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बारादरी: मुफ्त मेट्रो यात्रा महज चुनावी हथकंडा

दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता का कहना है कि अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली आम आदमी पार्टी की सरकार का लक्ष्य काम करना है ही नहीं। सिर्फ विवादों और टकराव को बढ़ावा देने वालों को सरकार चलाने का कोई हक नहीं है। महिलाओं को मेट्रो ट्रेन की मुफ्त यात्रा के फैसले को उन्होंने चुनावी हथकंडा बताते हुए कहा कि यही इंतजाम पहले बसों में करके देख लें। बसों में तो बहुत आसान है कि महिला सवारी को देख कर टिकट नहीं लिया जाए। बातचीत कार्यक्रम का संचालन किया कार्यकारी संपादक मुकेश भारद्वाज ने।

बारादरी की बैठक में विजेंद्र गुप्ता (सभी फोटो : आरुष चोपड़ा)

मुकेश भारद्वाज : मेट्रो में महिलाओं को मुफ्त यात्रा का जो फैसला किया गया है, उस पर आपका क्या कहना है?
विजेंद्र गुप्ता : पहली बात तो यह कि महिलाओं ने बड़े स्वाभिमान के साथ इस फैसले को नकार दिया। जागरूक महिलाओं ने इसे चुनावी कदम करार देते हुए महिलाओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ बताया है। दूसरी बात कि केजरीवाल जी झूठ बोल रहे हैं। उनका कहना है कि इस फैसले से मेट्रो में मुसाफिरों की संख्या बढ़ेगी, जबकि हकीकत यह है कि मेट्रो क्षमता से अधिक यात्रियों को ढो रही है। क्या इन्होंने मेट्रो के फेरे बढ़ाने की बात की? भीड़ बढ़ने से जो दिक्कतें पेश आ सकती हैं, उनसे पार पाने के क्या इंतजाम किए हैं? बस लोगों को लुभाने की मंशा से एक बात कह दी, जिसके लिए पहले से कोई तैयारी नहीं है। इसमें वे महिलाओं की सुरक्षा की बात कर रहे हैं। मैं पूछता हूं कि उन्होंने दिल्ली में अंधेरी जगहें खत्म करने की बात की थी, उनमें से कितनी जगहें खत्म हो गर्इं? दूसरी, जो महिलाओं की दिक्कत है, वह है लास्ट माइल कनेक्टिविटी की यानी महिला अपने घर से चले और गंतव्य तक ठीक से पहुंच जाए। क्या वह घर से निकलती है तो उसे हर जगह पहुंचने के साधन उपलब्ध हैं? महिलाओं को जो वास्तव में आवश्यकता है, वह तो दे नहीं रहे, मुफ्त की यात्रा कराने का सपना परोस रहे हैं! इससे बुरा फैसला कोई हो नहीं सकता।

मनोज मिश्र : दिल्ली विधानसभा चुनाव के समय से पहले होने की भी बात हो रही है। इसमें कितनी सच्चाई है?
’यह सिर्फ आम आदमी पार्टी की एक चाल है। बिना तथ्यों के, बिना किसी आधार के लोगों को गुमराह करो और फिर उस पर राजनीति की रोटियां सेंको। समय से पहले चुनाव की बात खुद आम आदमी पार्टी ने कही है। ऐसा कह कर वे उसका राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश भी कर रहे हैं। अभी तक कोई भी ऐसा कारण नजर नहीं आता कि कोई कहे कि समय से पहले चुनाव होंगे। यह निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है और वह संविधान की परिधि में रह कर अगर अपने अधिकार का प्रयोग करेगा, तो वह राजनीतिक दलों को विश्वास में लेकर करेगा। मगर पहले से ही निर्वाचन आयोग को भी एक पक्षकार बना दो, उसे राजनीतिक पार्टी की तरह पेश कर दो और फिर खुद को बेसहारा दिखा कर लोगों का भावनात्मक दोहन करो, यह उचित नहीं कहा जा सकता।

अजय पांडेय : इक्कीस सालों से भाजपा दिल्ली में सत्ता से बाहर है। क्या वजह है कि दिल्ली में भाजपा को लोग नहीं चुनते?
’ऐसा नहीं है, यह एक संयोग है। पिछली बार, 2013 में हमारे बत्तीस सदस्य जीत कर आए थे। बहुमत के बहुत करीब थे हम। सबसे बड़ी पार्टी थे। मगर कांग्रेस की स्थिति तो बहुत भयावह है। पंद्रह साल सत्ता में रहने के बावजूद आज दिल्ली विधानसभा में उसका एक भी सदस्य नहीं है। हां, हम इस बात को स्वीकार करते हैं कि इक्कीस साल से सरकार में नहीं हैं। पर लोग अब विकास चाहते हैं। देश के लोगों ने मोदी जी पर जैसा भरोसा किया है, एक बार दिल्ली भी देकर देखेंगे।

