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नौजवान इस देश को बदलेगा

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को हर मुद्दे पर घेरने वाले अजय कुमार को धरना पुरुष भी कहा जाता है। कभी दिल्ली और नोएडा में कारखाने में दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम कर चुके हैं और आज कांग्रेस को जनता की जंग से जोड़ने की कवायद में जुटे हैं।

Author Published on: December 22, 2019 2:30 AM
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू

कुशीनगर के सेवरही में 11 अप्रैल, 1979 को बेहद साधारण परिवार में अजय कुमार लल्लू का जन्म। तमकुही राज विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। परास्नातक तक की शिक्षा हासिल की। छात्र नेता के तौर पर अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले अजय भाजपा की लहर में भी इस सीट से 2012 और 2017 में दो बार विधायक बन कर विधानसभा पहुंचे हैं। मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता और उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को हर मुद्दे पर घेरने वाले अजय कुमार को धरना पुरुष भी कहा जाता है। कभी दिल्ली और नोएडा में कारखाने में दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम कर चुके हैं और आज कांग्रेस को जनता की जंग से जोड़ने की कवायद में जुटे हैं।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू का कहना है कि सूबे में किसान बिल्कुल हताश और निराश हैं। बुंदेलखंड में किसान कर्ज की वजह से आत्महत्या कर रहा है। रोजगार के मौके बहुत कम होने के साथ घरेलू उद्योग-धंधे बर्बाद हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में आम लोगों के हक के लिए लड़ेगी और इसके जरिए ही जनता का भरोसा हासिल करेगी। कार्यक्रम का संचालन किया कार्यकारी संपादक मुकेश भारद्वाज ने।

मनोज मिश्र : जिन हालात में आप अध्यक्ष बने हैं, क्या आपको लगता है कि ऐसे में कांग्रेस की अच्छी स्थिति बनी रहेगी। वह भी तब जब सुनने में आया है कि राज्य के कुछ नेता आपको सहयोग नहीं कर रहे हैं?
अजय कुमार लल्लू : नहीं यह बिल्कुल गलत है। पार्टी के सभी वरिष्ठ और छोटे नेता, कार्यकर्ता पार्टी को आगे बढ़ाने में तत्पर हैं। इस बात का यह गवाह है कि पिछले हफ्ते भारत बचाओ रैली में उत्तर प्रदेश के हर ब्लॉक से हर नेता बड़े उत्साह से अपने साथ लोगों को लेकर आए थे। हमारा लक्ष्य एक विधानसभा से सौ लोगों को साथ लाने का था। सभी ने अच्छा काम किया। आप देख सकते हैं कि विपक्ष के रूप में बहुत कम दिनों में प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस का हर कार्यकर्ता सड़क पर काफी संघर्ष कर रहा है। चाहे जन सरोकार, कानून व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामले हों या फिर किसानों के गन्ना बकाया का मुद्दा हो या फिर रोजगार का मुद्दा हो या फिर पीएफ घोटाले का। मुझे लगता है कि काफी चीजें बदली हैं और कार्यकर्ताओं के दम पर हम वापस होंगे।

मृणाल वल्लरी : उत्तर प्रदेश छात्र राजनीति का केंद्र रहा है और आज पूरे देश के विश्वविद्यालयों में केंद्र की नीतियों के खिलाफ आंदोलन चल रहा है। आपकी क्या रणनीति है इन छात्रों को एक करने की?
’देखिए, युवा शक्ति के बल पर जग की आजादी पलती है, इतिहास उधर मुड़ जाता है जिस ओर जवानी बढ़ती है। और आज के जो हालात हैं नौजवान इस देश की परिस्थिति को बदलेगा। भाजपा शुरू से छात्र राजनीति के खिलाफ रही है। चाहें लखनऊ विश्वविद्यालय का मामला हो या इलाहाबाद विश्वविद्यालय का, कानपुर, गोरखपुर विश्वविद्यालय में सभी जगह छात्रसंघ को समाप्त करना उनकी साजिश का हिस्सा है। छात्र राजनीति राजनीति की प्रथम पाठशाला है और हम सब उसी से निकल कर आए हैं और एक वैचारिक रूप से मजबूत भी होता है। वह समस्याओं को सुनता-समझता है और उसे उठाता है। भाजपा ने राजनीति की पौधशाला को खत्म करने का काम किया है। जिस तरह से यह छात्र संगठित और एकजुट हैं, उससे लगता है कि आने वाले दिनों में ये सरकार को कुर्सी से जमीन पर बैठाने का काम करेंगे।

