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राजनीति में खेल भावना जरूरी है

कांग्रेस नेता कीर्ति झा आजाद का कहना है कि शीला दीक्षित की पंद्रह साल की दिल्ली आज भी विकास का मॉडल है। अण्णा आंदोलन की पैदाइश आम आदमी पार्टी ने अपने झूठे वादों और छल-प्रपंच से जनता को गुमराह कर कांग्रेस की छवि खराब की।

Author Published on: January 19, 2020 2:04 AM
दिल्ली कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के प्रमुख कीर्ति आजाद।

क्रिकेट के साथ राजनीति के मैदान में भी सफल पारी खेलने वाले कीर्तिवर्धन भागवत झा आजाद मौजूदा समय में दिल्ली कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष हैं। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद के बेटे कीर्ति आजाद का जन्म 2 जनवरी, 1959 को बिहार के पूर्णिया में हुआ था। स्नातक तक पढ़ाई दिल्ली से की। कीर्ति आजाद 1983 में क्रिकेट विश्व कप विजेता भारत की टीम में शामिल थे। अपने राजनीतिक करिअर की शुरुआत में ही 2014 में भाजपा के टिकट पर दरभंगा से पहला चुनाव लड़ा और संसद तक पहुंचे। 18 फरवरी, 2018 को इन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। सामाजिक कल्याण संगठन से भी जुड़े हैं। राजनीति के गलियारों में बिहार की सांस्कृतिक पहचान और अपनी बेबाक आवाज के लिए जाने जाते हैं।

कांग्रेस नेता कीर्ति झा आजाद का कहना है कि शीला दीक्षित की पंद्रह साल की दिल्ली आज भी विकास का मॉडल है। अण्णा आंदोलन की पैदाइश आम आदमी पार्टी ने अपने झूठे वादों और छल-प्रपंच से जनता को गुमराह कर कांग्रेस की छवि खराब की। जिस टूजी घोटाले पर इतना हल्ला मचा, अदालत में वह साबित नहीं हो पाया। आजाद ने कहा कि बिजली, पानी से लेकर अनियमित कॉलोनियों पर जो काम हमने शुरू किया, केजरीवाल उसे अपना बता कर जनता के सामने परोस रहे हैं। बातचीत कार्यक्रम का संचालन किया कार्यकारी संपादक मुकेश भारद्वाज ने।

मनोज मिश्र : विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, लंबे समय तक भाजपा में रहने के बाद, अब आपके सामने कांग्रेस को चुनाव जिताने की चुनौती है। इसे कैसे ले रहे हैं?
कीर्ति आजाद : मुझे चुनौतियां अच्छी लगती हैं। चुनौतियों के बिना जीवन का कोई अर्थ नहीं है। लंबे समय तक मैं खिलाड़ी रहा। मेरे पिताजी खुद स्वतंत्रता सेनानी थे और बिहार के मुख्यमंत्री रहे। उनकी शिक्षा थी कि बचाव का सबसे बढ़िया तरीका है आक्रमण। मैं सदा इसमें विश्वास करता हूं। मुझे आदरणीय सोनिया जी ने एक मौका दिया है। छह महीने आए हुए हुए हैं मुझे कांग्रेस में और प्रचार समिति का उन्होंने अध्यक्ष बनाया है। इस कार्य में पूरे तरीके से लगा हुआ हूं। मेरा यही विचार है कि हार और जीत सिक्के के दो पहलू हैं। हार कर हताश होकर कोई बैठ जाए तो वह कभी जीत नहीं सकता है। इसलिए जो दायित्व मुझे मिला है, उसे निभाने का पूरा प्रयास है।

अजय पांडेय : दिल्ली में कांग्रेस का मुख्यमंत्री का उम्मीदवार कौन है?
इसका जवाब देने के लिए मैं नहीं हूं। इसका जवाब तो केंद्रीय नेतृत्व ही दे सकता है। मगर हमारे पास कई ऐसे काबिल और वरिष्ठ नेता हैं, जो इसके योग्य हैं।