मुकेश भारद्वाज : आप लोग अक्सर अपनी तुलना कांग्रेस से करते हैं कि हम नहीं हैं तो वह भी तो नहीं है। यह बात समझ में नहीं आती कि ऐसा क्यों करते हैं!
’नहीं, मैंने तो सिर्फ इसलिए कहा कि हम इक्कीस साल से नहीं हैं, पर जो लोग पंद्रह साल सत्ता में रहे, उनका हश्र यह हुआ कि उनका एक भी सदस्य विधानसभा में नहीं है। कांग्रेस को तो हमने हमेशा से भ्रष्टाचार की जननी माना है। मगर केजरीवाल हैं, जो एक बार उसे भ्रष्टाचार की जननी मानते हैं और दूसरी बार उससे हाथ मिलाते हैं। हमारा तो मुख्य विरोधी दल कांग्रेस रहा है, है और रहेगा। पर केजरीवाल की विश्वसनीयता इतनी गिर गई है कि कहना मुश्किल है कि कब वे कांग्रेस में मिल जाएं या कब दोनों मिल कर चुनाव लड़ने लगें। हम मानते हैं कि दोनों एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं।

मृणाल वल्लरी : मगर आम आदमी पार्टी के कई नेता भाजपा में आकर शामिल हो रहे हैं। उसे आप किस तरह देखते हैं? भ्रष्टाचार के आरोपियों को भी शामिल करने में कोई गुरेज नहीं है।
’सागर में जो भी आकर मिलेगा, वह सागर के रंग में रंग जाएगा। मैं तो कहता हूं कि अगर सुबह का भूला शाम को घर लौट आए, तो उसे भूला नहीं कहते। अगर कोई गलत पार्टी में चला गया था और उसने देखा कि वास्तविकता में वह पार्टी ठीक नहीं थी, और हमारे यहां आता है, तो उसका स्वागत है। दूसरी बात यह कि भाजपा ने एक ऐसी मिसाल कायम की है कि पांच साल सत्ता में रहते हुए भी उस पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा। लोगों की भाजपा से उम्मीद है कि अगर कोई पार्टी भ्रष्टाचार मुक्त सरकार दे सकती है, अगर किसी पार्टी में भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टालरेंस है, तो वह भाजपा ही है। आज की राजनीति के दलदल में अगर कोई कमल की तरह है, तो वह भाजपा ही है। इसीलिए आज हम पहले से ज्यादा सीटें जीत कर आए हैं। लोगों ने हमारे नेता के पांच सालों के काम को देख कर दूसरा मौका दिया है।

आर्येंद्र उपाध्याय : पिछली बार ऐसा क्या हुआ कि केंद्र में तो आपकी सरकार बनी, पर दिल्ली में आप तीन पर सिमट गए?
’पिछली बार भी हमें करीब तैंतीस प्रतिशत वोट मिले थे। मगर कांग्रेस का पूरे का पूरा वोट आम आदमी पार्टी को चला गया और उसके अलावा बाकी दलों का वोट भी उसी को मिल गया। इस तरह उनका वोट प्रतिशत बढ़ा। संख्या हमारी जरूर कम थी, पर दिल्ली का एक बड़ा मतदाता वर्ग भाजपा से सहमत था। यह ठीक है कि उन्हें पचास प्रतिशत से अधिक वोट मिले, पर बत्तीस-तैंतीस प्रतिशत वोट हमको भी मिला। कांग्रेस दस प्रतिशत से भी नीचे आ गई। उनकी जो मुख्यमंत्री थीं, वे खुद भी चुनाव हार गर्इं। तो, हमारा जो एजंडा था, वह हमने लोगों के सामने रखा। यह अलग बात है कि केजरीवाल को लोगों ने एक बार मौका देने का फैसला किया।

मनोज मिश्र : क्या आपको नहीं लगता कि मुफ्त बिजली-पानी की राजनीति उनके काम आई?
’अब तो वे बेपरदा हुए हैं। उस समय वे नए थे और उन्होंने कहा कि हम आम आदमी हैं, पर वह बात विपरीत निकली। अब वे कांग्रेस से समझौता करने की बात कर रहे हैं। भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस की बात करने वाले भ्रष्टाचारियों को सरकार में रखे हुए हैं। उनके दो मंत्री आज भी आरोपों से घिरे हैं। चार मंत्री तो उन्होंने हटाए हैं। विधायकों का हाल यह है कि उनमें भ्रष्टाचार का कोई अंत नहीं है। पार्टी के नेताओं में भ्रष्टाचार का कोई अंत नहीं है। आज अगर ‘आप’ सरकार कहती है कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ है, तो लोग विश्वास नहीं करेंगे। आज केजरीवाल भ्रष्टाचार के खिलाफ इसीलिए नहीं बोल रहे, क्योंकि उनकी सरकार भ्रष्टाचार में डूबी हुई है। उन्होंने कहा कि हम लोकपाल लाएंगे, क्यों नहीं ला पाए?