दीपक रस्तोगी : केंद्र की नीतियों के खिलाफ जनता में नाराजगी दिखती है, लेकिन कांग्रेस उसे क्यों नहीं उठा पाती, जबकि चुनाव से पहले कांग्रेस रणनीति के बड़े दावे करती है, लेकिन चुनाव परिणाम के समय वह दिखता नहीं है, ऐसा क्यों?
’देखिए मैं उत्तर प्रदेश की बात करूंगा। जहां तक बात महाराष्ट्र और हरियाणा की है, तो वहां जनता ने जनादेश दिया, लेकिन उम्मीद के मुताबिक नहीं मिल पाया। वर्तमान में झूठ का बोलबाला है और यह जो सरकार हर मोर्चे पर चाहे अर्थव्यवस्था हो या फिर कानून व्यवस्था, पूरी तरह विफल है। हर विषय को तोड़-मरोड़ कर पेश करना और संविधान की आत्मा पर चोट करने का काम यह सरकार कर रही है। दोनों चुनावों में कांग्रेस ने काफी मेहनत की थी और राहुल गांधी ने भी प्रदेश के काफी मुद्दों को उठाया, लेकिन कहीं न कहीं कुछ कमियां रहीं। हमें उम्मीद है कि इन कमियों को चुनौती के साथ लड़कर पार्टी को आगे बढ़ाएंगे।

मुकेश भारद्वाज : जिस एक मुद्दे पर भाजपा ने आपको उखाड़ कर फेंक दिया, उस पर पार्टी क्यों ध्यान नहीं देती, पार्टी परिवार से आगे क्यों नहीं बढ़ पा रही है?
’गांधी परिवार का त्याग, संघर्ष और समर्पण का लंबा इतिहास है और उसे नकारा नहीं जा सकता। इंदिरा और राजीव जी ने इस देश के लिए शहादत दी है और निश्चित रूप से अगर पार्टी मजबूत है, तो वह राहुल गांधी और प्रियंका जी की वजह से है। पार्टी और संगठन को मजबूत करने के लिए कर्तव्यनिष्ठ, ईमानदार और जुझारू कमांडर की जरूरत होती है जो इस परिवार में मौजूद है। देश और कार्यकर्ता भी त्याग, संघर्ष और समर्पण को समझता है। इस नाते संगठन इनके नेतृत्व में आगे बढ़ सकता है।

पंकज रोहिला : क्या कारण है कि उत्तर प्रदेश के किसान सरकार से नाराज हैं?
’उत्तर प्रदेश में किसान बिल्कुल हताश और निराश हैं। बुंदेलखंड में किसान कर्ज की वजह से आत्महत्या कर रहा है। धान क्रय केंद्र कहीं खुले नहीं हैं। भाजपा पिछले समय में सदन में गन्ना किसानों के बकाया भुगतान की बात करती थी। संकल्प पत्र में बताया कि चौदह दिनों में भुगतान करेंगे, नहीं तो ब्याज सहित पैसा देंगे। एक तरफ सर्वोच्च न्यायालय का हवाला देकर पराली जलाने वालों पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा और दूसरी तरफ हाई कोर्ट के समाधान करने की बात पर सरकार कोई काम नहीं करती। पैंतीस सौ करोड़ रुपए से अधिक गन्ने का बकाया है और चीनी मिलों के मालिकों से गठजोड़ करने का काम यह सरकार करती है। और, जहां से गन्ना मंत्री और मुख्यमंत्री आते हैं वहीं आसपास के जिलों में ढाई सौ करोड़ रुपए से अधिक का बकाया है। किसान आलू सड़क पर फेंकते हैं, तो उस पर सरकार मुकदमा करती है। पूरे प्रदेश में ओलावृष्टि हुई, पर सरकार ने एक रुपए का मुआवजा नहीं दिया। किसान खून के आंसू रो रहा है। सरकार ने उनकी भावनाओं के साथ विश्वासघात किया है और सब मुद्दों को लेकर हम लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।