मृणाल वल्लरी : नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर दिल्ली और पूरे देश में प्रदर्शन हो रहे हैं। मगर केजरीवाल सरकार इस पर चुप्पी साधे हुए है। क्या इस चुप्पी को कांग्रेस जनता के सामने ले जाएगी? कांग्रेस का क्या कदम होगा?
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि सीएए, एनपीआर और एनआरसी का हम समर्थन नहीं करते। जहां-जहां हमारी सरकारें हैं, वहां हमने मना कर दिया है। दिल्ली में भी हमारी सरकार आएगी तो यहां हम मना करेंगे। अगर हम अपने देश के संविधान की मूल भावना को देखें तो एनआरसी और एनपीआर उसके खिलाफ है। संयुक्त राष्ट्र का शरणार्थियों से संबंधित दस्तावेज देखें तो उसमें लिखा है कि जो लोग अपने देश में प्रताड़ित हुए हैं और कहीं शरण लेना चाहते हैं, तो ले सकते हैं। उसमें कहीं नहीं लिखा है कि कोई इस्लामिक स्टेट का है, तो उसे नागरिकता नहीं दी जा सकती। क्या भारत हिंदू देश है? अगर हिंदू राष्ट्र है, तो मत दीजिए। अगर कोई व्यक्ति यहां प्रताड़ित होकर आता है, तो उसे नकार नहीं सकते। क्या अहमदिया मुसलमान बांग्लादेश और पाकिस्तान में नहीं रहते? क्या उन्हें प्रताड़ना नहीं मिलती? क्या अफगानिस्तान के बलोच मुसलमानों पर प्रताड़ना नहीं होती? क्या वे यहां आएंगे, तो उन्हें शरण नहीं देंगे। हमारी परंपरा रही है कि जितने लोग हमारे देश में शरणागत हुए हैं, उन्हें हमने शरण दी है। पर्सिया से, जो अब ईरान है, जब लोग आते थे, तब उन्हें भी हमने स्थान दिया। भारत एक ऐसा देश है, जहां जितने भी धर्म और पंथ हैं, उन्हें बराबर का सम्मान दिया है। मगर पिछले छह सालों में जबसे एनडीए की सरकार आई है, वह सिर्फ जोड़तोड़ की राजनीति में लगी हुई है, उसे इसकी फिक्र क्यों होगी। और आम आदमी पार्टी, जो आंदोलन से निकल कर आई थी, वह जब अपने गुरु अण्णा हजारे की नहीं हो सकी, तो वह सीएए और एनआरसी एनपीआर पर चुप्पी साधे हुई है, तो ज्यादा हैरान होने की बात नहीं। ये लोग केवल वोट की राजनीति करना चाहते हैं।

निर्भय कुमार पांडेय : दिल्ली के चुनाव में कांग्रेस के पास क्या मुद्दे हैं?
पंद्रह साल कांग्रेस वाली दिल्ली, खुशहाल दिल्ली, कांग्रेस के पंद्रह साल, विकास हुए बेमिसाल। आप तुलना कीजिए न! अभी जो यह झुनझुना इन्होंने पकड़ाया अगस्त में। साढ़े चार साल तक तो ये रोते रहे कि हमें एलजी और प्रधानमंत्री काम नहीं करने दे रहे। ऐसा क्या हुआ कि पिछले चार महीनों में आपको काम करने दिया और आप फ्री बांट रहे हैं। वह भी आपकी नोटिफिकेशन इकतीस मार्च तक है। उसके बाद उस फ्री का क्या होगा। आपने सिर्फ जुमले छोड़े? इसका फायदा भी कितने लोगों को मिल रहा है? केवल बीस फीसद लोगों को मिल रहा है। हम जब आए थे, तब दिल्ली में केवल सात से आठ घंटे बिजली मिला करती थी। हमने उसका निजीकरण किया और व्यवस्था दुरुस्त की। बिजली की पचास फीसद चोरी रोकी। इसका मतलब पांच हजार करोड़ का सीधे फायदा दिल्ली को दिया। अब चौबीस घंटे दिल्ली को बिजली मिलती है। वह व्यवस्था हमने तैयार की थी। इसी तरह पानी की व्यवस्था भी दुरुस्त की। मगर दुर्भाग्यवश इन लोगों के झूठे प्रपंच के माध्यम से शीला जी हार गर्इं। वरना इन्होंने दो सौ यूनिट किया है, हम छह सौ यूनिट करते। हम इसे करेंगे, जिससे सत्तर फीसद लोगों को सीधा फायदा मिलेगा। पेंशन पांच हजार रुपए करेंगे। हमने पांच हजार सात सौ इकहत्तर किलोमीटर सड़कें बनार्इं, आम आदमी पार्टी ने शून्य बनाया। हमने अठहत्तर फ्लाई ओवर बनाए, आम आदमी पार्टी ने शून्य बनाए। हमने उनतीस अस्पताल खोले, इन्होंने शून्य। हमने नौ विश्वविद्यालय खोले, इन्होंने शून्य। इस तह जब आप कामों की तुलना करेंगे, तो देखें कि पंद्रह साल में हमने क्या काम किया। जो काम हम करके गए थे, उसके फीते ये काट रहे हैं। यह सब लोगों को बताना हमारा दायित्व है।

