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बारादरी: प्रचंड बहुमत के बाद शून्य अधिकार

एनडी गुप्ता ब्रिटिश शासनकाल के समय 16 अक्तूबर, 1945 को सोनीपत में जन्मे नारायण दास गुप्ता एक राजनेता होने के साथ-साथ सफल चार्टड एकाउंटेंट भी हैं। सात भाई-बहनों में एनडी गुप्ता तीसरे स्थान पर आते हैं। आर्थिक नीतियों के मामलों के जानकार गुप्ता ने करों पर तमाम तरह की किताबें लिखीं हैं। गुप्ता इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। आम आदमी पार्टी की ओर से गुप्ता को राज्यसभा भेजा गया है। गुप्ता ‘आप’ के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष भी हैं। सीए की परीक्षा काफी अच्छे अंकों से उत्तीर्ण करने वाले गुप्ता अमेरिका के इंटरनेशनल फेडरेशन आॅफ अकाउंट के बोर्ड में शामिल होने वाले पहले भारतीय रहे हैं।

Author April 28, 2019 7:37 AM
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद एनडी गुप्ता। (फोटो: आरुष चोपड़ा)

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद एनडी गुप्ता का कहना है कि हमें दिल्ली में कांग्रेस के साथ गठबंधन की जरूरत नहीं थी। केंद्र सरकार पर अरविंद केजरीवाल के हमलावर रुख को लेकर उन्होंने कहा कि अगर सड़सठ सीटें जीतने के बाद भी आपके पास शून्य अधिकार हो तो दुख तो होता ही है। यही दुख तेज आवाज बन कर निकलता है। उन्होंने दावा किया कि हमारे सातों उम्मीदवार मजबूत हैं और लंबे समय से क्षेत्र में काम कर रहे हैं, इसलिए सातों सीटों पर जनता हमारा समर्थन करेगी। बातचीत कार्यक्रम का संचालन किया कार्यकारी संपादक मुकेश भारद्वाज ने।

पंकज रोहिला : गठबंधन के कारण टिकटों के एलान में देरी हुई। कांगे्रस की रणनीति का नफा-नुकसान क्या है, स्टार चेहरे भी मैदान में हैं।
एनडी गुप्ता : गठबंधन पर मेरी व्यक्तिगत राय थी कि यह नहीं होना चाहिए। मैं इसके पक्ष में नहीं था। इस मामले में मेरी राय पर पार्टी के किसी नेता ने कोई टिप्पणी नहीं की। गठबंधन आम आदमी पार्टी की जरूरत है ही नहीं। यह लड़ाई जनता और भाजपा के बीच है। आम आदमी पार्टी हर मोर्चे पर खरी उतरी है। हम सातों सीट जीतेंगे। जो काम किया है, जनता देख रही है। पंजाब से हार के बाद निगम चुनाव के समय में कार्यकर्ता हताश थे और उसका असर दिखा था। आज जो भी सात प्रत्याशी हैं, अपने इलाके में काम कर रहे हैं।

अजय पांडेय : आम आदमी पार्टी का गठन कांग्रेस के खिलाफ ही खड़े होकर हुआ था और आज गठबंधन पर लंबी खींचतान चली। इसे कैसे देखा जाए?
’अंग्रेजों के समय से ही बांटो और राज करो की नीति इस देश में चल रही है। लोगों को हिंदू, मुसलमान और दलित में बांटा जा रहा है। इससे निजात पाने के लिए क्या किया जाए। इससे निकलने का प्रयास किया जाए। इस समय देश के बारे में सोचा गया है। संविधान में केंद्र और राज्य की शक्तियां स्पष्ट हैं। राज्य की शक्तियों से छेड़छाड़ हुई है। इसमें दोनों के बीच का हिस्सा स्पष्ट किया गया है। 2019 में वित्त विधेयक से स्टांप ड्यूटी का अधिकार भी केंद्र सरकार लेना चाहती है। अभी मोटर वीकल एक्ट लगा है। इस बिल को हमने अटका रखा है, क्योंकि राज्य की शक्तियां छीनी जा रही हैं। इसलिए एक सोच बनी थी कि सब मिल कर किसी तरह से भाजपा को रोकें। इन लोगों ने अधिकार लेने के बाद भी कुछ काम नहीं किया। अधिकार छिनने पर क्या करें। आज युवा दिशाहीन हैं और उनके पास रोजगार नहीं है। संसद में प्रश्नकाल में इसका जवाब नहीं दे पाए। इसके पंद्रह दिन बाद पता चला कि पीएफ में ठेकेदारों को पंजीकरण करा कर संख्या बढ़ाई गई। यह महागठबंधन केवल लोकसभा चुनाव के लिए होना था। यह कांग्रेस का निर्णय था। दिल्ली समेत इकतीस सीटों पर गठबंधन होना था। यह देशहित में एक सोच थी। आज के समय में कैसे निजात पाई जाए। नवंबर 2016 में नोटबंदी हुई। कहा कि इससे कालाधन पकड़ा जाएगा। बाद में कैशलेस और डिजीटल व्यवस्था की बात कही। फिर कश्मीर के पत्थरबाजों को रोकने की बात की। नोटबंदी को लेकर हर बार भाजपा ने अपने बयान बदले हैं।