गजेंद्र सिंह : उत्तर प्रदेश में सत्ता से कांग्रेस का दूर रहने का कारण क्या जातिवाद है या कुछ और?
’उत्तर प्रदेश में 1989 के बाद जाति और धर्म का जबसे बोलबाला रहा और मुद्दों और विषयों से पूरा प्रदेश भटक गया, राजनीति भटक गई। वहीं से कांग्रेस की समाप्ति का दौर शुरू हुआ। अब समय बदला है और लोगों को लग रहा है कि धर्म और जाति से निकल कर आगे सोचना चाहिए। उत्तर प्रदेश की पहले एक पहचान हुआ करती थी, आज क्या स्थिति हो गई है! मुरादाबाद का पीतल उद्योग ठप्प है, बुनकरों के लिए बिजली के दाम दोगुना बढ़ा दिए गए, अलीगढ़ का ताला-चाबी, मेरठ का खेल उद्योग, कानपुर का चमड़ा उद्योग बंगाल जा रहा है। पूर्वांचल-पश्चिम चीनी का कटोरा था, आज मिलें बंद हैं और किसानों का बकाया है। लघु उद्योग, उद्योग जो कंग्रेस सरकार के जमाने में उत्तर प्रदेश को दिए थे, वह सब कुछ इस सरकार ने नष्ट कर दिया। सारे कारखाने खत्म हो गए। आज पैंतालीस साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी है। हम उत्तर प्रदेश को धर्म जाति की राजनीति से उठा कर ऊपर लाएंगे।

मृणाल वल्लरी : कांग्रेस का 2019 का घोषणापत्र उसकी नवउदारवादी नीतियों के ही खिलाफ था। अब अर्थव्यवस्था पर क्या सोच रही है पार्टी?
’भाजपा ने जीएसटी को लागू किया, कांग्रेस भी लागू करना चाहती थी, लेकिन उसका स्वरूप अलग था। कांग्रेस ने एक श्रेणी बनाई थी कि किस पर कितनी जीएसटी लागू करनी है, लेकिन उसे इस सरकार ने गलत तरीके से लागू करके छोटे कारोबारी, लघु उद्योग को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। खुदरा व्यापार बंद हो गया है। मैं दिल्ली की बात करता हूं, जब मैं मजदूरी करने आया था 2007 में चुनाव हारने के बाद, तो इसी नोएडा में भवन निर्माण में दिहाड़ी करके तीन से साढ़े तीन सौ रुपए कमा लेते थे। उस समय स्थिति यह थी कि गांव से हम लोग यहां आकर डेढ़ माह में कुछ न कुछ कमा कर, खरीदारी कर वापस चले जाते थे। आज क्या स्थिति है। क्या कहीं भवन बन रहा है, कितनों के पास पैसा है। लोग स्वेटर बुन के पैसा कमा लेते थे। कोई न कोई काम मिल ही जाता था। घर में रोटी जाती थी। आज क्या है। कोई नहीं आता। कांग्रेस ने लोगों को मुख्यधारा में लाने का काम किया था। देश की स्थिति देख लीजिए। आज देश की तस्वीर बदल गई और तकदीर भी बदल गई है।

दीपक रस्तोगी : लगातार मुद्दे उठाने के बाद भी राहुल गांधी अमेठी हार गए और उन्हें बाहर जाना पड़ा। ऐसा क्यों?
’मुझे लगता है कि राहुल गांधी जी ने देश में किसानों के लिए जो भूमि अधिग्रहण बिल लाने का काम किया था वह एक बड़ी क्रांति थी। बड़े उद्योगपतियों ने उनकी मुखालफत शुरू की, मैनेजमेंट किया और एक वातावरण बनाया। वे लगातार राहुल गांधी के दरवाजे पर खड़े होकर भूमि अधिग्रहण बिल न लाने की मांग करते रहे, लेकिन राहुल जी ने इस देश के किसान और नौजवान की सुनी और उस बिल को लाने का काम किया। इस कारण राहुल जी की छवि को बिगाड़ा गया।

मृणाल वल्लरी : गांधी बनाम सावरकर की बात आते ही भाजपा राहुल गांधी पर हमलावर हो जाती है, इस विचारधारा की लड़ाई को आप कैसे देखते हैं?
’यह देश गांधी, नेहरू, पटेल, आंबेडकर और तमाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का है। प्रेम और करुणा देश की पहचान रही है। जो संघ और सावरकर की विचारधारा रही है वह मैं मानता हूं कि आज वह इसे फैलाने में कामयाब रहे हैं, लेकिन फिर भी राहुल जी के नेतृत्व में कांग्रेस के एक-एक कार्यकर्ता संघर्ष कर रहा है। सच को कुछ दिन के लिए दबाया जा सकता है। लेकिन आने वाले दिन में सच ही जीतता है।