पंकज रोहिला : कच्ची कॉलोनियों को पक्का करना कांग्रेस का बड़ा लक्ष्य था, जो कभी पूरा नहीं हो पाया। अब वह काम पूरा हुआ है। इसे आप कैसे देखते हैं?
यह भी झूठ है। जब हमने एलजी से बात करके 2013 में चिट्ठी निकलवाई थी, तो उसमें कहा गया था कि इन कॉलोनियों का नक्शा बनाना शुरू करें। इसमें कौन-कौन लाभार्थी हैं उनके कागज देख कर उन्हें मालिकाना हक दिया जाए। यह बात 2013 की है। मगर फिर हम हार गए। अरविंद केजरीवाल की सरकार बनी। अगर ये लोग तब यह काम कर देते, तो अच्छा रहता। अभी जो हुआ है, उसमें तमाम खामियां हैं। इन्होंने नक्शे नहीं बनाए। दो एजंसियों को इस काम में लगाया और उन दोनों एजंसियों के टेंडर खारिज हो गए। साढ़े चार साल इन्होंने कुछ नहीं किया और जब छह महीने रह गए, तो चिल्लाना शुरू किया। फिर मोदी जी ने सबको नियमित कर दिया। विधेयक था, उसे कानून बना दिया। मगर उसमें इन्होंने एक धारा रखी है- 7ए। यह धारा हमारे समय में नहीं थी। इस धारा में यह है कि जो जंगल और खेती की जमीन है, यमुना पुश्ते की जमीन है, पीडब्लूडी की जमीन है, पुरातत्त्व विभाग की जमीन है, जहां हाइटेंशन वायर जाते हैं, वहां मालिकाना हक नहीं मिलेगा। इस तरह सत्रह सौ इकतीस में से नौ सौ सत्तावन कॉलोनियां ऐसी हैं, जो इन क्षेत्रों में आती हैं। बाकी बचीं सात सौ चौंतीस कॉलोनियां। वैसे देखा जाए, तो इन सत्रह सौ में से किसी को मालिकाना हक मिल ही नहीं सकता, क्योंकि इसमें लिखा है-सिर्फ रिहाइशी। मगर आप देखें तो इन कॉलोनियों में ऊपर घर और नीचे दुकानें हैं। उन्हें इस कानून के तहत मालिकाना हक मिल ही नहीं सकता, क्योंकि सबको अपना भूउपयोग बदलवाना होगा। ये सारी जगहें सील होंगी। तो, यह केवल एक दिखावा है। दुर्भाग्य है कि चुनाव आने के समय यह फैसला इन्होंने किया है। अगर यह काम इन्होंने पहले कर लिया होता, तो आज जो प्रवासियों पर गाज गिर रही है, वह न गिरती। ये प्रवासी देश के सभी हिस्सों से आए हैं। भूउपयोग न बदलने से न जाने कितने लोगों पर गाज गिरेगी।

मुकेश भारद्वाज : आप खिलाड़ी रहे हैं और जानते हैं कि टीम में कप्तान की भूमिका अहम होती है। यहां कप्तान केजरीवाल हैं। भाजपा में मनोज तिवारी हैं। आपके पास सुभाष चोपड़ा हैं। क्या सोच कर आपने उन्हें पार्टी की अगुआई सौंपी है?
वे बड़े वरिष्ठ हैं। तीन बार सांसद रहे हुए हैं। निगम परिषद में भी रहे हैं। जब वे अध्यक्ष थे और उनके समय में 2002 में निगम के चुनाव हुए तो एक सौ बत्तीस में से एक सौ आठ सीटें हमने जीती थीं। उनका योगदान तो है, उनका अनुभव है। उनका होश है और हमारा जोश है, मिल कर काम करेंगे।

सूर्यनाथ सिंह : तो, वे खुद चुनाव क्यों नहीं लड़ रहे?
यह तो उनका बड़प्पन है कि वे चुनाव नहीं लड़ना चाहते।

दीपक रस्तोगी : इस चुनाव में आम आदमी पार्टी और भाजपा आक्रामक तरीके से चुनाव प्रचार में जुट गई हैं, मगर कांग्रेस अब भी संगठन को दुरुस्त करने में लगी हुई है। ऐसे कैसे चुनाव में कामयाबी मिलेगी।
चुनाव प्रचार जो नजर आता है, सड़कों, रेडियो, टेलीविजन पर वह पंद्रह से बीस फीसद लोगों तक पहुंचता है। दिल्ली की सत्रह सौ कॉलोनियों में एक करोड़ सात लाख लोग रहते हैं। उनसे सीधे मिलने, पैंफ्लेट्स के साथ संपर्क करने, एक-एक से सामने बात करने, उन्हें समझाने से जो असर पड़ता है, उतना दूसरी चीजों से नहीं पड़ता। अरविंद केजरीवाल जो दिखा रहे हैं, उसे सिर्फ कुछ लोग समझते हैं। फिर जो वे कह रहे हैं, वह वास्तविकता से काफी दूर है। आपने सड़कें देखी हैं? पानी और बिजली का फायदा कितने लोगों को मिल रहा है? केवल साढ़े पांच फीसद लोगों को पानी का सीधा कनेक्शन मिला है। यह आरटीआइ से निकला आंकड़ा है। बिजली से केवल बीस फीसद लोगों को फायदा हो रहा है। मोहल्ला क्लिनिक इन्होंने हजार बनाने की बात की थी, पर एक सौ नवासी बने हैं। कोई आधारभूत संरचना नहीं खड़ा किया। गरीब लोेग समझते हैं कि उसे दो सौ यूनिट बिजली मुफ्त मिल रही है, मगर वे यह नहीं समझते कि जब हम छोड़ कर गए थे तब बिजली की कीमत क्या थी और अब क्या है। इन्होंने सौदा किया था दरों को लेकर।