सूर्यनाथ सिंह : आप कहते हैं कि दिल्ली सरकार काम नहीं कर रही और उनका कहना है कि केंद्र सरकार उन्हें काम नहीं करने दे रही। फिर उनका यह भी आरोप है कि जो काम निगम नहीं कर पा रहा, उसका ठीकरा भी उन्हीं के सिर फोड़ दे रहे हैं?
’पहली बात तो यह कि केजरीवाल साढ़े चार साल यह कहते रहे और उसका एक भी उदाहरण नहीं दे पाए, कि उन्हें काम करने से रोका जा रहा है। झूठा प्रचार करते रहे। वास्तविकता यह है कि किसी ने उन्हें काम करने से नहीं रोका। अपनी नाकामी छिपाने के लिए वे केंद्र सरकार को दोषी बताते रहे। कोई भी ऐसी संस्था नहीं रही, जिसे उन्होंने गाली न दी हो। मैं पूछना चाहता हूं कि यह जो झगड़े-झंझट की सरकार है, उसे हम जारी रखना चाहेंगे? अब लोग काम चाहते हैं, कोई बहाना, कोई विवाद नहीं चाहते। तो, सही बात यह है कि पांच साल इन्होंने प्रशासक की तरह काम नहीं किया। परफारमेंस इनका एजंडा ही नहीं था। इनका एजंडा राजनीति था, विवाद थे, टकराव था। जो सरकार में रह कर टकराव का रास्ता अपनाए, उसे सत्ता में आने का कोई अधिकार नहीं है। सरकार सिर्फ परफारमेंस के लिए होती है। जहां तक निगम की बात है, इन्होंने निगम को वित्तीय रूप से पंगु बना दिया। निगम चुनाव में लोगों ने उन्हें हराया, इसलिए उन्होंने निगम के अधिकार छीन कर अपने पास रख लिए। निगम का पैसा काट कर मुख्यमंत्री सड़क योजना में डाले, पर उसमें से एक भी पैसा आज तक खर्च नहीं हुआ।

अजय पांडेय : दिल्ली में ऐसा कौन-सा चेहरा है, जिसे सामने रख कर भाजपा विधानसभा चुनाव लड़ेगी?
’भारतीय जनता पार्टी इस बार पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगी। यह पार्टी की रणनीति होगी कि वह क्या नीति अपनाए। किस तरह जनता के सामने अपने आप को पेश करे। मगर लोग यह जानते हैं कि भाजपा में सुशासन की गारंटी है।

मनोज मिश्र : केजरीवाल ने कहा कि बिहार में फैले दिमागी बुखार में केंद्र सरकार कुछ नहीं कर रही, वहां दिल्ली सरकार मदद करेगी?
’पहले दिल्ली में तो कुछ करके दिखाएं। अपने यहां ‘आयुष्मान भारत’ योजना तो लागू कर नहीं रहे, वहां मदद करने जाएंगे। आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं करनी है, इसलिए झूठ बोलते हैं कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना यहां लागू है। जबकि कोई मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना नहीं है। वे कहते हैं कि मैं प्रधानमंत्री आवास योजना को दिल्ली में इसलिए नहीं लागू करूंगा, क्योंकि यहां मुख्यमंत्री आवास योजना है। जबकि इस नाम की कोई योजना ही नहीं है। उसकी न तो कोई रूपरेखा है, न कोई बजट है। वास्तविकता तो यह है कि दिल्ली सरकार केंद्र की योजनाओं से दिल्ली के लोगों को वंचित कर रही है और वह अपराध कर रही है। ईपीसी ने नक्शा दिया कि सड़कों का विकास होगा, तो दिल्ली में प्रदूषण कम होगा, आबादी की सघनता कम होगी, पर ये उसके लिए ढाई सौ करोड़ रुपए देने को तैयार नहीं थे, जबकि बजट साठ हजार करोड़ रुपए का है। इसके लिए तरह-तरह के बहाने बनाते रहे। इनका मकसद सिर्फ इतना है कि केंद्र की योजनाओं को दिल्ली में ठंडा करो।

