेशक उनके साथ चले जाएं, पर वोटर उनका साथ नहीं देगा। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और सपा गठबंधन का परिणाम इसका प्रमाण है। जो प्रतिबद्ध कांग्रेसी थे, वे भी कांग्रेस का साथ छोड़ गए। उन्होंने भाजपा को वोट दिया। अगर कांग्रेस अपनी विचारधारा से समझौता करेगी, तो मतदाता उस विचारधारा के साथ कतई समझौता नहीं करेगा। इस तरह आप कैसे कह सकते हैं कि कांग्रेस का वोट ‘आप’ को चला जाएगा!

पारुल शर्मा : दिल्ली में विकास कार्य शिथिल क्यों पड़े हुए हैं।

’मैं ऐसा बिल्कुल नहीं मानता कि काम नहीं हो रहा। बाकी के छह सांसद अपना रिपोर्ट कार्ड खुद देंगे, पर मैं अपना दे सकता हूं। इन चार सालों में अपने क्षेत्र में इक्कीस सामुदायिक भवन मैंने बनवाए, प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान के तहत डेढ़ सौ पार्क बनवाए, जो पहले जंगल थे। दो सौ खुले जिम लगवा दिए हैं। आप जाकर देखें कि पहले रेलवे स्टेशनों की स्थिति क्या थी और अब क्या है। पालम और तुगलकाबाद स्टेशनों को देखें, आज वातानुकूलित प्रतीक्षालय हैं। तो, पिछले पच्चीस-तीस सालों में जो नहीं हुआ, वह अब हुआ है। मेट्रो के चौथे चरण की परियोजना की फाइल केजरीवाल साहब ने दबा कर रखी हुई है, पर हमने अपने प्रयास से उसे मंजूर करवाया।

आर्येंद्र उपाध्याय : इस समय आम चुनाव की तैयारियां चल रही हैं और सारा विपक्ष आपके खिलाफ एकजुट हो रहा है। अगर वह एकजुट हो गया, तो आप उससे कितना निपट पाएंगे?

’सबसे बड़ा मुद्दा तो यही है कि पिछले चुनाव में प्रधानमंत्री जी ने वादा किया था कि हम भ्रष्टाचार मुक्त सरकार देंगे। इन चार सालों में इस सरकार पर एक पैसे के भी भ्रष्टाचार का आरोप नहीं है। इस समाज में जो उपेक्षित वर्ग था, अनुसूचित जाति का वर्ग था, चार करोड़ लोगों को चूल्हे की गैस का कनेक्शन दे देना छोटी-मोटी उपलब्धि नहीं है। हम अगले चुनाव में उस गरीब आदमी से पूछेंगे, इसके लिए किसी राहुल गांधी या दूसरे नेताओं से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। हमें उन तीन करोड़ लोगों से प्रमाणपत्र लेने हैं, जिन्हें बिजली के कनेक्शन मिले हैं। पिछली बार हमें करीब दस करोड़ वोट मिले थे। अब हमने करीब बीस करोड़ लोगों को तो सीधे लाभ पहुंचाया है। करीब बारह करोड़ लोगों के मुद्रा बैंक खाते खुले हैं। पांच करोड़ लोग तो वे हैं, जिन्होंने पहली बार लोन लिया है। तो जिन पांच करोड़ नौजवानों को रोजगार मिल गया, वे मोदीजी को कैसे भूलेंगे। मैं यह नहीं कहता कि सौ फीसद काम कर दिया है, पर सत्तर फीसद कर दिया है। लोग पंद्रह लाख रुपए की बात पूछते हैं। प्रधानमंत्रीजी ने हर मध्यवर्ग, निम्न मध्यवर्ग परिवार के खाते में पंद्रह लाख रुपए भेज दिए हैं। वह दिखाई नहीं दे रहा, तो मैं क्या कहूं! बारह रुपए में दो लाख का सुरक्षा बीमा, पांच लाख रुपए आयुष्मान योजना से मेडिकल बीमा, सुकन्या योजना में साढ़े छह लाख रुपए, इस तरह आप देखें तो दूसरे तरीकों से पैसा तो मिल रहा है न!

मृणाल वल्लरी : इन सबके बावजूद भाजपा सारे उपचुनाव हार रही है।

’उपचुनाव से किसी पार्टी की स्थिति स्पष्ट नहीं होती। दूसरी बात, वोट और फीसद देखने की जरूरत है। जो योगी जी की सीट हमने हारी है, तो आप देखें कि वहां उनतालीस फीसद मतदान हुआ और उसमें पचास फीसद वोट हमें मिले। अगर जातीय समीकरण वहां नहीं होता, हमारी क्या स्थिति होती, आप अंदाजा लगा सकते हैं। हां, कर्नाटक में हमसे थोड़ी चूक हुई। वहां करीब दस सीटों पर हम मामूली अंतर से हारे हैं और उन सीटों पर पांच हजार से नौ हजार नकली वोट मिले हैं। उस फर्जी वोट को हम नहीं रोक पाए होंगे, किसी कारण से। लेकिन वहां हम चालीस से कितनी सीट पर आ गए, वह लोगों को नहीं दिख रहा है!