पंकज रोहिला : उत्तर प्रदेश के दो बड़े मुद्दे राम मंदिर और तीन तलाक को भाजपा भुना रही है, आपकी क्या रणनीति है?
’उत्तर प्रदेश का किसान दोगुना फसल की कीमत की बात करने वाली सरकार से जवाब चाहती है, गन्ना किसान बकाया भुगतान चाहता है, आलू किसान दाम चाहता है, कोल्ड स्टोरेज से किसान अपने सड़ रहे आलू निकाल कर बेचना चाहता है, धान का किसान धान बेचना चाहता है, बेरोजगार रोजगार चाहता है, बिजली की बढ़ी कीमतों से लोग निजात चाहते हैं, घोटाले में लिप्त सरकार से कर्मचारी अपने पीएफ के पैसे का हिसाब चाहता है, श्वेत पत्र चाहता है, महिलाएं सुरक्षा चाहती हैं, बेटियां घर से निकलकर स्वतंत्रता से जीते हुए अच्छी शिक्षा चाहती हैं, पूर्वांचल के लोग इंसेफेलाइटिस से बच्चों का जीवन चाहते हैं। ठंड में डेंगू से मरने वाले लोग बढ़ गए हैं। कानपुर से लखनऊ तक लोग बीमार पड़े रहे। छह गांवों में दस हजार के करीब लोग बीमार थे। एक-एक घर में लोग बीमार थे, उनको मैं देखने गया। भाजपा जिलाध्यक्ष के परिवार में चार लोग खुद डेंगू से बीमार हो गए। ये लोग इलाज चाहते हैं। 370 और तीन तलाक के बारे में उत्तर प्रदेश नहीं जानता।

अजय पांडेय : जबसे कांग्रेस यूपी की सत्ता से बाहर हुई है तब से लेकर आज तक कांग्रेस के यूपी अध्यक्षों ने ऐसा क्या नहीं किया, जो आप करने जा रहे हैं?
’मैं यह स्पष्ट कर दूं कि कांग्रेस कोई जातिवादी संगठन नहीं, बल्कि एक विचारधारा है। कांग्रेस ने सदा समाज के उपेक्षित, दबे, कुचले, निचले लोगों के उत्थान की लड़ाई लड़ी है। कांग्रेस पिछड़े, अति पिछड़े, दलित सब की आवाज बनी है। सामंतशाही के खिलाफ लड़ी है, कांग्रेस ने राजाओं का घमंड तोड़ा है। इसलिए यह किसी वर्ग और जाति में बांट देना गलत होगा। सबने वोट दिया तब कांग्रेस की सरकार बनी। और 2022 में एक-एक नौजवान, किसान, महिलाएं-बेटियां, मजदूर घर से निकल कर कांग्रेस की सरकार बनाने आगे आएंगे। एक जाति नहीं, बल्कि सभी धर्म और वर्ग के लोग सरकार बनाएंगे। पिछले अध्यक्षों ने भी कई अच्छे काम किए। लेकिन कुछ में सफलता मिलती है कुछ में नहीं मिलती है। यह चलता रहता है। आज प्रियंका गांधी जी के आने के बाद कांग्रेस का कार्यकर्ता बहुत उत्साहित है। हर तरह के कार्यों को लेकर आगे आ रहा है। जेल जा रहा है और लड़ रहा है। हमें भरोसा है कि हम लड़ेंगे और जीतेंगे भी।

सूर्यनाथ सिंह : कांग्रेस विचारधारा की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ शिवसेना से गठबंधन करती है, यह विचलन नहीं तो क्या है?
’यह जो महाराष्ट्र की सरकार का मामला है उसमें हमें अखबारों और टीवी से पता चला कि सोनिया गांधी जी ने धर्मनिरपेक्षता, सभी वर्गों की बात कही है। और यह वचन लिया कि हम आपके साथ गठबंधन शब्द कहना तो गलत होगा, लेकिन साझा समझौता करके सरकार बनाते हैं तो इन विषयों पर ध्यान देना होगा। और मुझे लगता है कि इन साझा कार्यक्रमों पर सबकी सहमति बनी और शिवसेना धीरे-धीरे उन विषयों पर आगे चल रही है।

मुकेश भारद्वाज : आपके बयान में प्रियंका गांधी का बहुत जोर है, इसे क्या समझा जाए?
’प्रियंका कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव हैं और इस नाते वह उत्तर प्रदेश में प्रभारी हैं। इसलिए नेतृत्वकर्ता भी हैं। मुझे लगता है कि राहुल गांधी हमारे नेता थे, हैं और रहेंगे। वे मजदूरों, किसानों, बेरोजगारों और नौजवानों की आवाज हैं। अगर देश में आमूल चूल परिवर्तन होगा तो वह राहुल जी के नेतृत्व में ही होगा।

 

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