मृणाल वल्लरी : आम आदमी पार्टी ने अपने घोषणापत्र में दिल्लीवालों को आरक्षण देने की बात कही है। क्या यह एक तरह का विभाजन नहीं है, संकीर्ण मानसिकता नहीं है?
’ दिल्ली में एक समस्या छात्रों की है। नब्बे फीसद वालों को भी मौका नहीं मिल रहा है। सत्तर फीसद छात्र बाहर के हैं। हमने वादा किया था कि स्कूल और कॉलेज जोड़ेंगे, लेकिन डीडीए ने जमीन नहीं दी। इसकी जानकारी मीडिया को कई बार जारी की गई है। इसके प्रमाण हैं। विधायक और पार्षद इस काम के लिए आते हैं। इसलिए अब हमें दिल्लीवाला कहना होता है। नब्बे फीसद लोगों को पता नहीं होता है कि पूर्ण राज्य और एनसीटी क्या है। पंजाब और हरियाणा के पास अधिक शक्तियां हैं। हमने वादा किया है कि आगे से जो भी नौकरी और कक्षाएं होंगी, पचासी फीसद दिल्लीवालों के लिए होंगी। हम किसी तरह का बंटवारा नहीं कर रहे हैं। पर हम दिल्लीवालों को दूसरे दर्जे का कैसे मान सकते हैं। दूसरे राज्य के लोग बाहर भी लाभ लेते हैं और दिल्ली में भी।

मनोज मिश्र : इस लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी किन मुद्दों पर वोट मांगेगी।
’ 2015 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने इतिहास रचा। एक संकल्प पत्र जारी किया था। जो भी वादे किए थे पानी, बिजली, स्वास्थ्य, कच्ची कॉलोनी में सीवर सिस्टम सभी पर काम किया। ये सब उस समय किया, जब हमारे पास शक्तियां नहीं थीं। कानून व्यवस्था, पुलिस, डीडीए नहीं रहे। आम आदमी पार्टी की सरकार बनने तक 21 मई 2015 को ये शक्तियां वापस ले लीं। आज दिल्लीवालों से डेढ़ लाख करोड़ का राजस्व जाता है। हमारा 2019 का बजट साठ हजार करोड़ का है। बिजली-पानी का वादा पूरा किया। जब हम दिल्ली में आए थे, तो इनवर्टर, जनरेटर खूब इस्तेमाल होता था। लेकिन हमने उन्हें खत्म किया है। हम बेहतर क्वालिटी की बिजली दे रहे हैं। हमारी सरकार बनने से पहले यह हालत नहीं थी।

पंकज रोहिला : दिल्ली की सात सीटों से पूर्ण राज्य की लड़ाई कैसे होगी?
’तीन राज्यसभा और चार सांसद लोकसभा से हैं। अगर ह्विप जारी होता है तो आज उन्हें आम आदमी पार्टी को ही वोट देना होगा। हमने पहले दिन सीलिंग का मुद्दा उठाया था। अब तक बीस हजार दुकानें बंद हुई थीं। संसद में विधेयक लाए गए। तीन तलाक और आरक्षण के बिल लाए गए। दिल्ली वालों का क्या कसूर है। एक दुकान बंद होने से कई परिवारों पर सीधा असर होता है। हमने यह मुद्दा उठाया। हमने इनके बिल पास होने नहीं दिए। एक भी सांसद काफी होता है।

मुकेश भारद्वाज : आप तीन तलाक के समर्थन में क्यों हैं?
’ तीन तलाक पर विभाजन हो रहा है। यह एक समुदाय की धार्मिक आस्था पर हमला है। यह अच्छी बात नहीं है। अगर तीन तलाक आस्था का सवाल नहीं है तो फिर केरल में सबरीमला में अलग स्टैंड क्यों लिया। आस्था के मुद्दे पर तो एक जैसा स्टैंड रखना चाहिए। वोट की राजनीति होती है, तो आना पड़ता है। तीन तलाक पर लाते हैं, लेकिन सीलिंग पर अध्यादेश क्यों नहीं लाते। दिल्ली सरकार को सीलिंग को लेकर कुछ नहीं करना है। अगर हम कर भी दें तो उपराज्यपाल नहीं करने देंगे। अध्यादेश लेकर आना चाहिए। इससे पहले भी कांगे्रस के कार्यकाल में अध्यादेश लेकर आए थे।

दीपक रस्तोगी : जीएसटी को चुनावी मुद्दा बना रहे हैं, लेकिन विपक्ष ने जीएसटी काउंसिल या संसद में अपनी बात गंभीरता से क्यों नहीं रखी?
’ जब जीएसटी पास हुआ तो सभी की सहमति से पास हुआ। भाजपा कांग्रेस के समय में जीएसटी को लेकर कुछ और कहती थी और अब कुछ और कहती है। जबसे जीएसटी आया है, लगातार संशोधन किए जा रहे हैं। अब भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कल एक नया मामला आया है कि मिक्स सर्विस और आफ्टर सेल पर टैक्स के ढांचे तय किए गए हैं। अब आम आदमी तो चार्टर्ड एकाउंटेंट नहीं रख सकता है।