मृणाल वल्लरी : यहां पूर्वांचलियों को इस तरह समेट दिया गया है कि वे सिर्फ मतदाता के रूप में रहते हैं। वे राजनीतिक दबाव समूह नहीं बन पाते, इसे आप कैसे देखते हैं?
यहां पर सब कुछ संगठित करना होगा। यहां अधिकतर लोग सुबह काम पर निकलते हैं और रात को वापस लौटते हैं, दैनिक मजदूरी करते हैं। उन सबको संगठित करना होगा। जो असंगठित क्षेत्र में हैं, उन्हें इसके बारे में अधिक मालूम नहीं है। इसके कारण जो दबाव बनना चाहिए वह दबाव नहीं बन पाता। हमने पूर्वांचल क्रांति संघ के माध्यम से यह किया था। हमने कहा था कि जब सबका अपना संगठन हो सकता है, तो पूर्वांचलियों का क्यों नहीं हो सकता। अब स्थिति यह है कि यहां के लोग, जो पहले छठ पूजा का मजाक बनाते थे, वही खड़े होकर छठ पूजा करवाते हैं, इसलिए कि उन्हें वोट की दरकार है।

सूर्यनाथ सिंह : इस चुनाव में कांग्रेस को भाजपा और आम आदमी पार्टी दोनों की कमियों को बताना है, पर अभी तक लोग नहीं भूले हैं कि शीला जी ने दिल्ली को सिंगापुर और शंघाई बनाने, यमुना को टेम्स बनाने का जो सपना दिखाया था, वह पूरा नहीं हुआ। फिर भ्रष्टाचार के भी कई आरोप हैं। इससे कैसे पार पाएंगे?
किसी काम में भ्रष्टाचार को लेकर शीला जी की सरकार पर कोई मामला दर्ज नहीं है। खेलगांव मामले में सुरेश कलमाड़ी जेल गए, तो वे खेल संघ के अध्यक्ष थे। कलमाड़ी का शीला दीक्षित सरकार से कोई लेना-देना नहीं था। वे भारतीय ओलंपिक संघ के तीस साल से अध्यक्ष थे। उन पर भी आज तक यह साबित नहीं हुआ कि उन्होंने घोटाला किया था। जैसे टूजी में कनिमोझी और ए. राजा जेल गए, पर फैसला आया, तो कहा गया कि उसमें एक पैसे का घोटाला नहीं हुआ। इसी तरह कोयला घोटाले में सब बरी हो गए। अभी धारणा बनाने की राजनीति चल रही है। यह झूठ का प्रचार हमारे देश को बर्बाद कर रहा है। खासकर हमारे नौजवानों को ये लोग दिग्भ्रमित कर रहे हैं।

मुकेश भारद्वाज : आप दिल्ली में अपनी सरकार बनती देख रहे हैं, पर आपकी पार्टी का आंतरिक सर्वेक्षण बताता है कि शायद कोई एक सीट आ जाए। फिर भी आप आशान्वित हैं, तो लोग क्यों आपको चुनें?
किसी भी सरकार को चुनने के लिए उसके काम को देखा जाता है। आम आदमी पार्टी ने जो-जो देने का वादा किया, वह कुछ नहीं किया। हमने पंद्रह सालों में खोखले वादे नहीं किए। हमारे किए हुए काम हैं। लोग इसकी तुलना करेंगे।

मृणाल वल्लरी : अभी दिल्ली में जो छात्र आंदोलन चल रहे हैं, उनके केंद्र में वाम संगठन हैं, लेकिन जाहिर है कि विधानसभा चुनाव में वाम बड़ी शक्ति नहीं है। इस आंदोलन को अपनी तरफ मोड़ने के लिए आप क्या करेंगे?
’हमें इसके लिए कुछ करने की कोई जरूरत नहीं। सबसे पहली बात तो यह है कि कोई वामपंथी हो या दामपंथी हो, सबको अपने विचार रखने की आजादी है। विद्यार्थियों के ऊपर इस तरह लाठी बरसाना उचित नहीं है।

 

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