दीपक रस्तोगी : भाजपा शासित राज्यों में भी स्वास्थ्य से लेकर तमाम सेवाओं की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।
’मैं दिल्ली तक अपनी बात सीमित रखना चाहता हूं। यहां कम से कम दो दर्जन अस्पताल केंद्र सरकार चलाती है, मगर कहने को स्वास्थ्य सेवाएं दिल्ली सरकार के पास हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के मद में उनके पास पैसा भी खासा है। मगर हकीकत यह है कि पिछले पांच सालों में यहां एक भी डिस्पेंसरी नहीं खुली। सिर्फ एक ही चीज गिनाते रहे-मुहल्ला क्लिनीक। इन्होंने दिल्ली के अस्पतालों में तीस हजार बिस्तर जोड़ने की बात कही थी, मगर तीन डिजिट में भी नहीं जोड़ पाए। यह मैं इकोनॉमिक सर्वे की बात बता रहा हूं। इन्होंने कहा कि हम पांच सौ स्कूल खोलेंगे, फिर बाद में कहा कि हम स्कूल इसलिए नहीं खोल पा रहे कि हमारे पास जमीन नहीं है। जबकि सौ के आसपास भूखंड आज भी हैं इनके पास, पर उन पर निर्माण नहीं हो सका। स्कूलों में नए कमरे बनाने के नाम पर भारी घोटाला हुआ है।

सूर्यनाथ सिंह : भाजपा हर चुनाव में नए लोगों को लाकर चुनाव लड़ाती है। दिल्ली में ऐसा होगा, तो उससे पार्टी कार्यकर्ताओं पर क्या असर पड़ेगा?
’भारतीय जनता पार्टी एक मिशन है। व्यक्तियों की महत्त्वाकांक्षाओं का केंद्र नहीं है। हमारे उद्देश्य बड़े हैं। हमारी पार्टी में जो भी फैसले किए जाते हैं, वे सर्वसम्मति से किए जाते हैं। सबको विश्वास में लेकर किए जाते हैं। यही वजह है कि देश में बहुत सारे लोगों को चुनाव में नहीं उतारा गया, लेकिन शायद ही कहीं कोई नाराजगी दिखी। आज कोई व्यक्ति कोई एक काम कर रहा है, कल उसे दूसरा काम दिया जाएगा, इसलिए चुनाव लड़ना या न लड़ना यह भी एक जिम्मेदारी का काम है। हम लोग जिम्मेदारी के साथ पार्टी में हैं। अगर हम अपने व्यक्तिगत एजंडे और महत्त्वाकांक्षाओं को ऊपर रखेंगे, तो यह तो दूसरी पार्टियों में हो ही रहा है, हम उनसे अलग कैसे हो सकते हैं!

अजय पांडेय : विधानसभा में बहसों का स्तर काफी गिरा है। आपको कैसा महसूस होता है?
’इसका जवाब तो केजरीवाल दे सकते हैं। जब नेता ही सदन की गरिमा को गिरा दे, तो बाकी लोग तो उसकी नकल करेंगे ही।

दीपक रस्तोगी : चुनाव खर्च की बात बार-बार उठती है। इस पर अंकुश लगाने का क्या प्रावधान हो सकता है।
’राजनीतिक पार्टी के तौर पर हमने इस मामले में इस पर काबू पाने के लिए अपने स्तर पर प्रयास किया है। हमने बहुत पारदर्शिता के साथ चंदे लिए और खर्च किए। हमने निर्वाचन आयोग के नियमों का अक्षरश: पालन किया। दूसरी पार्टियां भी अगर ऐसा करें, तो इस पर काबू पाना मुश्किल नहीं है।

विजेंद्रगुंप्ता
दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने 1983 में जनता विद्यार्थी मोर्चा के सचिव के तौर पर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। वर्ष 1984-85 के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के उपाध्यक्ष रहे। 1997 में रोहिणी से भाजपा के टिकट पर दिल्ली नगर निगम का चुनाव जीता। उन्होंने नगर निगम का चुनाव लगातार तीन बार जीता। इस बीच दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति के सदस्य से लेकर इसके अध्यक्ष तक बनाए गए। 2009 में भाजपा के टिकट पर चांदनी चौक संसदीय क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव भी लड़ा। हालांकि वह तब जीत नहीं दर्ज कर सके। 2010 में प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया। इस पद पर 2013 तक रहे। 2015 में हुए दिल्ली विधानसभा के चुनाव में रोहिणी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की और दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता बनाए गए।

प्रस्तुति: सूर्यनाथ सिंह / मृणाल वल्लरी

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