अजय पांडेय : आम आदमी पार्टी में कई बड़े नेताओं को पार्टी छोड़नी पड़ी, इसकी क्या वजहें हैं?
’ मेरे आने के बाद दो आदमियों ने पार्टी छोड़ी थी। आशुतोष को मैंने कहा था कि अगर आप मेरी वजह से जा रहे हैं, तो मैं इस पार्टी से इस्तीफा दे सकता हूं। लेकिन उन्होंने कहा कि मैं वजह नहीं हूं। आशीष खेतान ने कानून की उच्च शिक्षा के लिए पार्टी छोड़ दी। बाकी अंदर के कारण मैं नहीं जानता।

मुकेश भारद्वाज : हरियाणा के नेता चौधरी वीरेंद्र सिंह ने कहा था कि सांसद का टिकट सौ करोड़ रुपए में बिकता है। आप आए तो इस तरह की बात भी मुद्दा बनी थी।
’जीरो से हीरो भी बनते हैं। मैं चार्टर्ड एकाउंटेंट हूं। मैं उतना कमाता हूं जितने में अच्छी लाइफ जी सकूं। मैं सीए संगठन में सक्रिय हूं और वहां अध्यक्ष भी बना। कभी भी पैसा कमाने पर ध्यान नहीं रहा। मेरा इनकम टैक्स रिटर्न भी सबके सामने है। मेरे पास पैसा नहीं है। मुझसे किसी ने कोई पैसा नहीं मांगा। एक बार इनकम टैक्स की बात करने के लिए गया था केजरीवाल के पास। जब गाड़ी में बैठने लगा तो अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आप राज्यसभा सांसद के लिए तैयारी कर लेना। बाद में राघव चड्ढा पेपर लेकर आए थे। मैंने पर्चा भरा और राज्यसभा सांसद चुना गया।

आयेंद्र उपाध्याय : अरविंद केजरीवाल पर तानाशाही के आरोप क्यों लगते हैं?
’किसी भी परिवार को ठीक तरह से चलाने के लिए बुजुर्गों को जिम्मेदारी लेनी होती है। यह एक नई पार्टी बनी। इसमें देश के कोने-कोने से लोग जुड़े। आप जिसे तानाशाही कहते हैं उसे अनुशासन कहा जा सकता है। पार्टी को चलाने के लिए एक अनुशासन चाहिए होता है। इस वजह से ही आम आदमी पार्टी को बड़ा जनादेश मिला और सड़सठ सीटें मिलीं। वे यह सब पार्टी में अनुशासन बनाने के लिए करते हैं। वे जिसके बारे में भी बोलते हैं खुल कर बोलते हैं। अगर जोर से बोलते हैं तो इसलिए कि कहीं दुख तो है कि सड़सठ सीट के बाद भी शक्तियां जीरो कर दीं। गुस्सा भी होते हैं, तो दस मिनट में सामान्य हो जाते हैं।

अजय पांडेय : दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को श्रेय जाता है कि पंद्रह सालों में उन्होंने विकास के खूब काम किए। क्या आप इससे सहमत हैं?
’इस बात से हम इनकार नहीं करते। अरविंद केजरीवाल ने भी कहा था कि विकास हुआ है। लेकिन जनता ही थी, जिसने उनको भी हरा दिया। कई बार हो जाता है। कॉमनवेल्थ खेल हुए थे। उसमें कई गलतियां हो गर्इं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि विकास हुआ है।

सूर्यनाथ सिंह : राष्ट्रीय स्तर की तो बात दूर, अरविंद केजरीवाल दिल्ली के बाहर एनसीआर स्तर के भी नेता नहीं बन पाए हैं। इसकी वजह कहीं उनकी महत्त्वाकांक्षा तो नहीं रही?
’आज हर राज्य में आम आदमी पार्टी की उपस्थिति है। हमारे राज्य में खाते हैं और हम अपना कैडर बना रहे हैं। पंद्रह दिन पहले गुवाहाटी और नॉर्थ ईस्ट में भी हराने की बात चल रही है। हम हर राज्य में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहे हैं। हमारे पास फंड की कमी है। अब भी आ रहे हैं, लेकिन वे काफी कम हैं। आतिशी, पंकज गुप्ता और राघव चड्ढा अपने विशेष क्षेत्रों से छोड़ कर जनता के लिए काम करने आए हैं और लगातार काम कर रहे हैं। समय लगेगा और हम धीरे-धीरे काम कर रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में काम हुआ है और लोग मन से लगे हुए हैं। देश फंसा हुआ है और अगर हम इसे बाहर निकालने में कुछ योगदान कर सकते हैं, तो कर रहे हैं। यही आम आदमी पार्टी की कोशिश है।

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