दीपक रस्तोगी : कैराना उपचुनाव में भाजपा को अपेक्षित नतीजे नहीं मिले। इसे आप कैसे देखते हैं?

’आप वहां जाकर सर्वे कीजिए, जिस समुदाय का प्रतिनिधि वहां से जीता है, उसी समुदाय के आठ से दस फीसद लोगों ने हमें वोट दिया है। वहां दूसरी पार्टियों के लोग इकट्ठा हो गए, मतदान फीसद कम हो गया, उसके बावजूद हम एक-दो फीसद वोट से चुनाव हारे हैं। जहां का मतदाता चालीस फीसद मुसलिम हो, वहां इतने कम फीसद का अंतर मायने रखता है। इसलिए हम वहां चुनाव हारे नहीं हैं। आने वाले चुनाव में इसके नतीजे आपको दिखाई देंगे।

पारुल शर्मा : इस वक्त पूरे देश में महिलाओं की सुरक्षा खतरे में है। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?

’यह चिंता की बात है। सवा सौ करोड़ का देश है। एक परिवार में पैदा हुए दो बच्चे भी समान नहीं होते। तो, मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों की करतूतों को सरकार, प्रधानमंत्री पर नहीं डाल सकते। निर्भया मामले के बाद कानून को इतना सख्त बना दिया गया, फिर भी ऐसे लोग बाज नहीं आ रहे, तो उसका दोष कानून पर नहीं डाल सकते।

मनोज मिश्र : अगर उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा मिल गर्इं, तो भाजपा की सीटें तो आधी हो जाएंगी। फिर आप उससे कैसे पार पाएंगे?

’नहीं होंगी, सीटें आधी नहीं होंगी। कुछ सीटों पर फर्क जरूर पड़ेगा- पंद्रह से सत्रह सीटों पर पड़ेगा- मैं मानता हूं। उसमें भी कुछ सीटें ऐसी हैं, जैसे आगरा जाटव समाज की राजधानी है, पर वहां भी लोगों ने बसपा को छोड़ कर भाजपा को वोट दिया। तो, 2019 का जो चुनाव होगा, वह राष्ट्र को लेकर होगा, जाति या दूसरी चीजों को लेकर नहीं।

मुकेश भारद्वाज : तो यह माना जाए कि 2019 में जनता राष्ट्रवाद पर मुहर लगाएगी?

’देश में आज भी लोग राष्ट्रवाद के पक्ष में हैं। हां, उस समय मुहर लग जाएगी। स्पष्ट हो जाएगा कि अवसरवाद की राजनीति नहीं चलेगी।

मनोज मिश्र : आम चुनाव से पहले राम मंदिर बनेगा क्या?

’यह मामला अदालत के अधीन है। पर, सारे विपक्षी दल राम मंदिर को लेकर बड़े परेशान हैं। वे कहते हैं कि इस पर भाजपा कुछ बोले, संसद में विधेयक लेकर आए। मगर जब तक अदालत का फैसला नहीं आ जाता, हम कुछ कैसे कर सकते हैं। अगर हमारी साढ़े तीन सौ सीटें आ गई होतीं, तो हम कर देते, इसका भी निपटारा।

अजय पांडेय : आपकी पार्टी के एक नेता आठवले साहब ने मायावती से आग्रह किया है कि वे भाजपा के साथ हाथ मिला लें। क्या ऐसा हुआ तो आप मायावती को स्वीकार करेंगे?

’जो लोग भी भाजपा की विचारधारा के साथ चलेंगे हम उन्हें खुशी से स्वीकारेंगे। मैं आज खुद यह अपील करता हूं कि मायावती भाजपा की विचारधारा अपना लें, हम उनका स्वागत करते हैं। वे शायद भूल गई हैं कि हमने ही उन्हें पहली बार माला पहनाई थी।
रमेश बिधूड़ी – रमेश बिधूड़ी का जन्म 18 जुलाई, 1961 को दिल्ली में हुआ। दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री ली। इन्हें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में जमीनी नेता के रूप में देखा जाता है। 2003 से मई 2014 तक दिल्ली विधानसभा के सदस्य रहे। दक्षिणी दिल्ली की सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं। सोलहवीं लोकसभा में शहरी विकास की स्थायी समिति, अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण की स्थायी समिति तथा केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की मंत्रणा समिति के सदस्य हैं। राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड और आकलन समिति के भी सदस्य हैं। इसके साथ ही भाजपा के उत्तर प्रदेश मामलों के सह-प्रभारी हैं।

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